स्कूलों में मीडिया की 'नो-एंट्री' विवाद पर राजस्थान के शिक्षा मंत्री का आया गया बयान, बताया क्यों आया आदेश
राजस्थान के शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद इस मुद्दे पर विपक्ष और सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई जा रही है। सरकारी स्कूलों में बाहरी प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक लगाने के आदेश से सियासी बवाल खड़ा के बाद…

सौजन्य से:- Navbharat Times
राजस्थान के शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद इस मुद्दे पर विपक्ष और सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई जा रही है। सरकारी स्कूलों में बाहरी प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक लगाने के आदेश से सियासी बवाल खड़ा के बाद मंत्री मदन दिलावर ने इस पर सफाई दी है।
जयपुर: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में मीडिया के प्रवेश और वीडियो रिकॉर्डिंग पर रोक से जुड़े आदेश की सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों में चर्चा हो रहीी है। विपक्ष और सामाजिक संगठनों के कड़े विरोध के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस मामले पर सफाई दी है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सीजेपी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सरकार के इस कदम को सीधे तौर पर पारदर्शिता पर हमला बताया है।
दिलावर बोले मीडिया पर पाबंदी नहीं
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट किया कि सरकार का मीडिया की स्वतंत्रता पर रोक लगाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में मीडिया के प्रवेश पर पूरी तरह से बैन नहीं लगाया गया है, बल्कि इसे गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट किया है कि सरकार मीडिया की स्वतंत्रता पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि नाबालिग बच्चों की फोटो, वीडियो या बयान सार्वजनिक करने से पहले उनकी सुरक्षा, गरिमा और निजता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
मंत्री ने आगे कहा- बच्चों की निजता से समझौता नहीं
दिलावर ने कहा, 'नाबालिग बच्चों की सुरक्षा और उनकी निजता से समझौता नहीं किया जा सकता। किसी भी व्यक्ति या मीडिया प्रतिनिधि को अचानक स्कूल में घुसकर बच्चों का इंटरव्यू लेने या वीडियो बनाने की इजाजत नहीं होगी। फोटो या बयान रिकॉर्ड करने से पहले अभिभावक या मौके पर मौजूद शिक्षक (संस्था प्रधान) की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।'
आलोचकों का यह है तर्क
दूसरी ओर, इस आदेश को लेकर आलोचकों और मीडिया जगत में सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा संशय यह है कि क्या अनुमति लेने की यह जटिल प्रक्रिया व्यवहार में स्वतंत्र रिपोर्टिंग को प्रभावित नहीं करेगी? आलोचकों का मानना है कि इस अनिवार्यता से सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत और अव्यवस्थाएं सामने लाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में अब पूरा विवाद मीडिया की एंट्री से हटकर, रिपोर्टिंग के लिए 'पूर्व अनुमति' की शर्त पर आकर टिक गया है।
लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।
विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।
पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें
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