राजस्थान में पंचायतीराज वार्डों की लॉटरी अचानक स्थगित; क्या वजह
राजस्थान में पंचायतीराज वार्डों की लॉटरी अचानक स्थगित; क्या वजह पंचायतीराज विभाग के कार्यक्रम के मुताबिक 17 अगस्त को पंचायत समिति प्रधान, पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों के वार्डों के आरक्षण की लॉटरी होनी थी।…

सौजन्य से:- Hindustan
राजस्थान में पंचायतीराज वार्डों की लॉटरी अचानक स्थगित; क्या वजह
पंचायतीराज विभाग के कार्यक्रम के मुताबिक 17 अगस्त को पंचायत समिति प्रधान, पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों के वार्डों के आरक्षण की लॉटरी होनी थी। इसके अगले दिन यानी 18 अगस्त को सरपंच और वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जानी थी।
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव की तैयारियों के बीच सोमवार को अचानक ऐसा फैसला हुआ, जिसने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। जिन पंचायत समितियों, जिला परिषदों और ग्राम पंचायतों के वार्डों का आरक्षण तय होने वाला था, उसकी लॉटरी अब एक महीने के लिए टाल दी गई है। 17 और 18 अगस्त को होने वाली लॉटरी अब 17 और 18 सितंबर को होगी।
दिलचस्प बात यह है कि लॉटरी स्थगित करने का फैसला तय कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले लिया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर आखिरी समय पर सरकार को ऐसा क्या कारण नजर आया कि पूरी प्रक्रिया को एक महीने आगे बढ़ाना पड़ा?
पहले 17-18 अगस्त को होनी थी लॉटरी
पंचायतीराज विभाग के कार्यक्रम के मुताबिक 17 अगस्त को पंचायत समिति प्रधान, पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों के वार्डों के आरक्षण की लॉटरी होनी थी। इसके अगले दिन यानी 18 अगस्त को सरपंच और वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जानी थी।
अब विभाग ने दोनों तारीखें बदल दी हैं। प्रधान, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के वार्डों की लॉटरी 17 सितंबर को होगी। वहीं सरपंच और वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी 18 सितंबर को निकाली जाएगी।
यानी जिस आरक्षण का फैसला सोमवार और मंगलवार को होना था, उसके लिए अब करीब एक महीने का इंतजार करना पड़ेगा।
सरकार ने बताया यह कारण
पंचायतीराज विभाग के आदेश में लॉटरी टालने के पीछे पंचायतीराज चुनाव शहरी निकाय चुनावों के बाद दूसरे चरण में होने की संभावना का हवाला दिया गया है। विभाग ने हाईकोर्ट के नवंबर तक पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कराने के निर्देश की पालना करने की बात भी कही है।
हालांकि, लॉटरी स्थगित करने का फैसला अचानक होने के कारण इसके पीछे की वजह को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल यह भी है कि अगर चुनाव दूसरे चरण में होने की संभावना पहले से थी, तो लॉटरी की तारीख एक दिन पहले क्यों बदली गई?
ओबीसी आरक्षण भी बना बड़ा मुद्दा
इस पूरे मामले में ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहा विवाद भी अहम माना जा रहा है। शहरी निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं में ओबीसी को 21 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलने को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
शहरी निकायों के प्रमुखों की आरक्षण लॉटरी हो चुकी है। अब वार्डों की लॉटरी भी होने वाली है। दूसरी तरफ पंचायतीराज संस्थाओं में भी ओबीसी आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है।
ऐसे में माना जा रहा है कि अगर पंचायतीराज संस्थाओं के प्रधान, सदस्य, सरपंच और वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी अभी हो जाती, तो आरक्षण का पूरा आंकड़ा सामने आ जाता। विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने के लिए एक और बड़ा मुद्दा मिल सकता था।
विधानसभा सत्र से भी जुड़ रही कड़ी
राजस्थान विधानसभा का सत्र 20 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। ऐसे में लॉटरी स्थगित होने को विधानसभा सत्र से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
विपक्ष पहले ही ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। यदि लॉटरी हो जाती तो अलग-अलग पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों में आरक्षण की स्थिति का पूरा डेटा सामने आ जाता। अब लॉटरी सितंबर तक टलने से यह तस्वीर फिलहाल साफ नहीं होगी।
हालांकि, विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति पहले ही तैयार कर ली है।
डोटासरा-जूली ने सरकार पर उठाए सवाल
लॉटरी स्थगित होने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अचानक लॉटरी टालने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस नेताओं ने इसे चुनाव प्रक्रिया को आगे खिसकाने की कोशिश बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष इसे विधानसभा सत्र में भी जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है।
निर्वाचन आयोग की नजर भी आरक्षण लॉटरी पर
राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी होते ही पंचायतीराज चुनाव की घोषणा की जाएगी।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह के मुताबिक जिला प्रमुख पदों के आरक्षण की लॉटरी 13 अगस्त को हो चुकी है। अब बाकी पदों के आरक्षण की लॉटरी 17 और 18 सितंबर को होगी। इसके रिजल्ट की सूचना मिलते ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।
आयोग के मुताबिक पंचायतीराज चुनाव 15 नवंबर से पहले कराने हैं। यानी लॉटरी भले ही एक महीने टल गई हो, लेकिन चुनाव कराने की समयसीमा अभी भी सामने है।
दूसरी तरफ आज 309 निकायों के वार्डों की लॉटरी
पंचायतीराज की लॉटरी स्थगित होने के बीच सोमवार को प्रदेश के 309 शहरी निकायों के 10,245 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी होगी।
इसमें तय होगा कि किस वार्ड में एससी, एसटी और ओबीसी के लिए सीट आरक्षित होगी। हर वर्ग में 33 प्रतिशत वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे। कुल मिलाकर इस बार शहरी निकायों में 3,356 महिला पार्षदों के चुने जाने का रास्ता साफ होगा।
ओबीसी आरक्षण को लेकर यहां भी विवाद है। 10,245 वार्डों में से 1,933 वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित किए गए हैं। यह कुल वार्डों का करीब 18.86 प्रतिशत है, जबकि ओबीसी नेताओं की मांग 21 प्रतिशत आरक्षण की है।
अब असली सवाल यही है—पंचायतीराज की लॉटरी सिर्फ चुनाव का कार्यक्रम बदलने के कारण टली है या इसके पीछे ओबीसी आरक्षण और विधानसभा सत्र का दबाव भी है? फिलहाल सरकार की ओर से तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। लेकिन सितंबर में होने वाली लॉटरी के साथ राजस्थान की पंचायत राजनीति में आरक्षण का सबसे बड़ा पत्ता खुल जाएगा।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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