होमक्राइमउम्मीद पोर्टल पर वक्फ बोर्ड में दर्ज जोधपुर की विभिन्न संपत्तियों पर ऐतराज, हाईकोर्ट का प्रसंज्ञान...केंद्र एवं राज्य सरकार से मांगा जवाब
क्राइम

उम्मीद पोर्टल पर वक्फ बोर्ड में दर्ज जोधपुर की विभिन्न संपत्तियों पर ऐतराज, हाईकोर्ट का प्रसंज्ञान...केंद्र एवं राज्य सरकार से मांगा जवाब

उम्मीद पोर्टल पर वक्फ बोर्ड में दर्ज जोधपुर की विभिन्न संपत्तियों पर ऐतराज, हाईकोर्ट का प्रसंज्ञान...केंद्र एवं राज्य सरकार से मांगा जवाब गीता भवन एवं शाह कॉलेज समेत विभिन्न संपत्तियां पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के नाम दर्ज…

ETV Bharat के अनुसार28 जुलाई 2026 को 03:26 pm बजे
उम्मीद पोर्टल पर वक्फ बोर्ड में दर्ज जोधपुर की विभिन्न संपत्तियों पर ऐतराज, हाईकोर्ट का प्रसंज्ञान...केंद्र एवं राज्य सरकार से मांगा जवाब

सौजन्य से:- ETV Bharat

उम्मीद पोर्टल पर वक्फ बोर्ड में दर्ज जोधपुर की विभिन्न संपत्तियों पर ऐतराज, हाईकोर्ट का प्रसंज्ञान...केंद्र एवं राज्य सरकार से मांगा जवाब

गीता भवन एवं शाह कॉलेज समेत विभिन्न संपत्तियां पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के नाम दर्ज हैं. ये संस्थाएं न्यायालय की शरण की तैयारी में हैं.

Published : July 27, 2026 at 9:02 PM IST

जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर के विभिन्न भवन व जमीनों को वक्फ की संपत्ति में दर्ज करने के मामले में सोमवार को स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया. हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार, वक्फ मंत्रालय, राजस्व विभाग एवं जिला कलेक्टर समेत अन्य को नोटिस जारी किए. इनसे जवाब मांगा गया है.

जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने इस मामले को लेकर अधिवक्ता मोती सिंह राजपुरोहित को न्याय मित्र नियुक्त किया है. कोर्ट ने प्रसंज्ञान लेकर इस मामले में बोर्ड और प्रशासन के सामने परिवादी के रूप में पेश होने वाले पूर्व पार्षद शैलेंद्र भंडारी को भी बुलाया. भंडारी ने कोर्ट में सभी दस्तावेज पेश किए. भंडारी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर संपत्ति दर्ज करते समय जानबूझ कर गड़बड़ी की गई है. इस मामले में नगर निगम और कलेक्टर की तरफ से AAG राजेश पवार भी पेश हुए.

पोर्टल पर अपलोड जानकारी नहीं की सार्वजनिक: वक्फ की जमीनों को लेकर नए कानून के तहत इनके डाटा उम्मीद पोर्टल पर अपलोड हो रहे थे. इस बीच खुलासा हुआ कि गत वर्ष उम्मीद पोर्टल पर वक्फ की संपत्ति का दावा करने के लिए अपलोड जानकारी में शहर के प्रमुख गीता भवन, सोहनलाल मनिहार स्कूल, शाह गोवर्धन कॉलेज, जजों के दो बंगले, 4 मंदिर और 2 न्याति भवन के अलावा समूचा रहवासीय व कॉमर्शियल क्षेत्र पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के नाम से दर्ज हैं. वक्फ संपत्ति की जानकारी अपलोड करने वालों ने जोधपुर के तीन खसरों को अपनी मल्कियत बताते हुए दर्ज किए हैं. ये खसरा नंबर हैं-482, 485 व 490. खास बात है कि संपत्तियों को अपलोड करते समय इनको सार्वजनिक नहीं किया गया. इसे लेकर आपत्ति हो सकती थी क्योंकि राजस्व रिकॉर्ड में तीनों खसरे निगम के नाम दर्ज हैं.

