Special: लंदन की सील और मुगलिया सिक्के, जयपुर की हवेली से निकला 170 साल पुराना खजाना किसे मिलेगा?
Special: लंदन की सील और मुगलिया सिक्के, जयपुर की हवेली से निकला 170 साल पुराना खजाना किसे मिलेगा? मजदूरों की बदलती लाइफस्टाइल ने खोला जयपुर हवेली से चोरी हुए खजाने का रहस्य. पढ़िए विकास व्यास की स्पेशल रिपोर्ट. Published…

सौजन्य से:- ETV Bharat
Special: लंदन की सील और मुगलिया सिक्के, जयपुर की हवेली से निकला 170 साल पुराना खजाना किसे मिलेगा?
मजदूरों की बदलती लाइफस्टाइल ने खोला जयपुर हवेली से चोरी हुए खजाने का रहस्य. पढ़िए विकास व्यास की स्पेशल रिपोर्ट.
Published : August 20, 2026 at 6:36 AM IST
जयपुर: जयपुर के त्रिपोलिया बाजार की एक सालों पुरानी हवेली, ढहती दीवारों के पीछे छुपा ब्रिटिश और मुगल काल के दौर का बेशकीमती खजाना और रातों-रात अमीर बने पांच मजदूरों की साजिश! किसी फिल्मी कहानी जैसी लगने वाली यह घटना जयपुर में सच साबित हुई है, जहां पुलिस ने हाई-टेक तकनीक को दरकिनार कर अपनी 'परंपरागत पुलिसिंग' के दम पर करीब 71 किलो चांदी और ऐतिहासिक सिक्कों की चोरी का ऐसा पर्दाफाश किया है जिसने पूरे शहर को चौंका दिया.
जंगल में छुपाई चांदी की सिल्लियां: जयपुर के त्रिपोलिया बाजार में विद्याधर का रास्ता स्थित एक पुरानी हवेली की खुदाई में निकले खजाने को लेकर रहस्य गहराता जा रहा है. पड़ताल में सामने आया है कि हवेली से निकला खजाने में ब्रिटिशकालीन चांदी की सिल्लियां और मुगलकालीन सिक्के शामिल हैं. हालांकि, जिस ठेकेदार और मजदूरों को खजाना मिला. उन्होंने सिल्लियों को जंगल में छुपा दिया और बेशकीमती सिक्कों को ओने-पौने दामों में बेच दिया. पुलिस ने जो चांदी की सिल्लियां बरामद की हैं. उन पर लंदन के सेंट्रल बैंक की 1860 की मुहर लगी है.
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अब तक 71 किलो चांदी बरामद: अब बड़ा सवाल यह है कि यह बेशकीमती खजाना है किसका. जमीन, नींव या दीवार में छिपी कीमती वस्तु के मामले में सुपुर्दगी का अधिकार कलेक्टर एक तय प्रक्रिया के आधार पर कर सकते हैं. इस बारे में माणक चौक थानाधिकारी राकेश ख्यालिया का कहना है कि हवेली मालिक ने खजाना चोरी होने का मुकदमा दर्ज करवाया था. जांच के आधार पर पांच लोगों को गिरफ्तार कर चांदी की सिल्लियां और पिघली चांदी मिलाकर करीब 71 किलो चांदी बरामद की गई है, अब कोर्ट से तय होगा कि इसका मालिक कौन है. खास बात यह भी है कि इस पूरे मामले का खुलासा करने में पुलिस को तकनीकी विश्लेषण से खास मदद नहीं मिली, बल्कि परंपरागत पुलिसिंग की तरकीब काम आई.
ब्रिटिशकालीन सिल्लियां, मुगलकालीन सिक्के: थानाधिकारी ने बताया कि पुलिस की जांच में सामने आया है कि चांदी की सिल्लियों पर लंदन के सेंट्रल बैंक की साल 1860 की मुहर है. यह मुहर करीब 170 साल पुरानी होने का अनुमान है. ऐसे में बताया जा रहा है कि ये सिल्लियां 1855 से 1860 के बीच की हो सकती हैं. इसके अलावा, पुलिस ने जो सिक्के बरामद किए हैं, उन पर भी उर्दू में कुछ अंकित है. ऐसे में यह सिक्के भी मुगलकाल के होने की संभावना है. हालांकि, सिक्के मूल हालत में बहुत कम बरामद हुए हैं. पुलिस जांच में खुदाई में करीब 1500 सिक्के निकलने की बात सामने आई है. इनमें से 600 सिक्के पिघलाकर चांदी के टुकड़ों में बदल दिए गए, जबकि 300 सिक्के महज 4.50 लाख रुपए में बेच दिए गए. एक मजदूर को मिले सिक्के कहां गए, इसे लेकर भी पड़ताल जारी है.
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अक्टूबर, 2025 में निकला था खजाना: पुलिस की जांच में सामने आया है कि हवेली को तोड़ने के दौरान पिछले साल अक्टूबर में खजाना निकला था, जिसे ठेकेदार और मजदूरों ने आपस में बांटने का फैसला किया. खुदाई में चांदी के 1500 सिक्के निकलने की बात सामने आई है, जिन्हें पांच आरोपियों ने आपस में बांट लिया और सभी को 300-300 सिक्के मिले. चांदी की दो सिल्लियों को सभी ने आपसी सहमति से छुपा दिया, ताकि कभी उनके घर पर तलाशी हो तो भी चांदी उनके पास से बरामद नहीं हो. उन्होंने करीब एक महीने तक सोच-विचार किया और यह फैसला लिया. खजाना निकलने की भनक लगने के बाद हवेली मालिक ने 15 जुलाई को माणक चौक थाने में मुकदमा दर्ज करवाया था.
