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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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जिनेवा के मंच पर पहुंची जयपुर की बेटी मैक्सिमा पूनिया:UN में रखी 'नए भारत' की आवाज,संयुक्त राष्ट्र में सबसे कम उम्र की प्रतिनिधि बनीं
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जयपुर की 12 वर्षीय मैक्सिमा पूनिया ने वैश्विक मंच पर अपनी आवाज बुलंद कर एक खास पहचान बनाई। मैक्सिमा ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित पैलेस डेस नेशंस, संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में आयोजित ‘समिट फॉर चेंज’ में हिस्सा लिया और विभिन्न देशों के राजनयिकों, प्रतिनिधियों, नीति विशेषज्ञों, नेताओं और अंतरराष्ट्रीय पेशेवरों के बीच अपनी बात रखी। वह इस वैश्विक सम्मेलन की सबसे कम उम्र की प्रतिनिधि बनीं।
मैक्सिमा का इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर चयन होना प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि रही। उन्होंने औपचारिक सत्रों में बच्चों के नजरिए को वैश्विक संवाद का हिस्सा बनाया और भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए। उनकी मौजूदगी की खासियत सिर्फ उनकी उम्र नहीं थी, बल्कि वह अपने साथ एक ऐसे ‘नए भारत’ की आवाज लेकर पहुंचीं, जो युवा, आत्मविश्वासी और दुनिया के साथ बराबरी के आधार पर संवाद करने के लिए तैयार हैं।
‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना के साथ दुनिया से संवाद
जिनेवा में मैक्सिमा ने भारत की उस सोच को भी सामने रखा, जिसमें तकनीकी प्रगति के साथ संवेदना और मानवता को समान महत्व दिया जाता है। उनकी बात में भारतीय दर्शन की ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना भी दिखाई दी, यानी पूरी दुनिया एक परिवार है।
उन्होंने भविष्य को बच्चों की नजर से देखने का एक गंभीर दृष्टिकोण सामने रखा। उनका संदेश था कि सतत विकास का अर्थ केवल जलवायु, ऊर्जा या पर्यावरण की सुरक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए। भविष्य तभी वास्तव में सतत कहा जा सकता है, जब उसमें रहने वाले लोगों, विशेषकर बच्चों के लिए वह सुरक्षित, न्यायपूर्ण और समावेशी हो।
‘बच्चे सिर्फ कल के नेता नहीं, आज के भी भागीदार हैं’
मैक्सिमा ने बच्चों की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण बात रखी। उनका मानना है कि बच्चों को केवल ‘कल के नेता’ कहकर भविष्य के लिए इंतजार करने को नहीं कहा जा सकता। वे आज की दुनिया के भी बराबर के हिस्सेदार हैं। ऐसे में उनके जीवन और भविष्य को प्रभावित करने वाले फैसलों में उनकी सोच, अनुभव और आवाज के लिए भी जगह होनी चाहिए।
उनकी यह सोच ऐसे समय में सामने आई है, जब दुनिया तेजी से तकनीकी बदलाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर से गुजर रही है। मैक्सिमा ने इसी संदर्भ में कहा कि हम जो भविष्य बना रहे हैं, वह केवल हाई-टेक नहीं, हाई-हार्ट भी होना चाहिए। इसका अर्थ उन्होंने ऐसे भविष्य के रूप में सामने रखा, जहां तकनीकी प्रगति के साथ जिम्मेदारी, तकनीक के साथ गरिमा, विकास के साथ अवसर और हर नई खोज के केंद्र में इंसान तथा इंसानियत बनी रहे।
साइबर सुरक्षा और सतत विकास को लेकर भी कर रहीं काम
मैक्सिमा अपनी पहल ‘साइबर स्मार्ट किड्स’ और ‘एसडीजी अवेयर किड्स’ के जरिए बच्चों के बीच डिजिटल सुरक्षा, जिम्मेदार तकनीक, सतत विकास, समावेशन और जागरूक नागरिकता जैसे विषयों पर काम कर रही हैं।
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