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राजस्थान पुलिस अब नहीं करेगी 'दलित' शब्द का इस्तेमाल - दलित दस्तक

दलित दस्तक (Dalit Dastak) साल 2012 से लगातार दलित-आदिवासी (Marginalized) समाज की आवाज उठा रहा है। मासिक पत्रिका के तौर पर शुरू हुआ दलित दस्तक आज वेबसाइट, यू-ट्यूब और प्रकाशन संस्थान (दास पब्लिकेशन) के तौर पर काम कर रहा ह…

Dalit Dastak News के अनुसार13 जुलाई 2026 को 07:04 am बजे
राजस्थान पुलिस अब नहीं करेगी 'दलित' शब्द का इस्तेमाल - दलित दस्तक

सौजन्य से:- Dalit Dastak News

दलित दस्तक (Dalit Dastak) साल 2012 से लगातार दलित-आदिवासी (Marginalized) समाज की आवाज उठा रहा है। मासिक पत्रिका के तौर पर शुरू हुआ दलित दस्तक आज वेबसाइट, यू-ट्यूब और प्रकाशन संस्थान (दास पब्लिकेशन) के तौर पर काम कर रहा है। इसके संपादक अशोक कुमार (अशोक दास) 2006 से पत्रकारिता में हैं और तमाम मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। Bahujanbooks.com नाम से हमारी वेबसाइट भी है, जहां से बहुजन साहित्य को ऑनलाइन बुक किया जा सकता है। दलित-बहुजन समाज की खबरों के लिए दलित दस्तक को सोशल मीडिया पर लाइक और फॉलो करिए। हम तक खबर पहुंचाने के लिए हमें dalitdastak@gmail.com पर ई-मेल करें या 9013942612 पर व्हाट्सएप करें।

राजस्थान पुलिस अब नहीं करेगी ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल

इस आदेश का सीधा मतलब है कि अब पुलिस विभाग अपनी एफआईआर (FIR), शिकायतों, चार्जशीट, पंचनामा, गिरफ्तारी मेमो, कस्टडी से जुड़े दस्तावेजों, केस डायरी, क्लोजर रिपोर्ट, फॉर्म, आवेदन, सर्टिफिकेट और सरकारी चिट्ठियों में 'दलित' शब्द का इस्तेमाल नहीं करेगा।

जयपुर। राजस्थान पुलिस के सभी आधिकारिक कामकाजों या फिर दस्तावेजों में अब ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल नहीं होगा। राजस्थान पुलिस के मिसलेनियस सेल (विविध प्रकोष्ठ) ने इसे लेकर एक आदेश जार किया है। इस आदेश में कहा गया है कि किसी भी सरकारी दस्तावेज या बातचीत में ‘दलित’ शब्द न तो बोला जाएगा और न ही लिखा जाएगा। इसकी जगह ‘Scheduled Caste’ (अनुसूचित जाति) शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा। यह खबर 11 जुलाई 2026 को सामने आई।

इस आदेश का सीधा मतलब है कि अब पुलिस विभाग अपनी एफआईआर (FIR), शिकायतों, चार्जशीट, पंचनामा, गिरफ्तारी मेमो, कस्टडी से जुड़े दस्तावेजों, केस डायरी, क्लोजर रिपोर्ट, फॉर्म, आवेदन, सर्टिफिकेट और सरकारी चिट्ठियों में ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करेगा। यह आदेश राजस्थान सरकार के सभी पुलिस महानिदेशकों (DGPs), पुलिस कमिश्नरों, जिला पुलिस अधीक्षकों (SPs) और उनके प्रभारियों को भेज दिया गया है। थाना स्तर पर सभी थाना प्रभारियों (SHOs) को भी इन नियमों का पालन करने के लिए कहा गया है।

मिसलेनियस सेल के पुलिस अधीक्षक (SP) ज्ञानचंद यादव ने बताया कि, “साल 2018 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के एक आदेश और 16 मार्च 2019 को भीलवाड़ा से जारी राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के एक आदेश के तहत अब ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। हमें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से निर्देश मिले थे, जहां एक शिकायत दर्ज कराई गई थी कि इन पुराने आदेशों के बावजूद ‘दलित’ शब्द अभी भी इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए अब यह नया आदेश जारी किया गया है, जिसके मुताबिक इसकी जगह ‘अनुसूचित जाति’ शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।”

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