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राजस्थान में ट्रक ऑपरेटर्स की हड़ताल, बुकिंग बंद: डिवाइस की वजह से अटके वाहनों के परमिट

राजस्थान के जोधपुर में ट्रक ऑपरेटर्स ने हड़ताल करने का निर्णय लिया है, जिसके कारण लोगों को अपने सामान की लोडिंग में दिक्कत हो सकती है। इसके पीछे की वजह है ट्रैकिंग डिवाइस की पुरानी और महंगी कीमतें।

Dainik Bhaskar के अनुसार14 जुलाई 2026 को 12:06 pm बजे
राजस्थान में ट्रक ऑपरेटर्स की हड़ताल, बुकिंग बंद: डिवाइस की वजह से अटके वाहनों के परमिट

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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जोधपुर में कल से ट्रक ऑपरेटर्स की हड़ताल, बुकिंग बंद:डिवाइस की वजह से अटके वाहनों के परमिट; सरकार से एमओयू वाली कंपनियों के डिवाइस 10 गुने महंगे

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प्रदेश के कॉमर्शियल व्हीकल में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) लगाने को लेकर ट्रांसपोर्टर्स और परिवहन विभाग के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। ऐसे में राजस्थान के कई जिलों में इसके विरोध में हड़ताल शुरू हो चुकी है।

जोधपुर में ट्रक ऑपरेटर्स ने कल से चक्काजाम कर हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। इनका कहना है कि हम ट्रैकिंग डिवाइस लगाने को तैयार हैं, लेकिन सरकार से जिन कंपनियों का एमओयू हुआ है, वह 10 गुना महंगे हैं।

इधर, ट्रैकिंग डिवाइस नहीं लगे होने की वजह से कई ट्रक के परमिट रिन्यू और फिटनेस तक भी अटक चुके हैं। चक्काजाम हड़ताल को लेकर मंगलवार को बैठक भी हुई।

बैठक में निर्णय लिया गया है कि कल से जोधपुर के सभी ट्रक ऑपरेटर्स हड़ताल पर जाएंगे। इसके साथ ही बुकिंग भी बंद कर दी जाएगी।

इसे लेकर जोधपुर ट्रक एंड ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति बनाई गई है। इसके संयोजक ओमप्रकाश शर्मा और सह संयोजक नदीम शेख और आकाश जैन होंगे। इसके साथ ही निर्णय लिया गया है कि जिन ट्रक ऑपरेटर्स के ई-वे बिल 13 जुलाई तक बने है, उन्हें संघर्ष समिति की परमिशन पर खाली करने दिया जाएगा। लेकिन, बुधवार से किसी भी सामान की लोडिंग नहीं होगी।

सरकार से एमओयू कंपनियों के डिवाइस लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार 2020 के बाद जो भी ट्रक, बस और कॉमर्शियल वाहन आए हैं, उनमें पहले से ट्रैकिंग डिवाइस लगे हुए हैं और 2020 से पहले के व्हीकल हैं उनमें ट्रैकिंग डिवाइस लगाने हैं। इसके लिए एसोसिएशन भी तैयार है।

ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि हमें ये डिवाइस लगाने में कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन, जिन कंपनियों के साथ एमओयू हुआ है, उनके डिवाइस 30 से 35 हजार रुपए तक के हैं। जबकि मार्केट में कई ऐसी कंपनियां हैं जो ऑरिजन इक्पीपमेंट मैन्यूफेक्चर (ओइएम) हैं और उनके डिवाइन 4 से पांच हजार रुपए तक की रेट में मिल रहे हैं।

ऐसे में यदि जिस ट्रांसपोर्टर्स के 50 से ज्यादा ट्रक हुए तो वह एक साथ इतने रुपए कहां से देगा। इतना ही नहीं इन सभी डिवाइस को एक साल बाद इसी रेट पर रिन्यू भी करवाना होगा।

