हाईकोर्ट ने पुलिस व्यवस्था में सुधारों की रिपोर्ट मांगी, आरसीए चुनाव कार्यक्रम 10 अगस्त को आएगा
राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस व्यवस्था में सुधारों की प्रगति रिपोर्ट पेश करने और आरसिए सी चुनाव कार्यक्रम की जानकारी देने के लिए राज्य सरकार से कहा है. यह स्थिति आरसीए में लंबे समय से चुनाव नहीं होने से जुड़े मामले में आई है, जिसकी सुनवाई 10 अगस्त को होगी.

सौजन्य से:- ETV Bharat
कोर्ट की खबरें: राज्य सरकार ने कहा- 10 अगस्त को बता देंगे RCA चुनाव कार्यक्रम, हाईकोर्ट ने पुलिस व्यवस्था में सुधारों की प्रगति रिपोर्ट मांगी
RCA में चुनाव नहीं होने से जुड़े मामले में बुधवार को हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई टल गई.
Published : July 29, 2026 at 8:58 PM IST
जयपुर: राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के लंबे समय से चुनाव नहीं होने से जुड़े मामले में बुधवार को हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई टल गई है. जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह आदेश राजीव प्रताप सिंह राठौड की जनहित याचिका पर दिए. सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता बसंत सिंह छाबा ने अदालत को बताया कि आरसीए चुनाव को लेकर आगामी तारीख पर चुनाव का कार्यक्रम पेश कर दिया जाएगा. इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई दस अगस्त को तय की है. वहीं एक दूसरे मामले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पुलिस व्यवस्था में सुधारों की प्रगति रिपोर्ट मांगी है.
RCA में लंबे समय से चुनाव नहीं होने से जुड़े मामले में बुधवार को हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई टल गई. अदालती आदेश की पालना में सहकारिता रजिस्ट्रार अदालत में पेश हुए.उनकी ओर से कहा गया कि अदालती आदेश की पालना में आरसीए के चुनाव नहीं कराने वालों के खिलाफ विधिनुसार कार्रवाई शुरू कर दी है और उन्हें नोटिस जारी करने के लिए कहा गया है. पूर्व में सुनवाई करते हुए अदालत ने आरसीए के चुनाव लंबे समय से नहीं होने व तदर्थ समिति का कार्यकाल बढाने को गंभीरता से लिया था और सहकारिता रजिस्ट्रार को निर्देश दिया था कि वे आगामी सुनवाई पर व्यक्तिगत तौर पर अदालत में उपस्थित होकर बताए कि क्यों ना उनके खिलाफ अदालती अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए.
अदालत ने आरसीए की एडहॉक कमेटी को निलंबित करते हुए अतिरिक्त मुख्य गृह सचिव भास्कर ए. सावंत को प्रशासक नियुक्त कर चुनाव करवाने का निर्देश दिया था. अदालत ने सावंत को कहा था कि वे व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करेंगे कि आरसीए की प्रबंध समिति के चुनाव तीन माह के भीतर कराए जाए. याचिका में आरसीए में लंबे समय से चुनाव नहीं होने को चुनौती दी गई थी.
पुलिस व्यवस्था में सुधारों की प्रगति रिपोर्ट मांगी: वहीं, दूसरे मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में लंबित आपराधिक मामलों की जांच में हो रही देरी से जुड़े मामले में पुलिस की जांच शाखा और कानून व्यवस्था संभालने वाली शाखा को अलग करने की दिशा में चल रही प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है. इसके साथ ही अदालत ने प्रमुख वित्त सचिव से पूछा है कि पुलिस व्यवस्था में बदलाव के संबंध में गृह विभाग व पुलिस मुख्यालय की ओर से दिए गए सुझावों की क्रियान्विति के लिए क्या कदम उठाए गए. जस्टिस अनूप कुमार ने यह आदेश प्रेम प्रकाश व अन्य के मामले में दिए.
अदालत ने कहा कि कई बार आपराधिक मामलों की जांच समय पर नहीं होती, क्योंकि जांच अधिकारी को ही कानून व्यवस्था का जिम्मा सौंपा जाता है, जिसके चलते उसे दोनों काम एक साथ करने में कठिनाई होती है. विधि आयोग की 154वीं रिपोर्ट में भी दोनों कामों के लिए अलग-अलग व्यवस्था करने को कहा है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के एएजी राजेश चौधरी ने अदालत को बताया कि उनके आदेश पर गठित समिति के प्रस्ताव के आधार पर, मामले को गृह विभाग के प्रधान सचिव को भेजा गया था. गृह विभाग पुलिस बल को तीन हिस्सों अनुसंधान, जांच और प्रशासनिक में बांटने पर सहमत हो गया है. शुरूआत में इसे राज्य के 16 जिलों के 20 पुलिस थानों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा. वहीं, कमेटी के प्रस्ताव को स्वीकार करने पर 828 पद सृजित होंगे. इसके लिए वित्त विभाग की अनुमति आना बाकी है. अदालत ने राज्य सरकार का पक्ष जानने के बाद आगामी सुनवाई 24 अगस्त तय की है.
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डमी परीक्षार्थी बैठाने से जुड़ा मामला: अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम-10 महानगर द्वितीय ने नीट-2020 परीक्षा में डमी परीक्षार्थी बैठाने से जुड़े मामले में चौमू थानाधिकारी को वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ विस्तृत अग्रिम अनुसंधान करने के आदेश दिए हैं. अदालत ने जांच अधिकारी को तीन माह के भीतर पूरक पुलिस रिपोर्ट अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं.
अभियोजन अधिकारी कमलेश कुमार शर्मा ने कहा कि पूर्व में की गई पुलिस जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई. अनुसंधान समुचित, प्रभावी एवं वैज्ञानिक तरीके से नहीं किया गया, जिसके कारण मुख्य आरोपी और वास्तविक तथ्य सामने नहीं आ सके. कोर्ट को बताया गया कि अभ्यर्थियों के हस्ताक्षर और हैंडराइटिंग की एफएसएल जांच रिपोर्ट, परीक्षा आवेदन पत्रों व काउंसलिंग रिकॉर्ड का सत्यापन, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की गहन जांच अभी पूरी तरह से बाकी है. आरोप पत्र पेश करने से पहले ही अभियोजन ने जांच में मौजूद खामियों और तकनीकी त्रुटियों को अनुसंधान अधिकारी को बताया था. इसके बावजूद पुलिस ने उन कमियों को दूर किए बिना ही जल्दबाजी में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी.
इसका विरोध करते हुए आरोपियों की ओर से कहा गया कि मामले में आरोप पत्र पेश हो चुका है. ऐसे में अब मामले में जांच नहीं हो सकती. दोनों पक्षों की बहस सुनकर अदालत ने माना कि उपलब्ध पुलिस विवेचना में केस के महत्वपूर्ण पहलुओं का परीक्षण नहीं हुआ है. निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हो, तो चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी अग्रिम अनुसंधान कराया जा सकता है.
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