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Special : हादसों का शहर बना जयपुर, 7 महीने में दो हजार से ज्यादा Accidents और 551 मौतें

Special : हादसों का शहर बना जयपुर, 7 महीने में दो हजार से ज्यादा Accidents और 551 मौतें राजधानी में औसतन हर दिन 9 हादसे और तीन लोग रोज एक्सीडेंट में गंवा रहे जान. विकास व्यास की रिपोर्ट... Published : September 6, 2026 a…

ETV Bharat के अनुसार6 सितंबर 2026 को 12:33 pm बजे
Special : हादसों का शहर बना जयपुर, 7 महीने में दो हजार से ज्यादा Accidents और 551 मौतें

सौजन्य से:- ETV Bharat

Special : हादसों का शहर बना जयपुर, 7 महीने में दो हजार से ज्यादा Accidents और 551 मौतें

राजधानी में औसतन हर दिन 9 हादसे और तीन लोग रोज एक्सीडेंट में गंवा रहे जान. विकास व्यास की रिपोर्ट...

Published : September 6, 2026 at 5:14 PM IST

जयपुर: राजधानी जयपुर हादसों का शहर बनता जा रहा है, जहां अमूमन हर दिन सड़क हादसों और उनमें मौतों की खबर सुर्खियों में जगह बना रही है. आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि शहर में वाहनों की गति बेलगाम होती जा रही है, जिससे सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है. उनमें जान गंवाने वाले लोगों की संख्या भी उतनी ही तेजी बढ़ रही है. आए दिन शहर की सड़कें खून से लाल हो रही हैं और सड़क हादसों में किसी का सुहाग उजड़ रहा है तो किसी की गोद सूनी हो रही है.

ऐसे में कोई शख्स सुबह घर से निकलता है और शाम को जब तक वह सकुशल घर नहीं पहुंचता तो उसके परिजनों को चिंता सताए रहती है. जयपुर पुलिस के आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि इस साल जनवरी से जुलाई तक जयपुर में हुए दो हजार से ज्यादा सड़क हादसों में 551 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. जयपुर पुलिस ने शहर में 16 ब्लैक स्पॉट्स चिह्नित किए हैं, जहां हादसे ज्यादा हुए हैं.

हर दिन औसतन 9 हादसे : जयपुर में औसतन हर दिन 9 सड़क हादसे हो रहे हैं और रोजाना करीब तीन लोग इन हादसों में अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं. जयपुर पुलिस सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं. इस बात की तस्दीक इसी से होती है कि शहर में बीते सात महीनों में 2024 सड़क हादसों के मामले सामने आए हैं. इनमें 551 लोगों ने अपनी जान से हाथ धोया है, जबकि 1,710 लोग इन हादसों में घायल हुए हैं. इनमें से कोई काम पर निकला था तो कोई अपने रिश्तेदार से मिलने जा रहा था. कोई अपने बीमार परिजनों की दवा लेने जा रहा था.

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पिछले साल के मुकाबले बढ़े हादसे और मौतें : बात अगर तुलनात्मक रूप से करें तो जनवरी से जुलाई तक के सात महीनों में पिछले साल 1,746 सड़क हादसे हुए थे. इस अवधि में पिछले साल 484 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 1,540 लोग घायल हुए थे. जबकि इस साल में जनवरी से जुलाई तक के सात महीनों में 2024 सड़क हादसों में 551 लोगों की मौत हुई और 1,710 लोग घायल हुए हैं.

आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले इस साल पहले सात महीने में हादसों की संख्या 278 बढ़ गई और मौत का आंकड़ा 67 बढ़ गया. वहीं, घायलों की संख्या में भी 170 की बढ़ोतरी हुई है. पिछले साल के मुकाबले करीब 16 फीसदी हादसे ज्यादा हुए. मौतों की संख्या 14.3 फीसदी और घायलों की संख्या 11.2 फीसदी बढ़ गई.

तेज रफ्तार और नशे में वाहन चलाना बड़े कारण : पुलिस की जांच में सामने आया है कि कई मामलों में तेज रफ्तार और नशे में वाहन चलाना हादसों के दो बड़े कारणों के रूप में सामने आया है. नशे की हालत में तेज रफ्तार में गाड़ियां दौड़ाने का नतीजा कई बार हादसों के रूप में सामने आया है. जिनमें कई बेकसूर लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और कई लोग आज भी हादसों के जख्म के साथ जीवन बिताने को मजबूर हैं. इसके अलावा ढांचागत कमियों की वजह से भी कई बार एक ही जगह लगातार हादसे होने की बात सामने आई हैं. इसके अलावा, रोड इंजीनियरिंग की खामियों के चलते भी हादसों का ग्राफ बढ़ा है.

पूर्व में हादसे ज्यादा, पश्चिम में मौतों का आंकड़ा ज्यादा : जयपुर कमिश्नरेट के चार जिलों में से जयपुर (पूर्व) में हादसों की संख्या सबसे ज्यादा है. जबकि जयपुर (पश्चिम) में मौत के आंकड़े सबसे ज्यादा हैं. जयपुर पूर्व में इन सात महीनों में 689 सड़क हादसों में 165 लोगों की जान गई और 578 लोग घायल हुए. जयपुर पश्चिम में 637 सड़क हादसों में 203 लोगों की मौत हो गई और 540 लोग घायल हुए. वहीं, बात अगर जयपुर उत्तर की करें तो हादसों की संख्या और मौत का आंकड़ा कम है. यहां 126 सड़क हादसों में 34 लोगों की जान गई और 103 लोग घायल हुए हैं. जयपुर दक्षिण में 573 सड़क हादसों में 151लोगों की मौत हुई और 491 लोग घायल हुए.

