कोटा बनने से पहले पटना था नंबर-1 कोचिंग हब, रासबिहारी सर ने सुनाई शिक्षा के सुनहरे दौर की कहानी
कोटा बनने से पहले पटना था नंबर-1 कोचिंग हब, रासबिहारी सर ने सुनाई शिक्षा के सुनहरे दौर की कहानी Patna Coaching News: पूरे देश से भूगोल पढ़ने के लिए छात्र पटना आते थे. 70 के दशक में पहले कोचिंग का निर्माण हुआ था. उस समय क…

सौजन्य से:- ABP News
कोटा बनने से पहले पटना था नंबर-1 कोचिंग हब, रासबिहारी सर ने सुनाई शिक्षा के सुनहरे दौर की कहानी
Patna Coaching News: पूरे देश से भूगोल पढ़ने के लिए छात्र पटना आते थे. 70 के दशक में पहले कोचिंग का निर्माण हुआ था. उस समय कड़े नियमों के साथ पढ़ाई होती थी.
पटना में हो रहे कोचिंग विवाद के बीच बदलते समय में पटना की कोचिंग का स्तर जरूर गिरा है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब पटना पूरे देश का कोचिंग हब हुआ करता था और कई राज्यों के छात्र पटना जाकर पढ़ाई करते थे. आज हम बात कर रहे हैं भूगोल विषय के नामी ग्रामी शिक्षण रासबिहारी सर की. उनसे भूगोल विषय की पढ़ाई करने के लिए दूर-दूर से छात्र आते थे और उनसे पढ़े दो दर्जन से ज्यादा छात्र अभी आईएएस और आईपीएस अफसर बने हुए हैं तो सैकड़ों छात्र कई पदों पर पदस्थापित है.
एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत में भूगोल विषय के काफी विद्वान और प्राचीन शिक्षक रासबिहारी सर जो पहले पटना विश्वविद्यालय के प्रिंसिपल और उसके बाद कुलपति भी रह चुके हैं. उन्होंने कहा कि हम लोग शिक्षा सेवा भाव से देते थे. उस समय शिक्षकों का छात्रों के प्रति समर्पण भाव था. अपने बच्चों की तरह छात्रों को पढ़ते थे. सिर्फ स्टडी होती थी पूरी पढ़ाई नहीं कराई जाती थी और बच्चे उसे समझ कर पढ़ते थे. कोटा का जन्म वर्ष दो हजार के बाद हुआ था. उससे पहले पटना पूरे देश का नंबर वन एजुकेशन हब था.
पटना में पहले कोचिंग संस्थानों का किया जिक्र
रासबिहारी सर ने पटना में पहले के कोचिंग संस्थानों का जिक्र करते हुए बताया कि 70 के दशक में पटना में पहला ईस्ट वेस्ट नामक कोचिंग सेंटर यहां निर्माण हुआ था. उस कोचिंग में जनरल स्टडी के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू और देश के कई विश्वविद्यालय के छात्र यहां पढ़ने आते थे. उसमें विजय ठाकुर जो इतिहास के शिक्षक थे. इम्तियाज अहमद, विनय भरसेडाईन उस कोचिंग के शिक्षक और जन्मदाता भी थे. उसमें कई नामचीन और विद्वान शिक्षक थे.
उन्होंने बताया कि भूगोल में मैं खुद और हिंदी में बलराम तिवारी ने योगदान दिया और सारे हिंदुस्तान से छात्र यहां इन शिक्षकों के नाम पर आते थे. शिक्षा देने का मतलब है शुद्ध मन से अपने बच्चों की तरह छात्रों को शुद्ध भावना से पढ़ाया जाए. वहीं जो छात्र पढ़कर जाते थे. वही प्रचार करते थे, पढ़ने वाले छात्र ही शिक्षकों का प्रचार तंत्र होते थे.
पटना आकर पढ़ाते थे बाहर के शिक्षक
रासबिहारी सर ने बताया कि उसके बाद और कई सारे कोचिंग संस्थान खुले. 80 के दशक में और ज्यादा कोचिंग खुले. कई विद्वान शिक्षक पटना में थे तो बिहार के बाहर के भी शिक्षक पटना में आकर पढ़ाते थे. परंतु पहले जो कोचिंग चलाते थे उसमें आज की तरह नहीं कि 500 और 600 बच्चे एक साथ बैठते हैं. पहले 60 से ज्यादा बच्चे कोचिंग में नहीं होते थे.