1 हजार से ज्यादा ट्रांसपोर्टर्स होंगे प्रभावित

जोधपुर में दो एसोसिएशन हैं, एक सूर्यनगरी गुड्स ट्रांसपोर्ट ऑनली वेलफेयर सोसायटी और जोधपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन। शहर में करीब 1 हजार से ज्यादा ट्रांसपोर्टर्स हैं। चक्काजाम हड़ताल के लिए एक संघर्ष समिति भी बनाई है। इसकी बैठक मंगलवार शाम करीब 4 बजे होगी, जिसमें हड़ताल को लेकर निर्णय होगा।

यदि हड़ताल होती है तो जोधपुर आरटीओ से जुड़े करीब 50 हजार से ज्यादा ट्रक ड्राइवर्स प्रभावित होंगे। हालांकि एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि 13 जुलाई तक जिनके ई-वे बिल बने होंगे उन ट्रक को खाली करवा दिया जाएगा लेकिन किसी तरह का सामान लोड नहीं होगा।

डिवाइस की वजह से अटके परमिट और फिटनेस

डिवाइस नहीं लगने की वजह से सबसे बड़ी परेशानी उन ट्रक, बस और कॉमर्शियल व्हीकल ऑपरेटर्स को हो रही है। दरअसल, ये तय किया गया है कि ट्रैकिंग डिवाइस लगा होने के बाद ही परमिट रिन्यू और फिटनेस मिलेगा।

जोधपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के सचिव प्रवीण कुंभट ने बताया-जोधपुर में करीब 1500 से ज्यादा ट्रक, बस और कॉमर्शियल व्हीकल की फिटनेस अटकी हुई है। राजस्थान में ये संख्या 10 हजार के करीब हो सकती है।

उन्होंने बताया कि राजस्थान ट्रक एंड ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति की ओर से जो हड़ताल हो रही है उसका हम समर्थन कर रहे हैं और कल से हम भी हड़ताल पर उतरेंगे। इसमें हम निजी बस ऑपरेटर्स, कॉमर्शियल व्हीकल ऑपरेटर्स से भी बात कर रहे हैं। इन सभी से सहयोग लेकर जोधपुर में भी हड़ताल करेंगे।

पदाधिकार बोले- कल से चक्काजाम हड़ताल

सूर्यनगरी गुड्स ट्रांसपोर्ट ऑनली वेलफेयर सोसायटी के सचिव वीरेंद्र कुमार त्रेहान ने बताया- कल से हम चक्काजाम हड़ताल करने जा रहे हैं। सरकार चाहती है कि हमारे द्वारा दी गई कंपनियों की ओर से ही ये डिवाइस लगाए जाएं, जबकि मार्केट में 100 से ज्यादा कंपनियां हैं।

यदि मार्केट से हम डिवाइस लेते हैं तो वो हमें पांच हजार तक में मिल जाएगा। लेकिन, सरकार या परिवहन विभाग द्वारा लिस्टेड कंपनियों से लगाएंगे तो हमें ये 30 से 35 हजार रुपए देने होंगे। इसके बाद वार्ता भी हुई। लेकिन, इसके बदले में हमें 10 कपंनियों की लिस्ट पकड़ा दी, जबकि इनकी रेट भी मार्केट से दस गुना ज्यादा है।

प्रवीण कुंभट ने बताया कि हम ट्रैकिंग डिवाइस लगाने को हैं, लेकिन, ओईएम अप्रूव कंपनियों को एसओपी में डाला गया है, यानी हमें इन्हीं कंपनियों से डिवाइस लगाने होंगे।

टोल और डीजल की रेट बढ़ने से मोटर मालिक परेशान

हमारी मांग है कि हमें ओईएम से फ्री कर दिया जाए। वैसे भी मोटर मालिक पहले से ही परेशान हैं। टोल और डीजल की रेट तक बढ़ चुके हैं। इसके लिए उत्तराखंड, कर्नाटक और यूपी की सरकार ने डिवाइस को ओईएम से फ्री कर दिया है। सरकार से हमारी मांग है कि कल रात में विभाग की ओर से एसओपी जारी की गई है।

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