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वेब-आधारित टूल से होगी मानसिक रोगों की वैज्ञानिक पहचान, जयपुर और जोधपुर मेडिकल कॉलेज में होगी शुरुआत

वेब-आधारित टूल से होगी मानसिक रोगों की वैज्ञानिक पहचान, जयपुर और जोधपुर मेडिकल कॉलेज में होगी शुरुआत इससे उपचार में तेजी आएगी और विशेषज्ञ सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी. Published : July 30, 2026 at 7:14 PM IST जयपुर…

ETV Bharat के अनुसार30 जुलाई 2026 को 02:38 pm बजे
वेब-आधारित टूल से होगी मानसिक रोगों की वैज्ञानिक पहचान, जयपुर और जोधपुर मेडिकल कॉलेज में होगी शुरुआत

सौजन्य से:- ETV Bharat

वेब-आधारित टूल से होगी मानसिक रोगों की वैज्ञानिक पहचान, जयपुर और जोधपुर मेडिकल कॉलेज में होगी शुरुआत

इससे उपचार में तेजी आएगी और विशेषज्ञ सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी.

Published : July 30, 2026 at 7:14 PM IST

जयपुरः मानसिक रोगों की पहचान और उसके इलाज के लिए अब तकनीकी का सहारा लिया जाएगा. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खीवसर ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के तहत अवसाद, चिंता और आत्महत्या आदि की रोकथाम के लिए 'राज ममता' कार्यक्रम चलाए जाने की गई बजट घोषणा की गई थी. इसी कड़ी में प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ एवं साक्ष्य-आधारित बनाने की दिशा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है.

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि 'राज ममता' कार्यक्रम के तहत प्रदेश के जयपुर, जोधपुर मेडिकल कॉलेज और एम्स जोधपुर में वेब आधारित टूल किट ग्लोबल मेंटल हेल्थ असेसमेंट टूल (GMHAT) लागू किया जाएगा. यह वेब-आधारित डिजिटल एप मरीजों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर एवं वैज्ञानिक पहचान सुनिश्चित करेगा. इससे उपचार में तेजी आएगी और विशेषज्ञ सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी.

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विशेषज्ञ से परामर्श मिलेगाः राठौड़ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है. GMHAT एक वेब-आधारित डिजिटल असेसमेंट टूल है, जिसके माध्यम से मरीज का निर्धारित प्रश्नों के आधार पर साक्षात्कार किया जाएगा. साक्षात्कार पूरा होते ही सिस्टम स्वतः रिपोर्ट तैयार करेगा, जिससे बीमारी के संभावित लक्षणों का आंकलन कर उचित उपचार की दिशा तय की जा सकेगी.

उन्होंने कहा कि आवश्यकता होने पर टेलीमेडिसिन के माध्यम से मरीज का तत्काल मानसिक रोग विशेषज्ञ से परामर्श कराया जाएगा. इससे दूर-दराज एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी बिना अनावश्यक यात्रा किए विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह और उपचार उपलब्ध हो सकेगा. राठौड़ ने कहा कि इस डिजिटल प्रणाली से प्रदेश में मानसिक रोगों का डेटा-आधारित आकलन संभव होगा. इससे विभिन्न क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की स्थिति, गंभीरता एवं प्रवृत्तियों का विश्लेषण कर आवश्यकता के अनुरूप सेवाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी.

सभी जिलों में लागूः उन्होंने बताया कि जयपुर, जोधपुर मेडिकल कॉलेज और जोधपुर एम्स के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा. इससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुदृढ़, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण बन सकेंगी. इसे लेकर आज बैठक भी हुई. इसमें यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर से प्रोफेसर कैथरीन रॉबिन्सन एवं डॉ. विमल शर्मा, यूनिसेफ, राजस्थान से हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. अनिल अग्रवाल, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. एस.एम. स्वामी, चिकित्सा शिक्षा विभाग (DRME) से डॉ. रश्मि गुप्ता एवं डॉ. मोनिका सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.

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