पंचायत-निकाय चुनाव पर सियासी संग्राम: हाईकोर्ट की डेडलाइन नजदीक, विपक्ष हमलावर, सरकार ने झाड़ा पल्ला
पंचायत-निकाय चुनाव पर सियासी संग्राम: हाईकोर्ट की डेडलाइन नजदीक, विपक्ष हमलावर, सरकार ने झाड़ा पल्ला गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार पंचायत चुनाव टालना चाह रही है, जबकि सरकार का कहना है कि चुनाव का काम निर्वाचन आयोग का है.…

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पंचायत-निकाय चुनाव पर सियासी संग्राम: हाईकोर्ट की डेडलाइन नजदीक, विपक्ष हमलावर, सरकार ने झाड़ा पल्ला
गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार पंचायत चुनाव टालना चाह रही है, जबकि सरकार का कहना है कि चुनाव का काम निर्वाचन आयोग का है.
Published : June 29, 2026 at 7:04 PM IST
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से 31 जुलाई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की तय समय सीमा अब करीब है, लेकिन अभी तक राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है. ऐसे में विपक्ष सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को जानबूझकर टालने के आरोप लगा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर निर्वाचन आयोग की बताते हुए खुद को इससे अलग दिखा रहा है. निर्वाचन आयोग OBC कमीशन की रिपोर्ट के इंतजार में है.
राजस्थान में भजनलाल सरकार वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत पंचायत-निकाय चुनाव की दिशा में काम कर रही है. सरकार ने बजट घोषणा में भी इस बिंदु को प्रमुखता से रखा. सरकार की मंशा पर निर्वाचन आयोग भी इसी दिशा में आगे बढ़ा. वन स्टेट वन इलेक्शन के फार्मूले के चलते पिछले एक साल से पंचायत और नगर निकायों में प्रशासक काम कर रहे हैं. मौजूदा स्थिति यह है कि चुनाव को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अनिश्चितता बनी हुई है. सरकार पहले ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, परिसीमन और प्रशासनिक तैयारियों को वजह बताकर समय मांग चुकी थी, हालांकि हाईकोर्ट ने सरकार की दिसंबर तक चुनाव टालने की मांग स्वीकार नहीं की और चुनाव कराने के स्पष्ट निर्देश दिए.
कानूनी रूप से मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाईकोर्ट पहले भी नवंबर 2025 में चुनाव कराने की समयसीमा तय कर चुका था. बाद में चुनाव नहीं होने पर मामला फिर अदालत पहुंचा और अब 31 जुलाई 2026 तक पूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि स्थानीय लोकतांत्रिक संस्थाओं का लंबे समय तक प्रशासकीय व्यवस्था से संचालन उचित नहीं माना जा सकता. अदालत ने ओबीसी आयोग को भी तय समय में रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन कमीशन की रिपोर्ट अभी भी पेश नहीं हुई, जिसके चलते हाईकोर्ट की ओर से दिए गए समय पर चुनाव होना अब संभव नहीं है. उधर, राज्य निर्वाचन आयोग OBC कमीशन की रिपोर्ट और परिसीमन के इंतजार में है, जैसे ही रिपोर्ट आएगी चुनाव कार्यक्रम तय करेगा.
विपक्ष की घेराबंदी: इधर, राजनीतिक मोर्चे पर कांग्रेस लगातार आक्रामक है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा सरकार स्थानीय निकायों में राजनीतिक परिस्थितियां अपने पक्ष में करने तक चुनाव टालना चाहती है. कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और जनता के जनादेश से बचने की रणनीति बता रही है. पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने दो दिन पहले जोधपुर में भजनलाल सरकार पर हार के डर से चुनाव कराने से भागने का आरोप लगाया. गहलोत के आरोपों पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि चुनाव कराने का अधिकार राज्य निर्वाचन आयोग के पास है, सरकार केवल प्रशासनिक सहयोग दे सकती है. सरकार चुनाव के लिए तैयार है और आयोग को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा.
अदालत के आदेश का अध्ययन: मंत्री दिलावर ने कहा कि न्यायालय के आदेश का अध्ययन कर रहे हैं. मंत्रिमंडल भी पूरे मामले को लेकर तैयारी कर रहा है. ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट का इंतजार है. चुनाव होंगे, इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है. अभी कानूनी पेचीदगियों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. किसी तरह का कोई व्यवधान नहीं हो, यह सरकार की प्राथमिकता है. पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सरकार पूरी तरह से तैयार है. चुनाव से बीजेपी भाग नहीं रही है. पुराना रिकॉर्ड उठाकर देख लें, किस तरह से जनता ने कांग्रेस को सबक सिखाया है. टुकड़ों-टुकड़ों में बंटी कांग्रेस इसी तरह से झूठ और अनर्गल आरोप लगा सकती है. चुनाव कराने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है, जब भी आयोग चुनाव कराएगा, भारतीय जनता पार्टी उसके लिए तैयार है.
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