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जयपुर में स्कून्यूज ग्लोबल एड फेस्ट का आगाज, दिव्यांग समावेशन पर मंथन, आमिर हुसैन लोन के क्रिकेट ने जीता दिल

जयपुर में स्कून्यूज ग्लोबल एड फेस्ट का आगाज, दिव्यांग समावेशन पर मंथन, आमिर हुसैन लोन के क्रिकेट ने जीता दिल राजधानी में शुक्रवार को आयोजित डिसेबिलिटी इंक्लूजन में शिक्षा व्यवस्था में दिव्यांगों के नजरिए से अहम सुझाव दिए…

ETV Bharat के अनुसार7 अगस्त 2026 को 04:15 pm बजे
जयपुर में स्कून्यूज ग्लोबल एड फेस्ट का आगाज, दिव्यांग समावेशन पर मंथन, आमिर हुसैन लोन के क्रिकेट ने जीता दिल

सौजन्य से:- ETV Bharat

जयपुर में स्कून्यूज ग्लोबल एड फेस्ट का आगाज, दिव्यांग समावेशन पर मंथन, आमिर हुसैन लोन के क्रिकेट ने जीता दिल

राजधानी में शुक्रवार को आयोजित डिसेबिलिटी इंक्लूजन में शिक्षा व्यवस्था में दिव्यांगों के नजरिए से अहम सुझाव दिए गए.

Published : August 7, 2026 at 9:01 PM IST

जयपुर: राजधानी में भारत के सबसे बड़े एजुकेशन फेस्टिवल्स में शामिल 'स्कून्यूज ग्लोबल एड फेस्ट' के 10वें संस्करण का आगाज हुआ. दो दिवसीय आयोजन में शिक्षा व्यवस्था में दिव्यांगजनों के समावेशन को प्रमुख विषय बनाया गया है. होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित फेस्ट में भारत और विदेश से 500 से अधिक शिक्षक, प्राचार्य, स्कूल लीडर्स, शिक्षाविद और विचारक शामिल हो रहे हैं. इस दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि दिव्यांग समावेशन दया या किसी पर उपकार का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए.

'एबल एजुकेशन समिट' बना फेस्ट का प्रमुख आकर्षण: इस साल स्कून्यूज ग्लोबल ए़ंड फेस्ट का केंद्र 'एबल एजुकेशन समिट' है. समिट की थीम 'वन वर्ड. फोर लेटर्स. एवरीथिंग: नॉट डिसेबल्ड. नॉट डिफ्रैंटली एबल्ड. सिम्पली-एबल' रखी गई है. इसका मकसद दिव्यांग बच्चों के लिए सिर्फ अलग से सुविधाएं उपलब्ध कराने के बजाय स्कूलों, कक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को शुरुआत से ही सभी बच्चों के लिए समावेशी बनाने पर जोर देना है. स्कून्यूज के संस्थापक और सीईओ रवि संतलानी ने कहा कि आयोजन का मकसद केवल समावेशन पर चर्चा करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की दिशा में काम करना है, जहां किसी बच्चे को कक्षा में शामिल होने का अधिकार साबित करने की जरूरत ही न पड़े. कक्षा और शिक्षा व्यवस्था पहले से ही सभी बच्चों के लिए तैयार होनी चाहिए.

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लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ बोले-देश को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी गुरुओं पर: फेस्ट के उद्घाटन समारोह में उदयपुर के हाउस ऑफ मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने मुख्य वक्तव्य दिया. उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी शिक्षकों और गुरुओं के कंधों पर है. गुरु आने वाली पीढ़ी को सही दिशा और बेहतर भविष्य का मार्ग दिखाते हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर तेजी से बदलाव का है और वही व्यक्ति आगे बढ़ता है, जो स्वयं बदलने का साहस रखता है. उनके अनुसार ज्ञान ऐसा धन है, जिसे बांटने से वह कम नहीं होता, बल्कि लगातार बढ़ता है.

'बौद्धिक रूप से अक्षम मान लिया था': लक्ष्यराज सिंह ने अपने बचपन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें डिस्लेक्सिया डिटेक्ट किया गया था और एक समय डॉक्टरों ने उन्हें बौद्धिक रूप से अक्षम मान लिया था. इसके बावजूद उन्होंने परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और पीएचडी तक शिक्षा पूरी की. सामाजिक सेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उनके कार्यों के लिए उन्हें 10 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिलने की जानकारी भी कार्यक्रम में साझा की गई. उन्होंने सोशल मीडिया और तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर भी विचार रखे. उनका कहना था कि तकनीक आज जरूरत बन चुकी है, लेकिन यह जरूरी है कि डिजिटल दुनिया मानवीय संवेदनाओं, सादगी और मूल्यों पर हावी न हो.

'विलिंगनेस प्रोजेक्ट' के तहत दिव्यांगों को मिले कृत्रिम हाथ: उद्घाटन सत्र के दौरान स्कून्यूज ने सिम्बायोनिक के सहयोग से 'विलिंगनेस प्रोजेक्ट' की शुरुआत की. इसके तहत ऊपरी अंगों से दिव्यांग 10 लोगों को मंच पर अनुकूलित कृत्रिम हाथ प्रदान किए गए. इस पहल को दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर प्रस्तुत किया गया. इंडिया इंक्लूजन फाउंडेशन के संस्थापक फेरोस वीआर ने वीडियो संदेश के जरिए कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि केवल एक समावेशन सम्मेलन से बदलाव नहीं आ सकता. वास्तविक परिवर्तन के लिए लोगों की सोच और मानसिकता में बदलाव जरूरी है.

