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क्या टॉप 10 में आ पाएगा जयपुर, 12500 अंकों पर परखा गया शहर, स्वच्छ सर्वेक्षण में निगम का बड़ा दावा

क्या टॉप 10 में आ पाएगा जयपुर, 12500 अंकों पर परखा गया शहर, स्वच्छ सर्वेक्षण में निगम का बड़ा दावा टीम ने केवल सरकारी दावों पर भरोसा नहीं किया बल्कि आम लोगों से बातचीत कर उनकी राय भी जानी Published : June 23, 2026 at 12:…

ETV Bharat के अनुसार24 जून 2026 को 05:48 am बजे
क्या टॉप 10 में आ पाएगा जयपुर, 12500 अंकों पर परखा गया शहर, स्वच्छ सर्वेक्षण में निगम का बड़ा दावा

सौजन्य से:- ETV Bharat

क्या टॉप 10 में आ पाएगा जयपुर, 12500 अंकों पर परखा गया शहर, स्वच्छ सर्वेक्षण में निगम का बड़ा दावा

टीम ने केवल सरकारी दावों पर भरोसा नहीं किया बल्कि आम लोगों से बातचीत कर उनकी राय भी जानी

Published : June 23, 2026 at 12:02 PM IST

जयपुर : देश के सबसे बड़े शहरी स्वच्छता मूल्यांकन स्वच्छ सर्वेक्षण 2026 में जयपुर की परीक्षा पूरी हो चुकी है. बीते दिनों दिल्ली से आई केंद्रीय टीम ने शहर के विभिन्न जोनों का निरीक्षण किया, नागरिकों से फीडबैक लिया और सफाई व्यवस्था से लेकर कचरा प्रबंधन तक हर पहलू को परखा. अब नगर निगम प्रशासन और शहरवासियों की निगाहें परिणाम पर टिकी हैं. पिछले सर्वेक्षण में देशभर में 16वीं रैंक हासिल कर चर्चा में आए जयपुर को इस बार और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.

12500 अंकों की बड़ी परीक्षा, हर पहलू पर हुई जांच : राजधानी में दो नगर निगम से एक हुए जयपुर नगर निगम ने स्वच्छ सर्वेक्षण से पहले स्वच्छता से जुड़े लगभग सभी प्रमुख मानकों पर फोकस किया. खासतौर पर कचरा सेग्रीगेशन, कंपोस्टिंग, वेस्ट प्रोसेसिंग, जन-जागरूकता और सर्टिफिकेशन मानकों पर काम कर उन कमियों को दूर करने की कोशिश की गई, जिनकी वजह से बीते वर्षों में शहर शीर्ष रैंकिंग तक नहीं पहुंच सका था. नगर निगम स्वास्थ्य उपायुक्त ओम प्रकाश थानवी ने बताया कि इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में शहरों का मूल्यांकन 12500 अंकों के आधार पर किया गया. इनमें से 10500 अंक ऑन-ग्राउंड असेसमेंट और सिटीजन फीडबैक के लिए निर्धारित हैं, जबकि 2000 अंक विभिन्न सर्टिफिकेशन के लिए रखे गए हैं.

स्वच्छ सर्वेक्षण का अंक विभाजन :

पढे़ं. अलवर ने स्वच्छता में मारी छलांग! देश में 54वीं रैंक, राज्य में चौथे स्थान पर

चार दिन तक चली ग्राउंड परख : स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत दिल्ली से आई चार सदस्यीय टीम ने शहर के विभिन्न जोनों में जाकर सफाई व्यवस्था का निरीक्षण किया था. टीम ने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति, सड़क और बाजारों की सफाई, वेस्ट सेग्रीगेशन और जल प्रबंधन व्यवस्थाओं का आकलन किया. टीम ने केवल सरकारी दावों पर भरोसा नहीं किया बल्कि आम लोगों से बातचीत कर उनकी राय भी जानी. नागरिकों से पूछा गया कि क्या नियमित सफाई होती है, कचरा समय पर उठाया जाता है या नहीं, सार्वजनिक सुविधाएं कैसी हैं और नगर निगम की सेवाओं से वे कितने संतुष्ट हैं?

