राजस्थान: कोटा में एंटीबायोटिक इंजेक्शन के बाद चार प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी, दो को आईसीयू में भर्ती
कोटा के जेकेलोन अस्पताल में एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगने के बाद चार प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ गई। दो महिलाओं को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। सभी की हालत अब सामान्य बताई गई है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
Rajasthan: कोटा में इंजेक्शन के बाद फिर चार प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी, दो को आईसीयू में किया गया भर्ती
कोटा के जेकेलोन अस्पताल में एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगने के बाद चार प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ गई। दो महिलाओं को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। उपचार के बाद सभी की हालत सामान्य बताई गई। वहीं, बीते 24 घंटे में दो प्रसूताओं की मौत से अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठे।
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विस्तार
शहर जेकेलोन अस्पताल में सोमवार देर रात एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगाने के बाद चार प्रसूताओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। महिलाओं को सांस लेने में तकलीफ, तेज कंपकंपी और बेचैनी की शिकायत हुई। प्रसूताओं की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। स्थिति को देखते हुए दो महिलाओं को एहतियातन आईसीयू में भर्ती किया गया।
अस्पताल में भर्ती इंदरगढ़ निवासी केकशा, डुंगरजा निवासी संगीता, भवानीपुरिया निवासी प्रियंका और एक अन्य महिला की तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सकों की टीम ने तुरंत उपचार शुरू किया। करीब दो से तीन घंटे तक इलाज और सघन निगरानी के बाद सभी प्रसूताओं की स्थिति सामान्य हो गई।
अधीक्षक बोलीं- गंभीर होने की बात अफवाह
अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला ने बताया कि कुछ दवाओं के प्रभाव से शरीर में कंपकंपी आना सामान्य प्रतिक्रिया हो सकती है। उन्होंने महिलाओं की हालत गंभीर होने की बात से इनकार करते हुए कहा कि सभी प्रसूताएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति सामान्य है।
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24 घंटे में दो प्रसूताओं की मौत से उठ रहे सवाल
उधर, बीते 24 घंटे में दो महिलाओं की मौत के बाद कोटा के सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। पहला मामला अकलेरा निवासी 27 वर्षीय रूबीना का है। झालावाड़ में सिजेरियन प्रसव के बाद उनका ब्लड प्रेशर गिर गया था और यूरिन आउटपुट बंद होने पर उन्हें न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
दूसरा मामला जेकेलोन अस्पताल का है। खेड़ारामपुर निवासी 34 वर्षीय गंगोत्री सैनी की शनिवार रात सामान्य प्रसव के बाद लगातार अत्यधिक रक्तस्राव होता रहा। चिकित्सकों ने उन्हें 10 से 12 यूनिट रक्त चढ़ाया, लेकिन रक्तस्राव नहीं रुका और प्रसव के करीब 30 घंटे बाद उनकी मौत हो गई।
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