यूजीसी नियमों के विरोध में जयपुर पहुंची 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा', आज राष्ट्रपति के नाम सौंपा जाएगा ज्ञापन
यूजीसी नियमों के विरोध में जयपुर पहुंची 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा', आज राष्ट्रपति के नाम सौंपा जाएगा ज्ञापन करणी सेना की 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' जयपुर में संपन्न, महिपाल मकराना ने यूजीसी नियमों को वापस लेने की उठाई मांग…

सौजन्य से:- ETV Bharat
यूजीसी नियमों के विरोध में जयपुर पहुंची 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा', आज राष्ट्रपति के नाम सौंपा जाएगा ज्ञापन
करणी सेना की 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' जयपुर में संपन्न, महिपाल मकराना ने यूजीसी नियमों को वापस लेने की उठाई मांग.
Published : August 3, 2026 at 7:29 AM IST
जयपुर : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के प्रस्तावित नियमों के विरोध में राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना द्वारा निकाली जा रही 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' रविवार को जयपुर पहुंचीं. बीकानेर के देशनोक से शुरू हुई यह पैदल यात्रा सोमवार को जयपुर में समाप्त होगी. यात्रा के समापन पर प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर के माध्यम से देश के राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपेगा, जिसमें यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों को तुरंत वापस (रोलबैक) लेने की मांग की जाएगी.
राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना के नेतृत्व में निकाली जा रही यात्रा के अंतिम चरण से पहले रविवार शाम कालवाड़ रोड पर मशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में करणी सेना के पदाधिकारी, युवा और समर्थक शामिल हुए. संगठन का दावा है कि यह यात्रा समाज के युवाओं और छात्रों की चिंताओं को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचाने का प्रयास है.
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महिपाल मकराना ने कहा कि यूजीसी द्वारा प्रस्तावित नियम उच्च शिक्षा में योग्यता आधारित चयन व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं. उनका आरोप है कि नई व्यवस्था से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान अवसर की भावना कमजोर होगी. उन्होंने कहा कि संगठन किसी भी वर्ग के अधिकारों के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है. मकराना ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में ऐसे किसी भी बदलाव को लागू करने से पहले व्यापक स्तर पर शिक्षाविदों, छात्रों, शोधार्थियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से चर्चा की जानी चाहिए. उनका कहना है कि यदि बिना व्यापक सहमति के नियम लागू किए गए तो इसका असर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और प्रतिभाओं के भविष्य पर पड़ेगा.
'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' की प्रमुख मांगें :-
- यूजीसी नियमों का रोलबैक: यूजीसी द्वारा प्रस्तावित नए नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
- पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया: विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति पूरी तरह से पारदर्शी और योग्यता पर आधारित हो।
- व्यापक संवाद: किसी भी नीतिगत बदलाव से पहले शिक्षाविदों, शिक्षकों और छात्रों से परामर्श किया जाए।
- समान अवसर की गारंटी: उच्च शिक्षा संस्थानों में सभी वर्गों के लिए प्रतिस्पर्धा और समान अवसर के सिद्धांत को बरकरार रखा जाए।
- पुनर्विचार: ऐसे सभी प्रावधानों की समीक्षा की जाए, जिनसे योग्य उम्मीदवारों के अवसर सीमित होने की आशंका है।
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मकराना ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए चलाया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि देशनोक से जयपुर तक की यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में युवाओं और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला. रविवार को कालवाड़ रोड से कलेक्ट्रेट सर्किल तक रैली निकाली गई. इसके बाद सोमवार को जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा. संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.
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