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जयपुर में भी हादसों को दावत देने वाली इमारतों की भरमार, हालत जर्जर

जयपुर में भी हादसों को दावत देने वाली इमारतों की भरमार, हालत जर्जर दिल्ली के बाद अब जयपुर के गोपालपुरा के हॉस्टल में रहे बच्चों की जान जोखिम हैं. संकरी गलियों और ऊंची इमारतों में छात्र बदतर हालातों में रह रहे हैं. राजधान…

ABP News के अनुसार7 सितंबर 2026 को 04:33 pm बजे
जयपुर में भी हादसों को दावत देने वाली इमारतों की भरमार, हालत जर्जर

सौजन्य से:- ABP News

जयपुर में भी हादसों को दावत देने वाली इमारतों की भरमार, हालत जर्जर

दिल्ली के बाद अब जयपुर के गोपालपुरा के हॉस्टल में रहे बच्चों की जान जोखिम हैं. संकरी गलियों और ऊंची इमारतों में छात्र बदतर हालातों में रह रहे हैं.

राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी गिरने की घटना के बाद अब जयपुर के हॉस्टल की बिल्डिंग्स भी सवालों के घेरे में हैं. संकरी गलियों में घनी आबादी के बीच कई मंजिला ऊंची बिल्डिंग्स में हॉस्टल अकेले नई दिल्ली में ही नहीं चल रहे हैं, बल्कि पिंक सिटी कहीं जाने वाली राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी मौत और हादसों को दावत देने वाली ऐसी इमारतों की भरमार है.

यहां बेहद संकरी ऐसी गलियों में छह से सात मंजिला बिल्डिंग्स बनाकर उनमें स्टूडेंट्स को ठहराया जा रहा है, जिसमें दो बाइक भी मुश्किल से जा सकती हैं. फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की छोटी गाड़ियां भी जरूरत पड़ने पर इनमें नहीं जा सकती हैं.

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जयपुर के कोचिंग हब गोपालपुरा में भी हैं बदतर हालात

जयपुर के गोपालपुरा इलाके को कोचिंग सेंटर्स का हब कहा जाता है. अनुमान के मुताबिक यहां करीब ढाई लाख स्टूडेंट पढ़ाई करते हैं. इनमें से कुछ जयपुर के हैं, जबकि ज्यादातर देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं. यह बच्चे यहां जिन हालात में रहकर पढ़ाई करते हैं, उनकी तस्वीरें देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं.

गोपालपुरा की गलियों में अवैध तरीके से 6 से 7 मंजिला बिल्डिंग्स बनाकर उनमें छात्रों को ठहराया जा रहा है. इक्का दुक्का छोड़कर कहीं भी ना तो आग बुझाने के उपकरण है और ना ही हवा व रोशनी के इंतजाम. कई इमारतों के प्लास्टर उखड़ चुके हैं. छत और बिल्डिंग के दूसरे हिस्से जर्जर हालत में दिखाई देते हैं. कई कमरे तो स्टोर रूम से भी छोटे हैं. छात्र रूम में ही गैस सिलेंडर रखकर किचन भी चलाते हैं.

मजबूरी में रहने पर मजबूर छात्र

स्टूडेंट्स खुद मानते हैं कि ऐसी जगह पर रहकर वह मन से पढ़ाई नहीं कर पाते, लेकिन मजबूरी में उन्हें रहना पड़ता है, क्योंकि आर्थिक तंगी के चलते ज्यादा पैसे खर्च नहीं कर सकते. छात्रों का कहना है कि उन्हें डर भी लगता है लेकिन वह कुछ कर नहीं सकते.

छात्र बस सरकार से इस बात की गुजारिश कर रहे हैं कि वह व्यवस्थाओं को ठीक करे. गलियों में रहने वाले लोग भी अपने अगल-बगल ऊंची ऊंची बिल्डिंग को लेकर परेशान नजर आते हैं. उन्हें लगता है कि कभी भी उनके साथ कोई हादसा हो सकता है.

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