पिछली कमियों को बनाया सुधार का आधार : इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में नागरिकों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है. कुल 12500 अंकों में से 1000 अंक सीधे सिटीजन फीडबैक और शिकायत निवारण व्यवस्था से जुड़े हैं. यही वजह है कि निगम ने बीते महीनों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए. ओम प्रकाश थानवी ने बताया कि केवल सफाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिकों को स्वच्छता अभियान का सहभागी बनाना भी उतना ही जरूरी था. इसी सोच के साथ बड़े स्तर पर आईईसी एक्टिविटी संचालित की गईं. साथ ही उन्होंने बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण एक सतत प्रक्रिया है. पिछले सर्वेक्षण के बाद निगम ने विस्तृत समीक्षा की कि किन क्षेत्रों में अंक कम मिले और कहां सुधार की जरूरत है. इसके अनुसार इस बार विशेष रूप से वेस्ट सेग्रीगेशन और होम कंपोस्टिंग पर जोर दिया गया. निगम की टीमों ने घर-घर पहुंचकर लोगों को गीले और सूखे कचरे को अलग करने और घर पर ही जैविक कचरे से खाद बनाने के लिए प्रेरित किया.

वेस्ट-टू-आर्ट पर फोकस : निगम प्रशासन ने इस बार शहर में दिखाई देने वाली स्वच्छता यानी विजिबल क्लीनलीनेस को बेहतर बनाने के साथ-साथ नवाचारों पर भी काम किया. वेस्ट-टू-आर्ट प्रोजेक्ट्स के जरिए कबाड़ और अनुपयोगी सामग्री को आकर्षक कलाकृतियों में बदला गया. इसके अलावा शहर के एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) प्लांट, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और सी एंड डी वेस्ट प्लांट की क्षमता के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया. थानवी की मानें तो साइंटिफिक वेस्ट मैनेजमेंट और रिसाइक्लिंग व्यवस्था रैंकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

सर्टिफिकेशन पर भी रही नजर : स्वच्छ सर्वेक्षण में केवल सफा ई व्यवस्था ही नहीं, बल्कि विभिन्न राष्ट्रीय सर्टिफिकेशन भी रैंकिंग तय करते हैं. इस श्रेणी में कुल 2000 अंक निर्धारित हैं. थानवी के अनुसार जयपुर ने पहले से मौजूद Water Plus और Garbage Free City (GFC) सर्टिफिकेशन मानकों को बनाए रखने और मजबूत करने पर काम किया है. इसके तहत ट्रीटेड वॉटर के उपयोग, सार्वजनिक शौचालयों के बेहतर रखरखाव, सीवेज प्रबंधन और स्वच्छता मानकों के अनुपालन पर विशेष ध्यान दिया गया.

पढ़ें. स्वच्छता सर्वेक्षण: सजने लगी परकोटे की गलियां ताकि सुधरे रैंकिंग एवं पहुंचें सैलानी

16वीं रैंक से आगे बढ़ने की चुनौती : जयपुर के लिए इस बार सबसे बड़ी चुनौती अपनी पिछली उपलब्धि को पीछे छोड़ना है. पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर ने बड़ा सुधार करते हुए 16वीं रैंक हासिल की थी. ये नगर निगम के लिए बड़ी उपलब्धि मानी गई थी. हालांकि शीर्ष-10 में स्थान हासिल करने के लिए कंपटीशन और ज्यादा कठिन है. इंदौर, सूरत, चंडीगढ़ और अन्य बड़े शहर लगातार स्वच्छता के मानकों को बेहतर बना रहे हैं. ऐसे में जयपुर को भी अपनी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत दावेदारी पेश करनी होगी.

अब सिर्फ परिणाम का इंतजार : स्वास्थ्य उपायुक्त ओम प्रकाश थानवी का कहना है कि अभी ये अनुमान लगाना संभव नहीं है कि जयपुर को 12500 में से कितने अंक मिलेंगे, लेकिन निगम प्रशासन ने हर प्रमुख मानक पर पूरी गंभीरता से काम किया है. पिछले सर्वेक्षण की कमियों को दूर करने और बेहतर प्रदर्शन के लिए जो प्रयास किए गए हैं, उनका लाभ परिणाम में मिलने की उम्मीद है. बहरहाल, निरीक्षण पूरा हो चुका है, फीडबैक दर्ज हो चुका है और शहर की स्वच्छता व्यवस्था का मूल्यांकन भी हो चुका है. अब जयपुर की निगाहें उस दिन पर टिकी हैं, जब स्वच्छ सर्वेक्षण के परिणाम घोषित होंगे और ये तय होगा कि देश के स्वच्छ शहरों की दौड़ में गुलाबी नगर इस बार कितनी छलांग लगाता है.

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