अधर में लटका गांधी सागर परियोजना का काम, राजस्थान की आपत्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
अधर में लटका गांधी सागर परियोजना का काम, राजस्थान की आपत्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला मंदसौर में गांधी सागर परियोजना का बंद हुआ काम, जमीन पर राजस्थान वन विभाग ने जताया हक, विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला.…

सौजन्य से:- ETV Bharat
अधर में लटका गांधी सागर परियोजना का काम, राजस्थान की आपत्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
मंदसौर में गांधी सागर परियोजना का बंद हुआ काम, जमीन पर राजस्थान वन विभाग ने जताया हक, विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला.
By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 2, 2026 at 2:10 PM IST
मंदसौर: मालवा इलाके के दो जिलों के लिए करोड़ों रुपए की लागत से बनी गांधी सागर पेयजल योजना अब मध्य प्रदेश और राजस्थान की सरकारों के बीच चल रहे जमीनी विवाद के कारण अधर में लटक गई है. गांधी सागर झील के पानी को लिफ्ट कर मंदसौर और नीमच जिले के घर-घर सप्लाई किए जाने वाली इस जरूरी योजना में मध्य प्रदेश सरकार ने एक निजी कंपनी को सोलर प्लांट लगाकर, सोलर मोटरो से जोड़ा है. ताकि हाइडल बिजली के अभाव में सोलर पंपों से लोगों को रेगुलर पानी की सप्लाई दी जा सके, लेकिन सरकार ने इस प्रोजेक्ट की जिस निजी कंपनी को बिजली उत्पादन के लिए संयंत्र स्थापित करने के लिए जमीन आवंटित की है, उस पर अब राजस्थान सरकार ने आपत्ति खड़ी कर दी है. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है और स्टे होने से यह योजना खटाई में पड़ गई है.
राजस्थान की आपत्ति के बाद अटका काम
मानव निर्मित झील गांधी सागर के पानी को मंदसौर और नीमच जिलों में सप्लाई करने के लिए, करोड़ों रुपए की लागत से बनी गांधी सागर पेयजल स्कीम राजस्थान सरकार के वन अमले की आपत्ति के कारण अब अधर लटक गई है. इस झील के पानी को दोनों जिलों में अलग-अलग सप्लाई देने के लिए सरकार ने गांधी सागर नंबर वन में छेमल और मंदसौर जिले के लिए एलबी महादेव सर्कल में दो पॉइंट बनाकर कंपनियों को इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का ठेका दिया है.
वन विभाग की जमान का हवाला देकर रोका काम
पेयजल सप्लाई का बड़ा प्रोजेक्ट होने के कारण सरकार ने इस स्कीम को हाइडल बिजली पावर के अलावा सोलर बिजली उत्पादन से भी जोड़ते हुए रेगुलर पानी की सप्लाई के लिए जोड़ा है, ताकि पानी की रोजाना सप्लाई दी जा सके. इस स्कीम में मंदसौर जिले में सरकार ने नामी कंपनी को सुवासरा के ग्राम रामनगर और धनवाड़ा में 130 हेक्टेयर जमीन सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन की इकाई स्थापित करने के लिए दी है. 1 अगस्त 2025 को आवंटित की गई इस जमीन पर कंपनी ने अब बाउंड्री वॉल और पैनल के फाउंडेशन का काम चालू कर दिया है, लेकिन मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर स्थित इन दोनों गांव की जमीन पर अब राजस्थान सरकार के वन विभाग ने रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन का हवाला देकर कानूनी दावा ठोक दिया है.
बंद हुआ गांधी सागर का काम, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
झालावाड़ के डग रिजर्व फॉरेस्ट के अमले ने शनिवार को कंपनी के सोलर प्लांट का काम रूकवाते हुए ऑफिस कार्यालय पर कोर्ट के नोटिस चस्पा कर दिए हैं. राजस्थान की एक निजी एनजीओ कंपनी और वन विभाग ने इस जमीन को सुरक्षित क्षेत्र की जमीन बताकर सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है. कोर्ट के आदेश के अनुसार अब कंपनी ने भी डेवलपमेंट का काम बंद कर दिया है. इस मामले में नामी कंपनी के क्षेत्रीय मैनेजर सुनील तोमर ने बताया कि "शासन की स्वीकृति के बाद प्रशासन ने राजस्व अमले की मौजूदगी में साल भर पहले जमीन आवंटित कर प्लांट लगाने की मंजूरी दी है.
400 करोड़ से बनेगा प्लांट, 100 मेगावाट बिजली उत्पादन
लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस प्लांट से 100 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा. जिससे मोटरों के जरिए रोजाना पेयजल सप्लाई होगी. मध्य प्रदेश जल निगम की इस योजना को दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना है, लेकिन राजस्थान सरकार के वन विभाग ने इस पर आपत्ति खड़ी कर दी है. इस कारण यह योजना अब समय पर पूरी नहीं हो सकेगी. उधर उन्होंने बताया कि इस स्कीम में जमीन अधिग्रहण के टाइम पर ही राजस्व के अधिकारियों ने उन्हें 1903 और 1938 के बंदोबस्त के मुताबिक जमीनी नक्शे उपलब्ध करवाए थे, जो वर्तमान में भी एमपी राज्य की सीमा में है.
राजस्थान बोला-दस्तावेज मौजूद, जमीन हमारी
उन्होंने बताया कि इसी लिहाज से कंपनी ने यहां करोड़ों रुपए का निवेश किया है. उधर शनिवार दोपहर बाद राजस्थान के वन अमले ने मौके पर पहुंचकर डेवलपमेंट काम को तत्काल बंद करवा दिया. रेंजर ने कंपनी के ऑफिस पर कोर्ट के नोटिस चस्पा करते हुए जमीन राजस्थान के रिज़र्व फॉरेस्ट होने का दावा किया है." इस मामले में डग रिजर्व फॉरेस्ट के भु- गुआ परिक्षेत्र रेंजर बलराम गौचर ने बताया कि "यह जमीन राजस्थान राज्य की होकर ग्राम सिंहपुर स्थित 1650 हेक्टेयर रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन है. इसके कानूनी दस्तावेज भी सरकार और वन विभाग के पास मौजूद है. मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण काम रुकवाया गया है.
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सरपंच ने भी जमीन पर किया दावा
उधर इस मामले में जल निगम के क्षेत्रीय अधिकारी अली असगर ने बताया कि "निगम ने पूरी जांच और प्रशासन की मंजूरी के बाद ही प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, लेकिन राजस्थान वन अमले के काम रुकवाने के बाद में जब वे असल दस्तावेज लेकर मौके पर पहुंचे तो वन अमले ने इसे खारिज करते हुए काम रुकवा दिया है." दोनों राज्यों की सीमा पर स्थित इस जमीन के मामले में राजस्थान के सिंहपुर ग्राम के सरपंच राहुल सिंह ने भी इस जमीन को उनके गांव की जमीन होने का दावा किया है.
दोनों राज्यों की सीमा पर स्थित इस जमीन के अब कानूनी विवाद में पड़ने से गांधी सागर पेयजल योजना से जुड़े इस बड़े प्रोजेक्ट के कारण यह स्कीम भी अधर में लटक गई है. मामला कोर्ट में विचाराधीन होने से अब फैसले के बाद ही इस पर काम आगे बढ़ने की उम्मीद जगेगी.
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