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हाईकोर्ट ने सीएम भजनलाल को व्यक्तिगत पक्षकार बनाने पर जताया एतराज, अपील खारिज कर नाम हटाने के दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने सीएम भजनलाल को व्यक्तिगत पक्षकार बनाने पर जताया एतराज, अपील खारिज कर नाम हटाने के दिए निर्देश हाईकोर्ट ने जमीन के मालिकाना हक से जुड़े मामले में सरकार के साथ-साथ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को व्यक्तिगत रूप से प…

etvbharat.com के अनुसार29 सितंबर 2026 को 02:04 am बजे
हाईकोर्ट ने सीएम भजनलाल को व्यक्तिगत पक्षकार बनाने पर जताया एतराज, अपील खारिज कर नाम हटाने के दिए निर्देश

सौजन्य से:- etvbharat.com

हाईकोर्ट ने सीएम भजनलाल को व्यक्तिगत पक्षकार बनाने पर जताया एतराज, अपील खारिज कर नाम हटाने के दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने जमीन के मालिकाना हक से जुड़े मामले में सरकार के साथ-साथ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को व्यक्तिगत रूप से पार्टी बनाने को गलत ठहराया.

Published : September 29, 2026 at 7:06 AM IST

जयपुर : राजस्थान हाईकोर्ट ने भूमि के स्वामित्व से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाने पर कड़ा एतराज किया है. इसके साथ ही अदालत ने मामले में दायर अपील को खारिज कर दिया है. अदालत ने कहा कि भूमि के स्वामित्व को तय करने का अधिकार राजस्व अदालत या सिविल कोर्ट को है. हाईकोर्ट उसमें सीधे तौर पर दखल नहीं दे सकता है.

वहीं अदालत ने कहा कि मामले में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाना गलत है. इसके साथ ही अदालत ने बतौर पक्षकार मुख्यमंत्री का नाम हटाने के आदेश दिए हैं. सीजे संजय के. अग्रवाल और जस्टिस इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश बांके बिहारी सैनी व अन्य की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिए.

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अपील में अधिवक्ता सतीश चंद्र पचौरी ने अदालत केा बताया कि डीग में खसरा नंबर 2707 के 2.86 हेक्टेयर जमीन में से अपीलार्थी के स्वामित्व की 0.80 हेक्टेयर जमीन है. रोडवेज की ओर से इस जमीन पर हाल्ट बस स्टैंड बनाकर उसका शुभारंभ भी कर दिया गया है. ऐसे में राज्य सरकार व रोडवेज को निर्देश दिए जाए कि वह बस स्टैंड के तौर पर किए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर भूमि को उसकी मूल स्थिति में बहाल करे. अपील में कहा गया कि अपीलार्थी ने इस कार्रवाई को एकलपीठ में याचिका दायर कर चुनौती दी थी, लेकिन एकलपीठ ने उसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि राजस्व भूमि के स्वामित्व संबंधी विवाद का निपटारा राजस्व अदालत के समक्ष है. ऐसे में याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता.

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अपील में कहा गया कि एकलपीठ के आदेश को रद्द कर अपीलार्थी की भूमि से बस स्टैंड को हटाया जाए, जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा कि रोडवेज यहां बस स्टैंड का निर्माण कर चुका है और अपीलार्थी इस भूमि पर अपना स्वामित्व स्थापित करने में असफल रहे हैं. ऐसे में वे राजस्व या सिविल न्यायालय के समक्ष अपना स्वामित्व स्थापित करने के लिए स्वतंत्र हैं.

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