आमिर हुसैन लोन ने पैरों से गेंदबाजी और कंधे-गर्दन से की बल्लेबाजी: फेस्ट का सबसे खास आकर्षण फ्रेंडली क्रिकेट मैच लेग्स, हार्ट एंड सिक्सेस रहा. जम्मू-कश्मीर के पैरा क्रिकेटर आमिर हुसैन लोन ने अपने अनोखे अंदाज में क्रिकेट खेलकर दर्शकों को प्रभावित किया. आमिर अपने पैरों की उंगलियों से गेंदबाजी करते हैं और कंधे तथा गर्दन की सहायता से बल्लेबाजी करते हैं. मैच में युवा दृष्टिबाधित प्रथमेश ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. उनके साथ लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और रवि संतलानी ने भी मैदान पर उतरकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया. मैच ने दृढ़ इच्छाशक्ति, समावेशिता और खेल भावना का संदेश दिया.

पद्मश्री जावेद अहमद टाक ने सुनाई 'बुलेट टू ब्लूप्रिंट' की कहानी: कार्यक्रम में पद्मश्री जावेद अहमद टाक ने 'फ्रॉम बुलेट टू ब्लूप्रिंट' सत्र में अपनी जीवन यात्रा साझा की. उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी तरह की सेवा नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है. उनके अनुसार हर बच्चे में असीम संभावनाएं होती हैं और समाज की जिम्मेदारी है कि उसे आगे बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल और अवसर उपलब्ध कराए. उन्होंने कहा कि यदि देश को 100 प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्य तक पहुंचना है तो ऐसे स्कूल और वातावरण तैयार करने होंगे, जहां हर बच्चा अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सके.

प्रियंका अग्रवाल और प्रतिष्ठा देवेश्वर समेत कई प्रेरक हस्तियां शामिल: फेस्ट में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी प्रेरक हस्तियों ने भी अपने अनुभव साझा किए. इनमें एवरेस्ट बेस कैंप तक ट्रेक करने वाली भारत की दूसरी दृष्टिबाधित महिला प्रियंका अग्रवाल और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययन करने वाली भारत की पहली व्हीलचेयर उपयोगकर्ता प्रतिष्ठा देवेश्वर शामिल रहीं. कार्यक्रम में विभिन्न सत्रों के जरिए शिक्षा, मित्रता, दिव्यांगता, क्षमता और समावेशन जैसे विषयों पर चर्चा हुई. कार्यक्रम की शुरुआत संगीत प्रस्तुति और पैरा तैराक और नृत्य कलाकार विश्वास केएस की प्रस्तुति से हुई. इसके बाद कई संवाद और मुख्य वक्तव्य सत्र आयोजित किए गए.

दिव्यांग प्रतिभागियों ने निभाई आयोजन में अहम जिम्मेदारी: समिट की खास बात यह रही कि दिव्यांगजनों को केवल कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनाया गया, बल्कि उन्हें आयोजन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी दी गईं. दिव्यांग प्रतिभागियों ने फोटोग्राफर और मंच संचालक जैसी भूमिकाएं निभाईं. इससे कार्यक्रम में समावेशन की अवधारणा को व्यवहार में लागू करने का संदेश दिया गया. शाम को स्कून्यूज मेमोरियल अवॉर्ड्स 2026 का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों और शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया. विभिन्न श्रेणियों में शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व, सुधार, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद योगदान, मूल्यों पर आधारित शिक्षा और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने जैसे कार्यों के लिए सम्मान दिए गए.

रितु बेरी के निर्देशन में समावेशी फैशन शो: पहले दिन का समापन प्रसिद्ध डिजाइनर रितु बेरी द्वारा तैयार किए गए समावेशी फैशन शो के साथ हुआ. इसमें दिव्यांग प्रतिभागियों ने व्हीलचेयर और सफेद छड़ी के साथ रैंप वॉक किया. उनके साथ स्कूल लीडर्स भी रैंप पर नजर आए. फैशन शो में राजस्थान की हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित किया गया. बाड़मेर और जैसलमेर के लंगा-मांगणियार कलाकारों ने लाइव प्रस्तुतियां दीं.

दूसरे दिन 'एबल फ्रेमवर्क' का होगा अनावरण: फेस्ट के दूसरे दिन यानी 8 अगस्त को 'एबल फ्रेमवर्क' का अनावरण किया जाएगा. यह स्कूलों के लिए एक व्यावहारिक रूपरेखा होगी, जिसका उद्देश्य रोजमर्रा की शैक्षणिक व्यवस्थाओं में समावेशन को लागू करने में मदद करना है. दूसरे दिन शिक्षा और दिव्यांग समावेशन से जुड़े कई विषयों पर सत्र आयोजित होंगे, जिनमें भारतीय स्कूलों में समावेशन, कानून और नीति, दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के अनुभव और बधिर विद्यार्थियों के लिए कक्षाओं में आने वाली चुनौतियों जैसे विषय शामिल हैं. फेस्ट का समापन ग्लोबल एजुकेशन अवॉर्ड्स 2026 के साथ होगा, जिसमें शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने वाले स्कूलों और शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा. जयपुर में आयोजित यह फेस्ट शिक्षा जगत के लिए केवल एक सम्मेलन के रूप में नहीं, बल्कि दिव्यांग समावेशन को व्यवहार में उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया. आयोजन से यह संदेश दिया गया कि सही अवसर, सहयोग और अनुकूल वातावरण मिलने पर हर व्यक्ति अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर सकता है और समाज में प्रभावी भूमिका निभा सकता है.

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