पूरे साल में औसतन 800 लोगों की चली जाती है जान : रोड सेफ्टी पर करीब 15 साल से काम कर रही सामाजिक कार्यकर्ता नेहा खुल्लर का कहना है कि जयपुर में अमूमन पूरे साल में सड़क हादसों में 800 लोगों की मौत हो जाती है. इस साल पहले सात महीने में 550 से ज्यादा लोगों की मौत होना चिंता का कारण है. इसके प्रमुख कारण इंजीनियरिंग, इंफोर्स्मेंट, एजुकेशन और एन्वायरन्मेंट को माना जाता है. बारिश के दिनों में सड़कों का बुरा हाल है. सड़कों पर कई जगह सड़क पर पानी भरा रहता है. संकेतक सही नहीं होने से लोगों को स्पीड लिमिट का अनुमान नहीं रहता और स्पीड मैनेजमेंट नहीं हो पाता है.

ट्रैफिक पुलिस का ध्यान जाम से निपटने में ज्यादा : उन्होंने कहा कि कई जगहों पर फ्री लेफ्ट दिया है, लेकिन पैदल चलने वालों के लिए जगह नहीं छोड़ी है. जिसके चलते पैदल चलने वाले लोगों के तेज रफ्तार गाड़ियों की चपेट में आने की संभावना रहती है. उन्होंने कहा कि यातायात पुलिस का इस समय पूरा ध्यान ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने में है. आज शहर ट्रैफिक जाम की समस्या से भी जूझ रहा है. इसलिए पुलिस का पूरा ध्यान जाम से निपटने में है. हादसों की रफ्तार कम करने पर पुलिस उतना ध्यान ही नहीं दे पा रही है. हादसों का एक बड़ा कारण ट्रैफिक एजुकेशन सिस्टम भी है. अनट्रेंड चालक जब गाड़ी चलाता है तो हादसे होने की संभावना बढ़ जाती है. यातायात नियमों से अनभिज्ञ चालकों को भी लाइसेंस मिल रहे हैं.

समय पर उपचार से बच सकती है घायल की जान : उन्होंने बताया कि एम्बुलेंस और उनका नेटवर्क भी खस्ताहाल है. कई एम्बुलेंस मानकों के अनुरूप नहीं हैं. निजी एम्बुलेंस का मेडिकल ऑडिट समय पर नहीं होता है. उनमें बैठने वाले एमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) इतने ट्रेंड हैं कि ट्रोमा को हैंडल कर सकते हैं. अगर एम्बुलेंस समय पर पहुंच जाती है तो क्या वे घायल व्यक्ति को सही समय पर और सही तरीके से अस्पताल पहुंचा सकते हैं. समय पर सही उपचार मिले तो हादसे में घायल व्यक्ति की जान बच सकती है.

विभागों को समन्वय से काम करने की दरकार : उनका कहना है कि सरकारें बातें बहुत करती हैं. सभी संबंधित विभाग भी कई एलान करते हैं, लेकिन धरातल पर काम नहीं हो पा रहे हैं. समस्या नीतियों की नहीं बल्कि उनकी धरातल पर क्रियान्विति की है. जिन लोगों को नीतियों को लागू करना है. उनमें कौशल और दक्षता की कमी है. जिम्मेदार लोगों को अपना माइंडसेट बदलने की दरकार है. उनका मानना है कि सभी विभाग समन्वय के साथ आगे बढ़े तो सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों पर काफी अंकुश लगाया जा सकता है.

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इंजीनियरिंग की खामी और नियमों की अनदेखी : इधर, जयपुर के एडिशनल पुलिस कमिश्नर (ट्रैफिक) प्रदीप मोहन शर्मा का कहना है कि जयपुर में हुए सड़क हादसों का विश्लेषण करने पर हादसों के दो प्रमुख कारण सामने आए हैं. पहला रोड इंजीनियरिंग में खामी और दूसरा चालक की लापरवाही. रोड इंजीनियरिंग की खामियों को दुरुस्त करने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर ज्यादा एक्सीडेंट वाले स्थानों को चिह्नित किया. ऐसे स्थानों पर सामने आई कमियों को दुरुस्त किया है. सड़क के बीच कट को भी बंद किया गया है. इंजीनियरिंग संबंधी खामियों को भी दुरुस्त करवाया है.

तेज रफ्तार से हो रहे भीषण हादसे : वाहन चालकों द्वारा बरती जा रही लापरवाही और यातायात नियमों की अवहेलना भी हादसों के पीछे का एक बड़ा कारण है. तेज रफ्तार में वाहन चलाना एक बड़ा कारण है. जिसके कारण हादसों की रफ्तार बेलगाम हो रही है. हादसों की संख्या और उनमें मौतों के मामले भी पिछले साल के मुकाबले ज्यादा रही है. हादसों में घायलों की संख्या में भी इजाफा हुआ है. भीषण हडसन में ओवर स्पीडिंग एक बड़ा कारण निकलकर सामने आया है.

उन्होंने बताया कि साल 2026 में जनवरी से जुलाई तक 2024 सड़क हादसों में 551 लोगों की जान गई और 1710 लोग घायल हुए हैं. हादसों में संलिप्त वाहन की जांच में कई बार सामने आता है कि ओवर स्पीडिंग, लापरवाही से वाहन चलाने और यातायात नियमों की अवहेलना करने के चालान हुए हैं. अब पुलिस ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्त अभियान चलाएगी. जिनके चालान पेंडिंग हैं, उन वाहनों का पंजीयन निरस्त करने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी. ऐसे वाहन चालकों के लाइसेंस भी निरस्त किए जाएंगे. फिलहाल, नशे में वाहन चलाए पकड़े जाने वाले वाहन चालकों के लाइसेंस निरस्त करने की सिफारिश परिवहन विभाग को की जा रही है.

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