निकाय चुनाव में जीत के बावजूद भाजपा में उठे सवाल...जयपुर से दिल्ली तक समीक्षा. आलाकमान ने मांगा मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड
निकाय चुनाव में जीत के बावजूद भाजपा में उठे सवाल...जयपुर से दिल्ली तक समीक्षा. आलाकमान ने मांगा मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड परिणाम के बाद अब मंत्रियों के इलाकों में कमजोर प्रदर्शन पर दिल्ली ने रिपोर्ट तलब की है. Published…

सौजन्य से:- ETV Bharat
निकाय चुनाव में जीत के बावजूद भाजपा में उठे सवाल...जयपुर से दिल्ली तक समीक्षा. आलाकमान ने मांगा मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड
परिणाम के बाद अब मंत्रियों के इलाकों में कमजोर प्रदर्शन पर दिल्ली ने रिपोर्ट तलब की है.
Published : September 18, 2026 at 8:47 PM IST
जयपुर : प्रदेश की नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने सत्ताधारी भाजपा को जीत के साथ संगठनात्मक समीक्षा का मौका भी दे दिया. प्रदेश में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन कई शहरी इलाकों में पार्टी को अपेक्षित जनादेश नहीं मिला. अब पार्टी स्तर पर अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों और संगठन के प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड तैयार किए जाने के संकेत हैं. भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने साफ किया कि कमजोर प्रदर्शन वाले इलाकों की समीक्षा होगी. जरूरत पड़ने पर संबंधित नेताओं को सलाह, चेतावनी या कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. इसकी रिपोर्ट दिल्ली भी भेजी जाएगी. पेश है भाजपा के प्रदर्शन पर खास रिपोर्ट-
जीत के आंकड़ों के बीच कई सवाल: राज्य के 309 नगरीय निकायों में बीजेपी ने 10 में से चार नगर निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल किया. 47 नगर परिषदों में 12 और 252 नगर पालिकाओं में 70 निकायों में पार्टी बहुमत के आंकड़े तक पहुंची. कुल घोषित 10,235 वार्डों में बीजेपी ने 4,179, कांग्रेस ने 3,613 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्ड जीते. कांग्रेस से ज्यादा वार्ड जीतने के बावजूद सवाल है कि सत्ता में होने के बावजूद कई प्रमुख क्षेत्रों में पार्टी को बहुमत के लिए निर्दलीयों और छोटे दलों पर निर्भर क्यों रहना पड़ा?.
गढ़ में कमजोर प्रदर्शन: जयपुर में भाजपा ने 150 में 78 वार्ड जीतकर सामान्य बहुमत हासिल किया. इसे पार्टी के लिए पूर्ण राजनीतिक दबदबे के रूप में नहीं देखा जा सकता. कांग्रेस ने 53 और निर्दलीयों ने 15 सीटें जीतीं. जयपुर में पुनर्मतदान वाले चार वार्ड कांग्रेस के खाते में जाने के बाद भाजपा तो 78 पर टिकी रही, जबकि कांग्रेस का आंकड़ा 57 पहुंच गया. जोधपुर में बीजेपी ने 45 और कांग्रेस ने 44 सीटें जीती. यहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. बीकानेर में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया, जबकि भरतपुर में निर्दलीयों का प्रदर्शन बीजेपी के लिए खासा महत्वपूर्ण रहा. भरतपुर के 65 वार्डों में 36 निर्दलीय, 20 बीजेपी एवं 7 सीटें कांग्रेस ने जीती. उदयपुर, कोटा , भीलवाड़ा को छोड़ दे प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले पाली में कांग्रेस बड़े दल के रूप में उभरी है. अलवर में पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत अच्छा नहीं रहा.
BJP के लिए निकाय चुनाव के आंकड़े
- कुल नगरीय निकाय : 309
- नगर निगम : 10 में से BJP को महज चार में स्पष्ट बहुमत
- नगर परिषद : 47 में से BJP को सिर्फ 12 में स्पष्ट बहुमत
- नगर पालिका : 252 में से BJP को करीब 70 में स्पष्ट बहुमत
- घोषित वार्ड : 10,235
- बीजेपी : 4,179
- कांग्रेस : 3,613
- निर्दलीय : 2,273
यहां ऐसा रहा प्रदर्शन
- जयपुर : BJP 78, कांग्रेस 57
- जोधपुर : BJP 45, कांग्रेस 44
- भरतपुर : निर्दलीय 36, BJP 20, कांग्रेस 7
मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के इलाकों पर नजर : निकाय चुनाव के परिणाम अब केवल स्थानीय बोर्ड गठन तक सीमित नहीं रहेंगे. पार्टी संगठन के स्तर पर भी इनका पोस्टमार्टम की संभावना है. अब पार्टी में यह देखा जाएगा कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी के मंत्री, विधायक या वरिष्ठ नेता प्रभावी भूमिका में हैं, वहां पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहा. खास तौर पर उन इलाकों को समीक्षा में शामिल किया जा सकता है, जहां संगठन के मजबूत होने के बावजूद बीजेपी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली. प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा, जिन मंत्रियों के क्षेत्रों में वार्डों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा है, वहां जनप्रतिनिधियों की भूमिका की समीक्षा होगी. प्रदर्शन के आधार पर कहीं सलाह दी जाएगी. कहीं चेतावनी और जरूरत पड़ी तो कार्रवाई भी की जाएगी. राठौड़ ने स्पष्ट किया कि दिल्ली से रिपोर्ट मांगी गई है. प्रदेश संगठन रिपोर्ट भेजेगा.
