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Rajasthan Panchayat Election Qualification: अनपढ़ भी बन सकते हैं सरपंच, राजस्थान पंचायत चुनाव के दो बड़े नियम जान लें, होगा फायदा

दरअसल, अगर आप भी अपने गांव में सरपंच, पंच या पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के नियमों में दो बड़े और ऐतिहासिक बदलाव…

Navbharat Times के अनुसार30 सितंबर 2026 को 04:05 am बजे
Rajasthan Panchayat Election Qualification: अनपढ़ भी बन सकते हैं सरपंच, राजस्थान पंचायत चुनाव के दो बड़े नियम जान लें, होगा फायदा

सौजन्य से:- Navbharat Times

दरअसल, अगर आप भी अपने गांव में सरपंच, पंच या पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के नियमों में दो बड़े और ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। इन बदलावों के बाद अब गांवों के कई ऐसे लोग भी चुनावी मैदान में उतर सकेंगे, जो पहले कड़े नियमों के कारण चुनाव लड़ने से वंचित रह जाते थे। यहां पढ़ें डिटेल्स।

आइए जानते हैं कि इस बार पंचायत चुनावों में कौन से दो बड़े नियम हटाए गए हैं और इनसे आम जनता और उम्मीदवारों को क्या बड़ा फायदा होने वाला है।

शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता पूरी तरह खत्म

पंचायत चुनावों में चुनाव लड़ने के लिए अब किसी भी तरह की पढ़ाई-लिखाई या शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं है। पहले सरपंच पद के लिए न्यूनतम 8वीं पास होना अनिवार्य किया गया था। इस नियम के कारण गांव के कई अनुभवी, लोकप्रिय और समाज सेवी लोग चुनाव लड़ने से बाहर हो जाते थे। बता दें कि साल 2015 में तत्कालीन सरकार ने 'राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक' लागू किया था, जिसके तहत पहली बार चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय की गई थी। इसमें सरपंच पद के लिए सामान्य वर्ग की न्यूनतम योग्यता 8 वी और एससी एसटी वर्ग के लिए पांचवी की गई थी। साल 2019 में सरकार ने इस नियम में बदलाव किया था। शैक्षणिक अनिवार्यता खत्म की थी। इस नियम को वर्तमान सरकार ने भी बरकरार रखा है। यानी अब अगर कोई उम्मीदवार पूरी तरह अनपढ़ या साक्षर भी है, तो भी वह पंच, सरपंच या वार्ड पंच का चुनाव आसानी से लड़ सकता है। सरकार का मानना है कि लोकतंत्र में नेतृत्व करने की क्षमता का संबंध इंसान की समझ और जनसेवा की भावना से है, न कि उसकी डिग्री से।दो से अधिक संतानों वाला नियम समाप्त

पंचायत चुनाव में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव बच्चों की संख्या की सीमा को लेकर हुआ है। राजस्थान सरकार ने करीब तीन दशक पुराने 'दो संतान' वाले नियम को खत्म कर दिया है। पहले जिन उम्मीदवारों के दो से अधिक बच्चे होते थे, उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता था। हाल ही में विधानसभा में पारित संशोधन के अनुसार, अब दो से अधिक संतानों वाले नागरिक भी पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बन सकेंगे। इस फैसले से गांव के उन हजारों सामाजिक कार्यकर्ताओं और दिग्गज नेताओं को सीधी राहत मिली है, जो दो से अधिक बच्चे होने की वजह से सालों से चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे।इन बदलावों से उम्मीदवारों को क्या होगा फायदा?

सबको मिलेगा समान अवसर: इन दोनों नियमों के हटने से गांव के हर वर्ग और तबके को चुनाव लड़ने का समान अधिकार मिलेगा।अनुभवी लोगों की वापसी: गांव के वे बुजुर्ग या अनुभवी लोग जो पढ़े-लिखे नहीं थे या जिनके दो से ज्यादा बच्चे थे, अब वे फिर से राजनीति में लौटकर गांव के विकास में अपना योगदान दे सकेंगे।

नामांकन रद्द होने का डर खत्म: कागजी कमियों या संतानों की संख्या के कारण पर्चा खारिज होने का जोखिम अब नहीं रहेगा।

अगर आप भी अपने गांव के विकास की कमान संभालना चाहते हैं, तो अब बिना किसी शैक्षणिक या पारिवारिक बंदिश के अपनी चुनावी तैयारियों में जुट सकते हैं।

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