घटना पुरानी, तकनीक से नहीं मिली मदद: जांच में सामने आया है कि ठेकेदार और मजदूरों को अक्टूबर, 2025 में खजाना मिला था. करीब एक महीने तक उन्होंने आपस में बातचीत और सलाह करके चांदी की दो सिल्लियों को जमीन में गाड़कर छुपा दिया, जबकि खुदाई में मिले 1500 सिक्कों को आपस में बांट लिया. इस मामले में 15 जुलाई को मुकदमा दर्ज करवाया गया. घटना पुरानी होने के कारण पुलिस को सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल से ज्यादा मदद नहीं मिली. इसके बाद परंपरागत पुलिसिंग की मदद लेते हुए ठेकेदार और मजदूरों पर नजर रखी गई. उनकी जीवनशैली में आए बदलाव से पुलिस को कुछ शक हुआ., जिसके बाद पूछताछ में हवेली में चांदी की सिल्लियां और 1500 सिक्के निकलने की बात सामने आई.
सिक्कों को पिघलाकर बनाए टुकड़े: थानाधिकारी राकेश ख्यालिया ने बताया कि हवेली मालिक की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ठेकेदार महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू खटीक, जगदीश राजोरिया, ओमप्रकश खींची उर्फ पप्पू, अनुज अरोड़ा और रजनी मल्होत्रा को गिरफ्तार किया है. उनके कब्जे से करीब 66 किलो वजनी चांदी की दो सिल्लियां बरामद की गई. इसके अलावा करीब 600 सिक्कों को पिघलाकर बनाए गए चांदी के कुछ टुकड़े भी मिले, जिनका वजन करीब 5 किलो है. रजनी के घर से चांदी के 16 सिक्के मिले हैं, जबकि दो मजदूरों ने अपने सिक्के जयसिंहपुरा खोर के रहने वाले किसी शख्स को बेचने की बात कही है, जिसे लेकर पड़ताल की जा रही है. थानाधिकारी ने बताया कि सभी आरोपियों को दो बार रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई. आगे जरूरत होने पर दुबारा रिमांड पर लेंगे.
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ठेकेदार ने गाड़ियां खरीदी, मजदूर ने की बेटी की शादी: थानाधिकारी ने बताया कि पुलिस की जांच में सामने आया है कि हवेली में मिले खजाने को बेचने के बाद ठेकेदार ने नई गाड़ियां और उपकरण खरीदे. मजदूरों पर नजर रखी तो सामने आया कि एक मजदूर एक महीने तक काम पर नहीं गया और दिनभर शराब पीता रहता. इससे पुलिस को शंका हुई कि उनके पास कहीं से रुपए आए हैं. जांच में सामने आया कि जगदीश ने करीब 4.50 लाख रुपए में चांदी के सिक्के बेचकर अपनी बेटी की शादी की, जो होमगार्ड में है. फिलहाल, रजनी को मिले 300 सिक्कों की गुत्थी पुलिस भी नहीं सुलझा पाई है. यह सिक्के उसने शराब पीने में खर्च किए या उसे सिक्के कम मिले, इसे लेकर पड़ताल जारी है, उसके घर से 16 सिक्के मिले हैं.
अनजान शख्स को बेच दिए सिक्के: उन्होंने बताया कि जगदीश और पप्पू से पूछताछ में सामने आया कि इनमें से एक की पत्नी चाय की दुकान करती है. वहां अकसर आने वाले एक शख्स को जगदीश और पप्पू ने अपने हिस्से के 600 सिक्के बेच दिए. दोनों का कहना है कि उस शख्स का मोबाइल नंबर इनके पास नहीं है. वह जयसिंहपुरा खोर का रहने वाला है. उस शख्स की तलाश और उससे सिक्कों की बरामदगी को लेकर प्रयास जारी हैं. उन्होंने बताया कि दोनों की सीडीआर निकालकर उसमें जो भी लोग इनसे बातचीत करते पाए गए हैं. उनसे बातचीत कर तस्दीक की जा रही है.
कितनी पुरानी संपत्ति, यह देखकर होगी सुपुर्दगी: इधर, अधिवक्ता दीपक चौहान का कहना है कि परिवादी की रिपोर्ट पर पुलिस चोरी का सामान जब्त करती है तो कोर्ट की प्रक्रिया से वह सामान परिवादी को मिलता है. हालांकि, जमीन, नींव या दीवार में छिपी मूलयवान वस्तु को लेकर सुपुर्दगी का फैसला कलेक्टर द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया से तय होगा. कलेक्टर यह तय करते हैं कि संपत्ति या मूल्यवान वस्तु 100 साल से अधिक समय से छुपी हुई है या नहीं, अगर कोई वस्तु 100 साल से अधिक समय से जमीन में छुपी हुई है तो भारतीय खजाना अधिनियम- 1878 के प्रावधान लागू होंगे.
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