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सरकारी रिकॉर्ड में अब 'दलित' बोलने और लिखने की मनाही, राजस्थान पुलिस ने जारी किया सर्कुलर

Advertisement - जयपुर, - 10 जुलाई 2026, - अपडेटेड 1:35 PM IST राजस्थान पुलिस विभाग ने अपनी प्रशासनिक और आधिकारिक शब्दावली में एक महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव किया है. राजस्थान सरकार के गृह विभाग और केंद्र सरकार के सामाजिक न…

AajTak के अनुसार10 जुलाई 2026 को 01:09 pm बजे
सरकारी रिकॉर्ड में अब 'दलित' बोलने और लिखने की मनाही, राजस्थान पुलिस ने जारी किया सर्कुलर

सौजन्य से:- AajTak

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- जयपुर,

- 10 जुलाई 2026,

- अपडेटेड 1:35 PM IST

राजस्थान पुलिस विभाग ने अपनी प्रशासनिक और आधिकारिक शब्दावली में एक महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव किया है. राजस्थान सरकार के गृह विभाग और केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के पुराने निर्देशों की पालना करते हुए अब पुलिस महकमे के सभी सरकारी परिपत्रों, मामलों और कागजातों में 'दलित' शब्द के बोलने व लिखने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.

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कार्यालय अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (विविध प्रकोष्ठ एवं एससी) की ओर से जारी एक आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अब से सभी रिकॉर्ड्स, एफआईआर, फॉर्म, मानपत्र और प्रमाण पत्रों में केवल 'अनुसूचित जाति' (हिंदी में) और 'Scheduled Caste' (अंग्रेजी में) शब्दावली का ही प्रयोग सुनिश्चित किया जाएगा.

क्या है जारी किए गए आदेश में?

पुलिस अधीक्षक (विविध प्रकोष्ठ) ज्ञानचन्द्र यादव की ओर से राजस्थान के समस्त पुलिस महानिदेशकों, पुलिस आयुक्तों (जयपुर व जोधपुर) और सभी जिला पुलिस अधीक्षकों (SP) को एक सर्कुलर जारी किया गया है.

इस सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों और भारत सरकार के वर्ष 2015 के एक आदेश का हवाला दिया गया है. पत्र के अनुसार, सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, संवैधानिक मर्यादा और स्थापित कानूनी नियमों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है. आदेश में कहा गया है कि किसी भी प्रकार के आधिकारिक या विभागीय संवाद में 'दलित' शब्द के प्रयोग से बचा जाए और इसकी जगह संवैधानिक रूप से मान्य 'अनुसूचित जाति' शब्द को ही व्यवहार में लाया जाए.

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क्षेत्रीय भाषाओं में भी सटीक अनुवाद की हिदायत

यही नहीं राजस्थान पुलिस द्वारा जारी इस परिपत्र में यह भी साफ किया गया है कि केवल हिंदी या अंग्रेजी ही नहीं, बल्कि यदि किसी अन्य क्षेत्रीय भाषा में भी कोई दस्तावेज तैयार किया जाता है, तो वहां भी इस वर्ग के लिए 'अनुसूचित जाति' का जो सबसे उपयुक्त और संवैधानिक रूप से मान्य अनुवाद होगा, उसी का इस्तेमाल किया जाना अनिवार्य होगा.

यह आदेश तुरंत प्रभाव से राज्य के सभी थानों, पुलिस कार्यालयों और सहायक विभागों में लागू कर दिया गया है. जयपुर उत्तर के पुलिस उपायुक्त कार्यालय द्वारा भी इसे अधीनस्थ अधिकारियों और सभी थानाधिकारियों को अग्रेषित कर कड़ाई से पालना करने के निर्देश दिए गए हैं.

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