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उदयपुर में अरावली पर सुनवाई को उमड़ी भीड़, सभागार पड़ा छोटा...दो घंटे में आधे भी नहीं रख पाए अपनी बात

उदयपुर में अरावली पर सुनवाई को उमड़ी भीड़, सभागार पड़ा छोटा...दो घंटे में आधे भी नहीं रख पाए अपनी बात अरावली बचाने को लेकर चिंतित लोगों ने सुनवाई के लिए कम समय रखने पर जताई आपत्ति. Published : August 10, 2026 at 5:48 PM…

ETV Bharat के अनुसार10 अगस्त 2026 को 01:15 pm बजे
उदयपुर में अरावली पर सुनवाई को उमड़ी भीड़, सभागार पड़ा छोटा...दो घंटे में आधे भी नहीं रख पाए अपनी बात

सौजन्य से:- ETV Bharat

उदयपुर में अरावली पर सुनवाई को उमड़ी भीड़, सभागार पड़ा छोटा...दो घंटे में आधे भी नहीं रख पाए अपनी बात

अरावली बचाने को लेकर चिंतित लोगों ने सुनवाई के लिए कम समय रखने पर जताई आपत्ति.

Published : August 10, 2026 at 5:48 PM IST

उदयपुर: सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाईलेवल कमेटी ने सोमवार को यहां अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर पर्यावरणप्रेमियों, शोधार्थियों, आदिवासी प्रतिनिधियों और खनन व्यवसाय से जुड़े लोगों के साथ करीब दो घंटे चर्चा की. अरावली को लेकर उनकी समस्याएं एवं शंकाएं सुनी. जनसुनवाई के दौरान अरावली को लेकर चिंतित लोगों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि सभागार में जगह कम पड़ गई. सभागार के बाहर तंबू के नीचे भी भीड़ रही, जबकि कई लोग पोर्च में खड़े होकर बैठक की कार्यवाही का इंतजार करते रहे.

कमेटी ने लोगों की राय जानने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन बड़ी संख्या में मौजूद लोगों के कारण आधे से ज्यादा लोग अपनी बात कमेटी के सामने नहीं रख सके. बैठक समाप्त होने पर कई लोगों ने इसका विरोध किया. उनका कहना था कि अरावली जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर इतनी कम अवधि में सभी पक्षों को सुनना संभव नहीं है.पर्यावरणविद् डॉ. अनिल मेहता ने कहा, उदयपुर की पहचान ही अरावली की पहाड़ियों से है. माइनिंग और रियल एस्टेट के लिए अलग-अलग परिभाषाएं बनाने के बजाय एक समान नीति लागू की जानी चाहिए. राजसमंद से बैठक में पहुंचे पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल ने अवैध खनन पर रोक लगाने की बात कही. उन्होंने कहा, यदि समय रहते अरावली और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दिया जाता तो सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं पड़ती.

प्रभावी नीति की दरकार: पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने अरावली बचाने के लिए सख्त नियम और प्रभावी संरक्षण नीति बनाने की मांग रखी. खनन व्यवसाय से जुड़े उद्यमियों ने भी अरावली संरक्षण को जरूरी बताया एवं कहा कि खनिज संसाधनों के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाने से देश के उद्योग और विकास पर असर पड़ सकता है. उन्होंने संरक्षण और खनन के बीच संतुलन बनाने वाली नीति की जरूरत बताई.

मौका नहीं मिलने पर नाराजगी: बैठक में बोलने का मौका नहीं मिलने से खफा शोधार्थी निशाकर डामोर ने कहा, अरावली बेहद संवेदनशील विषय है. इतने कम समय में इस पर पूरी चर्चा कैसे हो सकती है. अरावली का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में है. इसके बावजूद बैठक समाप्त कर दी गई. वहीं पर्यावरण एक्सपर्ट सुनील दूबे ने अरावली कमीशन के गठन और संरक्षण की ठोस योजना बनाने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा, अरावली में कई प्रजातियों का निवास है, इसलिए संरक्षण की योजना बनाते समय उनके भविष्य को भी ध्यान में रखना होगा. मानगढ़ धाम से आए आदिवासी प्रतिनिधि ने पहाड़ियों को बचाने की मांग की एवं कहा, उनकी मांगें लंबे समय से सरकार के सामने हैं, लेकिन अब तक उन पर सुनवाई नहीं हुई.

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