जयपुर में NOC के लिए निगम पहुंच रहे पूर्व पार्षद, 24 घंटे में 25 से ज्यादा आवेदन
जयपुर में NOC के लिए निगम पहुंच रहे पूर्व पार्षद, 24 घंटे में 25 से ज्यादा आवेदन जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों की आरक्षण लॉटरी सामने आने के बाद संभावित दावेदारों ने अपने-अपने समीकरण देखना शुरू कर दिया है। जिन पूर्व पार्ष…

सौजन्य से:- Hindustan
जयपुर में NOC के लिए निगम पहुंच रहे पूर्व पार्षद, 24 घंटे में 25 से ज्यादा आवेदन
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों की आरक्षण लॉटरी सामने आने के बाद संभावित दावेदारों ने अपने-अपने समीकरण देखना शुरू कर दिया है। जिन पूर्व पार्षदों के लिए वार्ड आरक्षण अनुकूल है, वे चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए हैं।
जयपुर नगर निगम चुनाव की तैयारियों के बीच पूर्व पार्षदों ने अपनी कागजी तैयारी शुरू कर दी है। वार्डों की आरक्षण लॉटरी के बाद नगर निगम में नोड्यूज और NOC लेने के लिए पूर्व पार्षदों की आवाजाही बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे में ही 25 से ज्यादा पूर्व पार्षद NOC के लिए आवेदन कर चुके हैं।
NOC के लिए आवेदन करने वालों में पूर्व मेयर कुसुम यादव समेत कई वरिष्ठ पूर्व पार्षद शामिल हैं। नगर निगम स्तर पर इन आवेदनों की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चुनाव की औपचारिक घोषणा और नामांकन शुरू होने से पहले ही दावेदार जरूरी दस्तावेज जुटाने में लगे हैं।
आरक्षण लॉटरी के बाद बढ़ी सक्रियता
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों की आरक्षण लॉटरी सामने आने के बाद संभावित दावेदारों ने अपने-अपने समीकरण देखना शुरू कर दिया है। जिन पूर्व पार्षदों के लिए वार्ड आरक्षण अनुकूल है, वे चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए हैं।
कई पूर्व पार्षद अपने पुराने वार्ड से ही दोबारा दावेदारी करना चाहते हैं। वहीं आरक्षण बदलने की स्थिति में कुछ दावेदार आसपास के वार्डों में संभावनाएं तलाश रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस की ओर से अभी टिकट की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संभावित उम्मीदवारों ने पार्टी स्तर पर संपर्क और सक्रियता बढ़ा दी है।
नोड्यूज के लिए निगम में बढ़ी आवाजाही
नगर निगम के बाबू दुर्गापाल के मुताबिक नोड्यूज बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पिछले 24 घंटे में 25 से ज्यादा पार्षदों के आवेदन आए हैं। इनमें पूर्व मेयर कुसुम यादव समेत कई वरिष्ठ पार्षद शामिल हैं।
चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों का कहना है कि नामांकन के समय दस्तावेजों को लेकर किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए वे पहले ही NOC लेने में जुट गए हैं। आने वाले दिनों में आवेदन करने वालों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
समय पर NOC नहीं मिली तो नामांकन में परेशानी का डर
पार्षद पति अख्तर हुसैन ने बताया कि चुनाव लड़ने के लिए NOC महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उनके मुताबिक पिछले तीन-चार दिनों से दर्जनों पार्षद निगम में NOC के लिए पहुंच रहे हैं और जरूरी दस्तावेज जमा करा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों के उपलब्ध नहीं होने से कुछ मामलों में प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। दावेदारों को आशंका है कि अगर समय रहते NOC नहीं मिली तो नामांकन के दौरान परेशानी हो सकती है।
250 में से करीब 200 पूर्व पार्षदों की नजर टिकट पर
जयपुर नगर निगम के पिछले कार्यकाल में 250 पार्षद थे। इनमें से करीब 200 पूर्व पार्षदों के दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी की चर्चा है। हालांकि, यह अभी संभावित दावेदारों की संख्या है। अंतिम तौर पर कितनों को भाजपा या कांग्रेस से टिकट मिलता है, यह पार्टी की सूची जारी होने के बाद ही साफ होगा।
आरक्षण लॉटरी के बाद पूर्व पार्षदों की सक्रियता ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि जयपुर नगर निगम चुनाव में पुराने चेहरों के साथ-साथ नए दावेदारों के बीच टिकट को लेकर मुकाबला दिलचस्प रहने वाला है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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