झोटवाड़ा से विद्याधर नगर तक अहम क्यों: राजनीतिक विश्लेषक विवेकानंद शर्मा ने कहा कि जयपुर जैसे भाजपा के मजबूत क्षेत्र में भी पार्टी को सभी वार्डों में एकतरफा सफलता नहीं मिली. झोटवाड़ा, विद्याधर नगर समेत राजधानी के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के प्रदर्शन की तुलना संगठन की अपेक्षाओं से की जाएगी. इसमें केवल जीते और हारे वार्डों का हिसाब नहीं होगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि किस वार्ड में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ बगावत हुई, कहां निर्दलीय मजबूत हुआ, किन बूथों पर पार्टी का पारंपरिक वोट ट्रांसफर नहीं हुआ और कहां स्थानीय स्तर पर संगठन कमजोर रहा. उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में निर्दलीयों का 2,273 वार्ड जीतना बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए अहम संकेत है. कई निकायों में निर्दलीय अब बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका में हैं. यही वजह है कि चुनाव के बाद दोनों प्रमुख दल निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुटे हैं.
पढ़ें:जोधपुर में भाजपा के साथ आए 7 निर्दलीय, महापौर की तैयारी, बूंदी में कांग्रेस 22 और बीजेपी 33 पर
बड़े नेताओं के गढ़ में मिलाजुला परिणाम : निकाय चुनाव नतीजों ने बड़े नेताओं के प्रभाव वाले इलाकों में अलग-अलग तस्वीर पेश की. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में निर्दलीयों ने 36 वार्ड जीतकर बीजेपी से ज्यादा सीटें हासिल कीं. यह परिणाम संगठनात्मक दृष्टि से समीक्षा का विषय बन सकता है. प्रदेशाध्यक्ष राठौड़ के गृह क्षेत्र पाली में कांग्रेस को 29, बीजेपी को 21 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं. पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने 45 में से 29 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी 13 पर रही. हालांकि इसी जिले के झालरापाटन नगरपालिका में बीजेपी ने स्पष्ट बढ़त हासिल किया, जहां से राजे विधायक हैं. जोधपुर नगर निगम में भाजपा कांग्रेस से महज एक सीट ज्यादा यानी 45 वार्ड में विजयी हुई. यहां भी निर्दलीयों के सहारे की जरूरत पड़ेगी. बीकानेर निगम में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत हासिल किया. ऐसे परिणाम पार्टी के लिए स्थानीय संगठन, प्रत्याशी चयन और चुनावी प्रबंधन की अलग-अलग स्तर पर समीक्षा का आधार बनेंगे.
टिकट से भीतरघात तक खंगाली जाएगी जानकारी: बीजेपी ने चुनाव में मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश संगठन और मंत्रियों तक पूरी ताकत झोंकी थी. मुख्यमंत्री ने कई शहरों में रोड शो और सभाएं कीं, जबकि प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने भी प्रचार किया. जिन क्षेत्रों में पार्टी कमजोर रही, वहां केवल प्रत्याशी की हार नहीं बल्कि पूरी चुनावी मशीनरी की समीक्षा का सवाल खड़ा होता है. अध्यक्ष राठौड़ के बयान से साफ है कि समीक्षा में प्रत्याशी चयन, स्थानीय संगठन की सक्रियता, बूथ मैनेजमेंट, बागियों की भूमिका, स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल और जनप्रतिनिधियों की चुनावी सक्रियता जैसे बिंदु शामिल किए जा सकते हैं.
2028 से पहले संगठन के लिए फीडबैक :विश्लेषक विवेकानंद शर्मा कहते हैं कि निकाय चुनाव को विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के जमीनी नेटवर्क की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी ने कुल वार्डों में कांग्रेस से ज्यादा सीटें हासिल की, लेकिन स्पष्ट बहुमत वाले निकायों की संख्या और कई प्रमुख शहरों के नतीजे पार्टी के सामने स्थानीय स्तर की चुनौतियां रखते हैं. अब पार्टी के सामने दोहरी चुनौती है. एक तरफ निर्दलीयों को साधकर अधिकाधिक निकायों में बोर्ड बनाना तो दूसरी तरफ संगठन को पता लगाना होगा कि जिन जगह पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा, वहां क्या कमी रही. यही वजह है कि निकाय चुनाव का परिणाम बीजेपी के लिए केवल जीत का आंकड़ा नहीं, बल्कि आगामी चुनाव से पहले संगठन के जमीनी प्रदर्शन का फीडबैक भी बन सकता है.
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