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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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विदेश से MBBS करने वाले 3 डॉक्टर गिरफ्तार:25 लाख देकर बनवाए फर्जी FMGE सर्टिफिकेट, राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करा की इंटर्नशिप
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स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फर्जी FMGE (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन) सर्टिफिकेट मामले में विदेश से MBBS करने वाले तीन और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने 25 लाख रुपए तक खर्च कर फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार करवाए और उनके आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराकर मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी की।
मामला एसओजी थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 08/2026 से जुड़ा है, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं में जांच चल रही है। फिलहाल एसओजी की टीम आरोपियों से पूछताछ में जुट गई है।
गिरफ्तार आरोपी डॉक्टर्स के नाम नवदीप तंबोलिया (27), निवासी उम्मेदगढ़, बागीदौरा, जिला बांसवाड़ा, चिराग साहू (28), निवासी छोटी सादड़ी, जिला प्रतापगढ़ और आफरीदी खान (25), निवासी मंडावर, जिला दौसा है। तीनों आरोपियों को 28 और 29 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया।
कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में की इंटर्नशिप
ADG (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया- जांच में खुलासा हुआ कि विदेश से MBBS करने के बाद FMGE स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाने वाले अभ्यर्थियों के लिए फर्जी सर्टिफिकेट तैयार किए गए। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराया गया और कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी की गई।
तीनों आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने क्रमशः किर्गिस्तान और कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने के बाद फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र बनवाए और इसके जरिए मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की।
जांच के अनुसार, फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए 23.5 लाख से 25 लाख रुपए तक की रकम चुकाई गई। इस रैकेट का मुख्य सरगना भानाराम माली और उसके सहयोगी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। आरोप है कि गिरोह प्रत्येक अभ्यर्थी से 20 से 30 लाख रुपए लेकर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करता था।
तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर 4 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। एसओजी पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच में जुटी हुई है।
नवदीप तंबोलिया ने वर्ष 2022 में किर्गिस्तान से किया था एमबीबीएस
पूछताछ में सामने आया कि नवदीप तंबोलिया ने वर्ष 2022 में किर्गिस्तान से एमबीबीएस किया था। भारत लौटने के बाद उसने कई बार एफएमजीई परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हुआ। इसके बाद अपने गांव के पड़ोसी निशांत टेलर के माध्यम से पहले से गिरफ्तार आरोपी शुभम गुर्जर से संपर्क किया। करीब 25 लाख रुपए देकर फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट बनवाया। इसके आधार पर उसने राजकीय मेडिकल कॉलेज दौसा में इंटर्नशिप भी कर ली। शुभम गुर्जर पहले से न्यायिक हिरासत में है।
चिराग साहू ने वर्ष 2023 में कजाकिस्तान से किया था एमबीबीएस
चिराग साहू ने वर्ष 2023 में कजाकिस्तान से एमबीबीएस किया। कई प्रयासों के बावजूद एफएमजीई परीक्षा पास नहीं कर पाया। इसके बाद कजाकिस्तान में साथ पढ़ने वाले विकास यादव के जरिए 23.50 लाख रुपए में फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट बनवाया और राजकीय पैसिफिक मेडिकल कॉलेज, उदयपुर में इंटर्नशिप की। विकास यादव को एसओजी 26 मार्च 2026 को ही गिरफ्तार कर चुकी है और वह न्यायिक हिरासत में है।
आफरीदी खान ने वर्ष 2022 में कजाकिस्तान से किया था एमबीबीएस
आफरीदी खान ने वर्ष 2022 में कजाकिस्तान से एमबीबीएस किया था। भारत लौटने के बाद कई बार एफएमजीई परीक्षा में असफल रहा। इसके बाद उसने अपने सीनियर शुभम गुर्जर के माध्यम से 25 लाख रुपए देकर फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट बनवाया और राजकीय मेडिकल कॉलेज अलवर में इंटर्नशिप पूरी की।
पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड था भानाराम माली
ADG (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया- एसओजी की जांच में सामने आया है कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड भानाराम माली था। वह अपने सहयोगियों शुभम गुर्जर और इंद्रराज गुर्जर के साथ मिलकर फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट तैयार करवाता था। इसके बाद राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने की व्यवस्था भी यही गिरोह करता था। इसके लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से 20 से 30 लाख रुपए वसूले जाते थे।
इस मामले में पहले ही फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर इंटर्नशिप करने वाले 17 डॉक्टर, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन, मुख्य आरोपी भानाराम माली और एक दलाल सहित कुल 25 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके थे। अब तीन और डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद कुल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 28 हो गई है।
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