गीता मंडल के नाम दर्ज: गीता प्रचार मंडल के महामंत्री राजेश लोढ़ा ने बताया कि गीता भवन परिसर 1965 में राजस्थान सरकार के गजट नोटिफिकेशन में गीता प्रचार मंडल के नाम से दर्ज हैं. इसके साथ यहां कई स्कूल, कॉलेज व जजों के घर भी हैं. खसरा नगर निगम का है. पता नहीं, बिना सोचे समझे यह वक्फ में दर्ज कर दिए गए हैं. हम वकील से राय लेकर इस पर कार्यवाही करेंगे. सरकार से निवेदन करेंगे कि इसकी जांच करें क्योंकि पूर्व में जब दावे हुए तो वक्फ बोर्ड ने लोगों को यह कहते हुए एनओसी भी दी है कि यह हमारी जमीन नहीं हैं.

विहिप की आंदोलन की चेतावनी: यह बात सामने आई कि डाटा अपलोड अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के कार्यालय की बजाय एक संस्थान के कार्यालय में हुआ है जहां मुतवल्ली नहीं था. इसके चलते यह गड़बडी हुई हैं. इधर, विहिप ने इसे लेकर आपति जताई हैं. प्रांत सहमंत्री महेंद्र भारद्वाज ने बताया कि संपत्ति में जज साहब का मकान भी डाल दिया हैं. गीता भवन को भी दर्ज कर दिया गया. उम्मीद पोर्टल पर चोरी चुपके से यह हुआ है. ऐसे में आम आदमी की संपत्ति पर दावा कर लिया तो वो कहां जाएगा. हम सरकार से इसे लेकर बात कर रहे हैं. आवश्यकता हुई तो आंदोलन करेंगे. इधर जयपुर स्थित वक्फ बोर्ड के सीईओ अबू सूफियान से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.

पढ़ें: राज्य सरकार पर वक्फ संपत्तियों का 42 करोड़ रुपए किराया बकाया, अकेले शिक्षा विभाग पर 33 करोड़

किस्म कब्रिस्तान होने से दर्ज: जमाबंदी में ग्राम जोधपुर का खसरा नंबर 490 की 36.01 बीघा जमीन निगम के नाम है. इसका नामांतरण 12 मार्च 2016 को हुआ था, लेकिन इस खसरे की किस्म कब्रिस्तान है, जबकि यहां सैकड़ों घर बने हैं. इसके अलावा कई आवासीय व कॉमर्शियल संपत्तियों के राजस्थान हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों के बंगले, गीता भवन अन्य शिक्षण संस्थान भी हैं. सतगुरु कबीर आश्रम व गीतेश्वर महादेव मंदिर भी वक्फ गजट में दर्ज हो चुकी हैं. खसरा नंबर 482 और 485 भी जमाबंदी में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है. दोनों में कब्रिस्तान भी हैं, लेकिन इनके आधे क्षेत्र में आबादी रहती है, फिर भी वक्फ में दर्ज है. खसरा नंबर 485 में मारू लोहार सिकलीगरों का मंदिर व खसरा नंबर 482 में जीनगर न्याति बगीची (सिवांची गेट) भी है.

पूर्व पार्षद ने निकाली जानकारी: नगर निगम के पूर्व पार्षद शैलेंद्र भंडारी ने प्रशासन के समक्ष परिवाद दिया था. इसमें बताया था कि हिंदुओं के मंदिर वक्फ बोर्ड के उम्मीद पोर्टल पर अपलोड कर संपत्ति के रूप में दर्ज किए गए हैं. इसमें सामने आया कि जोधपुर जिले की 595 वक्फ संपत्तियों में से 571 को राजस्थान वक्फ बोर्ड में अप्रूव हो चुकी है, जबकि फलौदी जिले की 89 में से 80 को अप्रूव की जा चुकी है. भंडारी ने बताया कि यह अनदेखी का नतीजा हैं. कई स्तर पर लापरवाही हुई है. बिना मुतवल्ली के दर्ज हुए हैं. इसके चलते यह आबादी क्षेत्र दर्ज हुआ.

तुंवरजी का झालरा ताजियों के लिए: भीतरी शहर स्थित तुंवरजी का झालरा 1965 में ही वक्फ बोर्ड की संपत्ति के रूप दर्ज होने का पता चला है, जबकि यह झालरा पूर्व महाराजा अभयसिंह राठौड़ के कार्यकाल में बनाया गया था. इसका निर्माण ढाई सौ साल पुराना है, लेकिन इसे झालरा फॉर ताजिया के रूप में दर्ज किया गया है. इसका खुलासा भी अभी हुआ है.

पढ़ें: अदालत की अवमानना पर डीडवाना के उपखंड अधिकारी की गाड़ी कुर्क, वक्फ संपत्ति का मामला था

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें