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मराठी विवाद के बाद राज्यपाल बोले- राजस्थानी भाषा नहीं, संस्कृति है, ये बहुत मीठी भाषा है, वह इसे प्यार करते हैं

मराठी विवाद के बाद राज्यपाल बोले- राजस्थानी भाषा नहीं, संस्कृति है, ये बहुत मीठी भाषा है, वह इसे प्यार करते हैं राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने मराठी केंद्र विवाद के बाद सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी केंद्र खोलने का आदेश जा…

ETV Bharat के अनुसार30 जुलाई 2026 को 03:38 pm बजे
मराठी विवाद के बाद राज्यपाल बोले- राजस्थानी भाषा नहीं, संस्कृति है, ये बहुत मीठी भाषा है, वह इसे प्यार करते हैं

सौजन्य से:- ETV Bharat

मराठी विवाद के बाद राज्यपाल बोले- राजस्थानी भाषा नहीं, संस्कृति है, ये बहुत मीठी भाषा है, वह इसे प्यार करते हैं

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने मराठी केंद्र विवाद के बाद सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी केंद्र खोलने का आदेश जारी किया है.

Published : July 30, 2026 at 7:59 PM IST

जयपुर: बीते दिनों मराठी भाषा अध्ययन केंद्र खोलने की घोषणा के बाद काफी विवाद खड़ा हुआ था, जिसके बाद अब राजस्थानी भाषा को लेकर राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि राजस्थानी भाषा नहीं संस्कृति है. जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि राजस्थानी बहुत मीठी भाषा है. वह इसे प्यार करते हैं. उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के शिक्षा सचिव उनसे मिलने आए थे. उन्होंने एक पत्र दिया था और कहा था कि राजस्थान के बहुत से लोग महाराष्ट्र में रहते हैं, यहां भी मराठी भाषा के केंद्र खुलेंगे तो दोनों प्रदेशों में और निकटता आएगी. इस सम्बन्ध में ही प्रदेश में मराठी भाषा के केंद्र खोलने के लिए कहा गया, पर मराठी भाषा अनिवार्य नहीं है, ऐच्छिक है.

उन्होंने कहा कि राजस्थानी तो राजस्थान की अपनी भाषा है. राजस्थानी केंद्र खोलने का कहा गया तो हमने तुरंत सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी केंद्र खोलने के लिए भी आदेश जारी किया. उन्होंने कहा कि मराठी केंद्र खोलने के बाद यहां के लोगों का राजस्थानी केंद्र खोलने के लिए ध्यान गया. उन्होंने कहा कि इस पर तो बहुत पहले ही शुरुआत हो जानी चाहिए थी. राज्यपाल बागडे गुरुवार को “राजस्थान गौरव सम्मान समारोह” में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि भारत विश्वगुरु तभी बनेगा जब हमारी संस्कृति और नैतिक मूल्य बचे रहेंगे. उन्होंने कहा कि पेपर लीक के प्रकरण इसीलिए होते हैं कि नैतिकता से व्यक्ति विमुख होने लगे. उन्होंने नैतिक मूल्य और संस्कृति बचाए रखने में सभी की भागीदारी का आह्वान किया.

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हमारी संस्कृति का सम्मान: राज्यपाल ने महाराणा प्रताप के दरबार के लेखक चक्रपाणि मिश्र के “विश्ववल्लभ” ग्रंथ की भी चर्चा की और कहा कि कृषि और जल संरक्षण की यह बहुत महत्वपूर्ण पुस्तक है. उन्होंने भारत सरकार द्वारा संस्कृति से जुड़े संस्कृत और दूसरी भाषाओं के ग्रंथों के डिजिटलाइजेशन की पहल को महत्वपूर्ण बताया. राज्यपाल ने कहा कि प्राचीन काल में भारत का भूभाग बहुत बड़ा था. म्यांमार, अफगानिस्तान, नेपाल आदि सब भारत के ही भाग थे. भारतीय संस्कृति तो वास्तव में सदा-सदा के लिए युवा ही है. उन्होंने कहा कि पश्चिम के देशों में आज भी भारत के दो महान ग्रंथों रामायण और महाभारत के प्रति सर्वाधिक आकर्षण है. उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि हमारी संस्कृति का बाहरी देश तो सम्मान करते हैं, परंतु हमारे यहां बहुत से ऐसे हैं, जो इस संस्कृति का मजाक उड़ाते हैं.

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