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राजस्थान के प्राइमरी स्कूलों के बच्चों की मेंटल हेल्थ सुधारेगी सरकार, ये खास प्रोग्राम लॉन्च

राजस्थान के प्राइमरी स्कूलों के बच्चों की मेंटल हेल्थ सुधारेगी सरकार, ये खास प्रोग्राम लॉन्च राजस्थान में 1500 सरकारी प्राइमरी स्कूल में बच्चों के लिए 'खुशीशाला' प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसका मकसद कक्षा 1 से लेकर 5 तक…

Live Hindustan के अनुसार28 जून 2026 को 12:19 pm बजे
राजस्थान के प्राइमरी स्कूलों के बच्चों की मेंटल हेल्थ सुधारेगी सरकार, ये खास प्रोग्राम लॉन्च

सौजन्य से:- Live Hindustan

राजस्थान के प्राइमरी स्कूलों के बच्चों की मेंटल हेल्थ सुधारेगी सरकार, ये खास प्रोग्राम लॉन्च

राजस्थान में 1500 सरकारी प्राइमरी स्कूल में बच्चों के लिए 'खुशीशाला' प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसका मकसद कक्षा 1 से लेकर 5 तक के बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना और उन्हें खुश रखना है।

राजस्थान के 1500 प्राइमरी सरकारी स्कूलों में बच्चों का 'खुशीशाला' प्रोग्राम के तहत मानसिक स्वास्थ्य, उनकी खुशी और भावनात्मक मजबूती का विशेष ख्याल रखा जाएगा। इसके लिए बच्चों को खेलकूद और मजेदार एक्टिविटीज में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने इस तरह का प्रोग्राम शुरू किया है।

यह प्रोग्राम राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (आरएससीईआरटी) ने लागू किया है। इसमें कक्षा 1 से लेकर 5 तक के बच्चों के भावनात्मक कल्याण, सामाजिक विकास और जीवन जीने के कौशल पर ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए बच्चों को अलग-अलग एक्टिविटी में शामिल किया जाएगा। आरएससीईआरटी की डायरेक्टर श्वेता फगेड़िया ने बताया कि शिक्षकों को भी इसके लिए ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकें और उन्हें संभाल सकें।

बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को समझेंगे शिक्षक

श्वेता फगेड़िया ने कहा 'राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने छोटे बच्चों के लिए मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए प्रोग्राम शुरू किया है। इसका मकसद बच्चों की भावनात्मक मजबूती और सामाजिक-भावनात्मक कौशल को मजबूत करना है। इसके साथ ही इस पहल का मकसद शिक्षकों को बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को समझना भी है।

इस प्रोगाम को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए शिक्षकों को 3 दिनों की ट्रेनिंग और 21 दिनों का एक ऑडियो-वीडियो कोर्स तैयार किया गया है। इस कोर्स के दौरान शिक्षकों को यह जानने में मदद मिलेगी कि बच्चों का तनाव कैसे पहचाना जा सकता है और उनके साथ कैसे बेहतर तालमेल बिठाया जा सकता है।

2024 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ था

श्वेता फगेड़िया के मुताबिक, इस प्रोग्राम को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर साल 2024 में सिरोही और बांसवाड़ा में शुरू किया गया था जिसके नतीजे काफी अच्छे निकले। पायलट प्रोजेक्ट में 120 शिक्षकों को शामिल किया गया था जिसमें बच्चों के बर्ताव और भावनात्मक स्तर में 53 फीसदी का सुधार देखने को मिला था। साथ ही यह भी पाया गया कि इस प्रोग्राम से बच्चों और शिक्षकों का रिश्ता पहले के मुकाबले मजबूत हुआ। इसके अलावा बच्चों के बीच पढ़ाई को लेकर होने वाला तनाव और बच्चे खेल-खेल में ही काफी कुछ आसानी से सीखने लगे।

2025 में विस्तार और अब बड़े स्तर पर लागू

पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर साल 2025 में इसका और विस्तार किया गया और अब प्रदेशभर के 1500 प्राइमरी सरकारी स्कूल में इसे लागू किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों को ट्रेनिंग देने की तैयारी की जा रही है।

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