लखनऊ अग्निकांड के बाद जयपुर में 13 कोचिंग सील
लखनऊ अग्निकांड के बाद जयपुर में 13 कोचिंग सील जयपुर प्रदेश का प्रमुख कोचिंग केंद्र माना जाता है। यहां हर साल हजारों छात्र मेडिकल, इंजीनियरिंग, प्रशासनिक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। ऐसे में किसी…

सौजन्य से:- Live Hindustan
लखनऊ अग्निकांड के बाद जयपुर में 13 कोचिंग सील
जयपुर प्रदेश का प्रमुख कोचिंग केंद्र माना जाता है। यहां हर साल हजारों छात्र मेडिकल, इंजीनियरिंग, प्रशासनिक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। ऐसे में किसी भी दुर्घटना का असर केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं रहता
लखनऊ के कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत के बाद जयपुर प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। शहर में हजारों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी भी तरह की सुरक्षा चूक को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़े पैमाने पर जांच अभियान शुरू किया है। मंगलवार को नगर निगम और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीमों ने शहर के विभिन्न कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की पड़ताल की, जिसमें कई गंभीर खामियां सामने आईं।
13 कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई
फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं करने और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं में कमी पाए जाने पर नगर निगम ने अब तक 13 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया है। इनमें रिद्धि सिद्धि क्षेत्र, गोपालपुरा बाइपास, त्रिवेणी चौराहा और गोपालपुरा चौराहे के आसपास संचालित कई संस्थान शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि जहां भी छात्रों की सुरक्षा से समझौता होता दिखाई देगा, वहां बिना किसी रियायत के कार्रवाई की जाएगी।
24 से ज्यादा संस्थानों को नोटिस
जांच के दौरान कई ऐसे कोचिंग सेंटर भी मिले जहां सुरक्षा व्यवस्था अधूरी या नियमों के अनुरूप नहीं पाई गई। ऐसे 24 से अधिक संस्थानों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नोटिस के बावजूद सुधार नहीं होने पर इन संस्थानों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
फायर सिस्टम और इमरजेंसी एग्जिट पर खास नजर
निरीक्षण के दौरान अधिकारी यह जांच रहे हैं कि भवनों में लगे फायर फाइटिंग सिस्टम काम कर रहे हैं या नहीं। अग्निशमन यंत्रों की वैधता, आपातकालीन निकास मार्गों की उपलब्धता, भवन की संरचना और किसी दुर्घटना की स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था की भी बारीकी से जांच की जा रही है। साथ ही संस्थानों से फायर एनओसी से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए हैं।
कोचिंग हब होने के कारण बढ़ी जिम्मेदारी
जयपुर प्रदेश का प्रमुख कोचिंग केंद्र माना जाता है। यहां हर साल हजारों छात्र मेडिकल, इंजीनियरिंग, प्रशासनिक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। ऐसे में किसी भी दुर्घटना का असर केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सैकड़ों परिवारों की उम्मीदों पर भी पड़ता है। यही वजह है कि प्रशासन इस बार किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है।
35 से ज्यादा संस्थानों का हो चुका निरीक्षण
नगर निगम और पुलिस प्रशासन की टीमें अब तक 35 से अधिक कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण कर चुकी हैं। गोपालपुरा बाइपास, रामगढ़ मोड़, मानसरोवर, मालवीय नगर और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा।
जारी रहेगा अभियान
प्रशासन का कहना है कि यह केवल शुरुआती कार्रवाई है। आगामी दिनों में शहर के अन्य कोचिंग सेंटरों, शैक्षणिक संस्थानों और भीड़भाड़ वाले भवनों की भी जांच की जाएगी। लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा से समझौता न हो।
लखनऊ की दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे शैक्षणिक संस्थान आपदा से निपटने के लिए तैयार हैं। जयपुर में चल रही यह कार्रवाई उसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश है, ताकि किसी हादसे के बाद पछताने की नौबत न आए।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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