बुखार भी नहीं रोक पाया 'गोल्डन पंच', ग्लासगो में मेडल जीतकर जयपुर लौटीं अरुंधति चौधरी का शानदार स्वागत
बुखार भी नहीं रोक पाया 'गोल्डन पंच', ग्लासगो में मेडल जीतकर जयपुर लौटीं अरुंधति चौधरी का शानदार स्वागत ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली बॉक्सर अरुंधति चौधरी का बुधवार को जयपुर पहुंची. Pu…

सौजन्य से:- ETV Bharat
बुखार भी नहीं रोक पाया 'गोल्डन पंच', ग्लासगो में मेडल जीतकर जयपुर लौटीं अरुंधति चौधरी का शानदार स्वागत
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली बॉक्सर अरुंधति चौधरी का बुधवार को जयपुर पहुंची.
Published : August 5, 2026 at 1:26 PM IST
जयपुर: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीतकर देश और राजस्थान का नाम रोशन करने वाली अरुंधति चौधरी बुधवार को जयपुर एयरपोर्ट पहुंचीं, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया. एयरपोर्ट पर खेल प्रेमियों ने फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ अरुंधति का स्वागत किया. ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स के 70 किलोग्राम महिला मुक्केबाजी स्पर्धा में अरुंधति चौधरी ने इंग्लैंड की चैंटेल रीड को एकतरफा मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. पूरे मुकाबले में अरुंधति ने आक्रामक खेल दिखाया.
जयपुर एयरपोर्ट पर ईटीवी भारत से खास बातचीत में अरुंधति ने बताया कि फाइनल मुकाबले से पहले उनकी तबीयत ठीक नहीं थी और उन्हें तेज बुखार था. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने कहा कि "फाइनल में मुझे बुखार था, लेकिन उस समय मुझे सिर्फ गोल्ड मेडल दिखाई दे रहा था. मैंने दर्द और कमजोरी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. मेरा पूरा ध्यान देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने पर था."
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4 साल इंतजार नहीं कर सकती थी: अरुंधति ने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ उनकी नहीं बल्कि पूरे देश और राजस्थान की है. उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स का अगला संस्करण चार साल बाद होगा और वह इतने लंबे समय तक इस अवसर का इंतजार नहीं करना चाहती थीं. उन्होंने कहा कि उनका यह स्वर्ण पदक देश की लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा बनेगा, यदि उनकी सफलता से कोई बेटी खेलों में आगे बढ़ने का हौसला जुटाती है, तो वह इसे अपनी सबसे बड़ी जीत मानेंगी.
परिवार का पूरा साथ मिला: अरुंधति ने कहा कि कोटा से कॉमनवेल्थ गेम्स का सफर काफी शानदार रहा. मेरे मेडल जीतने में मेरे परिवार का भी योगदान रहा है. उन्होंने कहा की मेरे परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया और आम तौर पर माना जाता है कF महिलाओं को सॉफ्ट खेलों के प्रति रुझान ज़्यादा रहता है, लेकिन मुक्केबाजी में देश के लिए मेडल जीतकर मैंने यह भ्रम तोड़ दिया है.
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