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'राजस्थान कांग्रेस राम भरोसे…कोई धणी-धोरी नहीं': विश्वेंद्र सिंह ने फिर खोला नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा; उठे सवाल

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Amar Ujala के अनुसार9 अक्टूबर 2026 को 11:05 am बजे
'राजस्थान कांग्रेस राम भरोसे…कोई धणी-धोरी नहीं': विश्वेंद्र सिंह ने फिर खोला नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा; उठे सवाल

सौजन्य से:- Amar Ujala

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'राजस्थान कांग्रेस राम भरोसे…कोई धणी-धोरी नहीं': विश्वेंद्र सिंह ने फिर खोला नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा; उठे सवाल

Fri, 09 Oct 2026 03:17 PM IST

हिमांशु सिंह बघेल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

Published by: हिमांशु सिंह बघेल

Updated Fri, 09 Oct 2026 03:17 PM IST

सार

राजस्थान कांग्रेस में संगठन की कार्यशैली को लेकर पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने एक बार फिर प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर साझा पत्र में उन्होंने वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी, युवाओं को मार्गदर्शन नहीं मिलने और कार्यकर्ताओं में निराशा का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्वाभिमान से समझौता नहीं करने और कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहने की बात कही।

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विस्तार

राजस्थान के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा कर अपनी ही पार्टी के प्रदेश नेतृत्व और संगठन की कार्यशैली पर फिर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि 60 वर्ष तक देश पर शासन करने वाली पार्टी की आज राजस्थान में कोई धणी-धोरी नहीं बची है और संगठन पूरी तरह राम भरोसे चल रहा है। प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं के भीतर निराशा का भाव व्याप्त है। वहीं, राजनीतिक हलकों में विश्वेंद्र सिंह की नाराजगी को भरतपुर-धौलपुर-डीग जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक एवं किसान नेता नेमसिंह फौजदार की कांग्रेस में वापसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रदेश नेतृत्व पर तीखा हमला

पूर्व मंत्री ने प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि नेता जिस डाल पर बैठते हैं, उसी को काटने में लगे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में वरिष्ठ नेताओं के लंबे अनुभव और सम्मान की लगातार अनदेखी हो रही है। पार्टी में युवाओं को सही मार्गदर्शन देने वाला कोई नहीं है और नारी शक्ति को आगे बढ़ाने के संबंध में भी कोई स्पष्ट सोच दिखाई नहीं देती। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से अहम और वहम की राजनीति पूरी तरह छोड़कर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की जोरदार अपील की।

स्वाभिमान से समझौता नहीं करने की घोषणा

अपने लंबे राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि विधायक, सांसद और मंत्री के रूप में मिली सभी जिम्मेदारियों को उन्होंने हमेशा ईमानदारी तथा निष्ठा से निभाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी स्थिति में चापलूसी नहीं करेंगे और हमेशा अपने सिद्धांतों पर कायम रहेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें वफादारी की भारी कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने स्वाभिमान से कभी कोई समझौता नहीं किया। सिद्धांतों से समझौता किए बिना वे लगातार जनता की आवाज उठाते रहेंगे।

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ये भी पढ़ें- राजस्थान: अक्तूबर में भी तप रही धौरों की धरती, अब मौसम विभाग के इस अनुमान ने बढ़ाई हलचल

कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा खुले दरवाजे

विश्वेंद्र सिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन को एक खुली किताब बताते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं के लिए उनके घर और दिल के दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे। स्वाभिमानी लोगों का पार्टी में दम घुट रहा है और संगठन के पुनरुद्धार के लिए नेतृत्व को गंभीर आत्ममंथन करना होगा। सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निष्ठा बनाए रखना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे आम कार्यकर्ताओं और समर्थकों के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहेंगे तथा उनके सम्मान की रक्षा के लिए काम करते रहेंगे।

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प्रदेश नेतृत्व पर तीखा हमला

पूर्व मंत्री ने प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि नेता जिस डाल पर बैठते हैं, उसी को काटने में लगे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में वरिष्ठ नेताओं के लंबे अनुभव और सम्मान की लगातार अनदेखी हो रही है। पार्टी में युवाओं को सही मार्गदर्शन देने वाला कोई नहीं है और नारी शक्ति को आगे बढ़ाने के संबंध में भी कोई स्पष्ट सोच दिखाई नहीं देती। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से अहम और वहम की राजनीति पूरी तरह छोड़कर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की जोरदार अपील की।

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स्वाभिमान से समझौता नहीं करने की घोषणा

अपने लंबे राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि विधायक, सांसद और मंत्री के रूप में मिली सभी जिम्मेदारियों को उन्होंने हमेशा ईमानदारी तथा निष्ठा से निभाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी स्थिति में चापलूसी नहीं करेंगे और हमेशा अपने सिद्धांतों पर कायम रहेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें वफादारी की भारी कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने स्वाभिमान से कभी कोई समझौता नहीं किया। सिद्धांतों से समझौता किए बिना वे लगातार जनता की आवाज उठाते रहेंगे।

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कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा खुले दरवाजे

विश्वेंद्र सिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन को एक खुली किताब बताते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं के लिए उनके घर और दिल के दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे। स्वाभिमानी लोगों का पार्टी में दम घुट रहा है और संगठन के पुनरुद्धार के लिए नेतृत्व को गंभीर आत्ममंथन करना होगा। सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निष्ठा बनाए रखना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे आम कार्यकर्ताओं और समर्थकों के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहेंगे तथा उनके सम्मान की रक्षा के लिए काम करते रहेंगे।

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