उन्होंने बताया कि मैं खुद भूगोल विषय के लिए अलग कोचिंग करता था, लेकिन मेरे कोचिंग में 60 से 61 बच्चे नहीं होते थे. कई अधिकारी आज भी हमें मिलते हैं और कहते हैं कि हमें आपसे पढ़ने का मौका नहीं मिला था. जगह ही नहीं मिल पाई थी. कुछ छात्रों से आपके नोट्स लेकर पढ़ाई की है और यहां तक पहुंचे हैं.
वर्तमान में कोचिंग के हालात बिगड़ने पर क्या कहा?
रासबिहारी सर ने वर्तमान समय में पटना के कोचिंग की हालात बिगड़ने को लेकर कहा कि शिक्षा को सेवा भाव से करें शिक्षा को प्रचार तंत्र नहीं बनाएं. मैं यही कहूंगा. उस समय यही भाव से लोग पढ़ते थे और यही वजह थी कि पटना शिक्षा का हब हुआ करता था. मेडिकल, इंजीनियरिंग की कोचिंग भी पहले पटना में ही सबसे बढ़िया थी.
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पटना विश्वविद्यालय के शिक्षक भी कोचिंग चलाते थे, लेकिन 4 बजे के पहले कोई भी शिक्षक कोचिंग में नहीं जाते थे. उन्होंने अभी के कोचिंग शिक्षकों पर तंज कसते हुए कहा कि अभी क्या प्रचार हो रहा है कि हमारे यहां से इतने दरोगा पास हो गए, इतने सिपाही पास हो गए, हम छात्रों को पढ़ाएंगे और पढ़ाई से वह दरोगा बन जाएंगे और सिपाही बन जाएंगे तो उसमें कोचिंग संस्थान की क्या भूमिका है. दरोगा, सिपाही तो छात्र अपने आप ही बन जाते हैं. उसके लिए कोचिंग की जरूरत नहीं है.
'करप्शन ने पटना को एजुकेशन में बढ़ने नहीं दिया'
उन्होंने आगे कहा कि पटना आज भी एजुकेशन हब बना रह सकता था, लेकिन करप्शन ने पटना को एजुकेशन में बढ़ने नहीं दिया. रास बिहारी सर ने उस वक्त की याद को ताजा करते हुए बताया कि जेपी आंदोलन और इमरजेंसी जब लागू हुआ तो 1977 के बाद सब शुरू हुआ था. उसके चार-पांच सालों तक सब कुछ सही रहा था, लेकिन 80 के दशक में परिस्थितियां कोचिंग की बिगड़ने लगी थी.
उसके बाद जैसे-जैसे समय बढ़ता गया कोचिंग शिक्षकों से पैसे की मांग होने लगी. B.K लाल केमिस्ट्री के फेमस कोचिंग शिक्षक हुआ करते थे. उनकी हत्या हो गई थी. कुछ दबंग लोग आकर कहने लगे थे आपकी इतनी कमाई होती है. आप हमें इतना दीजिए. उन्होंने नहीं दिए थे तो उन्हें गोली मार दी गई थी. फिजिक्स के एक बड़े और विद्वान शिक्षक थे वह आज तक लौटकर नहीं आए. उनके गार्ड को गोली मार दी गई थी.
अपराधियों के शिकार होने लगे थे शिक्षक
एक दौर पटना में ऐसा भी आया था जब कोचिंग शिक्षक अपराधियों के शिकार होने लगे थे. यह घटना 1995 से 2000 के बीच की है. 2000 के बाद से शिक्षक लोग यहां से खिसकने लगे. जो बाहर से भी विद्वान शिक्षक पटना में आकर पढ़ाते थे. उन्होंने बिहार आना छोड़ दिया. उसी समय बंसल सर दिल्ली के नामी शिक्षक थे.
दिल्ली में उस समय टैक्स ज्यादा लगने लगा तो वह कोटा चले गए थे और कोटा में पहले उन्होंने ही कोचिंग की शुरुआत की थी. अब कोटा शिक्षा का हब बन चुका है. बिहार में वर्ष 2000 के समय शिक्षा का माहौल खराब हो गया था तो अच्छे शिक्षकों में डर पैदा हो गया था, तो कुछ बिहार से भी शिक्षक कोटा चले गए थे. उस समय से लगातार पटना एजुकेशन के मामले में गिरता गया और कोचिंग संस्थान की स्थिति खराब होने लगी.
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