आसाराम को राहत नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने से किया इनकार, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब
आसाराम को राहत नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने से किया इनकार, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब Praveen Mishra 30 Jun 2026 2:23 PM IST सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू की उस याचिका प…

सौजन्य से:- Live Law Hindi
आसाराम को राहत नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने से किया इनकार, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब
Praveen Mishra
30 Jun 2026 2:23 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू की उस याचिका पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने 2013 के दुष्कर्म मामले में अपनी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने वाले राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल उनकी सजा पर रोक (सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस) लगाने से इनकार कर दिया।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि केवल गंभीर स्वास्थ्य संकट या जीवन को खतरा होने जैसी स्थिति में ही जमानत या सजा पर रोक के अनुरोध पर विचार किया जाएगा। पीठ ने जेल प्रशासन को आसाराम को मिल रही चिकित्सा सुविधाएं जारी रखने का निर्देश भी दिया।
आसाराम की ओर से सीनियर एडवोकेट डी. सेशाद्रि नायडू ने दलील दी कि वह 80 वर्ष से अधिक आयु के हैं और कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके मुवक्किल को "सोशल मीडिया ट्रायल" का सामना करना पड़ा। वहीं, पीड़िता की ओर से पेश वकील ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि मामले में नाबालिग पीड़िताएं भी शामिल थीं।
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि आसाराम को 2 जून को अस्पताल ले जाया गया था और उनकी जान को कोई तत्काल खतरा नहीं पाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने सजा निलंबन की मांग वाली याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ती है तो मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए उल्लेख किया जा सकता है।
गौरतलब है कि जोधपुर की विशेष POCSO अदालत ने अप्रैल 2018 में आसाराम को अपने आश्रम में 2013 में एक युवती से दुष्कर्म के मामले में शेष जीवन तक कारावास की सजा सुनाई थी। उन्हें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ POCSO अधिनियम के तहत भी दोषी ठहराया गया था।
बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने उनकी दुष्कर्म सहित अधिकांश आईपीसी धाराओं में दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा, हालांकि POCSO अधिनियम के तहत दोषसिद्धि को रद्द कर दिया। साथ ही सह-आरोपी शरद और शिल्पी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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