अजमेर जेएलएन अस्पताल में पहली बार हुआ पेनक्रियाज में ट्यूमर का लेप्रोस्कोपी से ऑपरेशन
अजमेर जेएलएन अस्पताल में पहली बार हुआ पेनक्रियाज में ट्यूमर का लेप्रोस्कोपी से ऑपरेशन सर्जिकल विभाग की टीम ने महिला मरीज का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया और अब महिला मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है. Published : August 24, 2026 at 4…

सौजन्य से:- ETV Bharat
अजमेर जेएलएन अस्पताल में पहली बार हुआ पेनक्रियाज में ट्यूमर का लेप्रोस्कोपी से ऑपरेशन
सर्जिकल विभाग की टीम ने महिला मरीज का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया और अब महिला मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है.
Published : August 24, 2026 at 4:23 PM IST
|Updated : August 24, 2026 at 5:03 PM IST
अजमेर : संभाग के सबसे बड़े जेएलएन अस्पताल में पहली बार पेनक्रियाज (अग्नाशय) की टेल में बनी गांठ का लेप्रोस्कोपी के जरिए ऑपरेशन कर एक महिला मरीज को बड़ी राहत दी है. पेनक्रियाज में गांठ की वजह से महिला मरीज की शुगर अचानक कम हो जाती थी. इस कारण उसे बेहोशी और कमजोरी आती थी. शुगर के अचानक गिरने से महिला का ऑपरेशन करके गांठ निकलना उसके जीवन के लिए खतरा भी था. अस्पताल के सर्जरी विभाग ने पहले बार एंडोस्कोपी से ऐसे जटिल ऑपरेशन को करके दिखाया है.
अजमेर में जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल सामरिया ने बताया कि एक महिला मरीज अस्पताल में इलाज के लिए आई थी. महिला को बेहोशी और कमजोरी महसूस होती थी. महिला मरीज की जांच करवाई गई जिसमें सामने आया कि महिला के पेट में पेनक्रियाज की टेल में गांठ है. अस्पताल में मेडिसिन विभाग की टीम ने दवाओं के जरिए महिला का ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल किया और इसके बाद सर्जिकल विभाग की टीम ने एनेस्थीसिया विभाग के साथ मिलकर यह निर्णय लिया कि महिला का लेप्रोस्कोपी के जरिए ऑपरेशन किया जाए. सर्जिकल विभाग की टीम ने महिला मरीज का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया और अब महिला मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है.
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एंडोस्कोपी से ऑपरेशन भी था चुनौतीपूर्ण : अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे बताते हैं कि अस्पताल में सामान्य सर्जरी विभाग ने महत्वपूर्ण आयाम स्थापित किया है. अभी तक अस्पताल में पेनक्रियाज के ट्यूमर का ओपन ऑपरेशन हुआ करता था. इससे मरीज को रिकवर होने में काफी समय लगता था, लेकिन अब पहली बार लेप्रोस्कोपी के माध्यम से महिला मरीज का सफलतापूर्वक ऑपरेशन हुआ है. महिला मरीज जब आई थी तो काफी गंभीर हालत में थी. जब उसका शुगर लेवल जांचा गया तो महज 40 ही था.
मेडिसिन विभाग की टीम ने कोशिश करके दवाइयों के माध्यम से महिला मरीज का शुगर लेवल नियंत्रित किया. इसके बाद महिला मरीज को एनेस्थीसिया दी गई. लेप्रोस्कोपी से महिला मरीज का ऑपरेशन करना आसान नहीं था, बल्कि बड़ी चुनौती थी. ऑपरेशन के दौरान महिला मरीज का शुगर लेवल गिरने और ब्लड प्रेशर हाई होने का भी बड़ा रिस्क था. महिला मरीज का ऑपरेशन बिल्कुल निशुल्क मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना के तहत किया गया है. प्राइवेट अस्पताल में यदि यह ऑपरेशन किया जाता तो इसका 3 से 4 लाख रुपए खर्च आता.
ऑपरेशन ना होता तो शुगर लेवल कभी नियंत्रण नहीं रह पाता : वरिष्ठ सर्जन डॉ. शिव बुनकर ने बताया कि महिला मरीज मेडिसिन विभाग में भर्ती थी. महिला मरीज की पेनक्रियाज की टेल में ट्यूमर था, जिसके कारण शुगर लेवल काफी गिर जाता था. महिला का ऑपरेशन करना जरूरी था, वरना वह कभी ठीक नहीं हो पाती. सर्जरी विभाग के पास मामला आने के बाद लेप्रोस्कोपी से महिला मरीज का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया.
ओपन सर्जरी से चीरा लंबा लगता है और खून का स्त्राव भी अधिक होता है. बाद में हर्निया बनने के भी अधिक संभावना ऐसे मरीज को रहती है. लेप्रोस्कोपी से फायदा यह हुआ कि कम चीरा लगा और रक्त स्राव भी काम हुआ. डॉ. बुनकर ने बताया कि जयपुर के बाद यह एडवांस डी लेप्रोस्कोपी से पैंक्रियाज में ट्यूमर का ऑपरेशन अजमेर में पहली बार हुआ है. इसमें अस्पताल प्रशासन का भी पूर्ण सहयोग रहा.
ट्यूमर के कारण बनता है काफी इंसुलिन : उन्होंने बताया कि ट्यूमर के कारण महिला मरीज का शुगर लेवल काफी गिर जाता था और ट्यूमर से इंसुलिन भी काफी बनता था. ऐसे में ट्यूमर को निकालना जरूरी था. डॉ बुनकर ने बताया कि तिल्ली और पेनक्रियाज साथ होते हैं. ऐसे ऑपरेशन में तिल्ली को भी निकालना पड़ता है. इस ऑपरेशन की खास बात यह रही की ट्यूमर को एक तरफ करके निकालकर तिल्ली को भी बचा लिया गया.
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