निकाय चुनाव में हार के बाद राजस्थान कांग्रेस में कलह, डोटासरा का इस्तीफा मांगा; आखिर चल क्या रहा है?
निकाय चुनाव में हार के बाद राजस्थान कांग्रेस में कलह, डोटासरा का इस्तीफा मांगा; आखिर चल क्या रहा है? राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी की अंदरूनी खींचतान सामने आई है। पूर्व मंत्री…

सौजन्य से:- Hindustan
निकाय चुनाव में हार के बाद राजस्थान कांग्रेस में कलह, डोटासरा का इस्तीफा मांगा; आखिर चल क्या रहा है?
राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी की अंदरूनी खींचतान सामने आई है। पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर टिकट वितरण में गड़बड़ी और RAS-REET से जुड़े पुराने मामलों को लेकर आरोप लगाए और उनके इस्तीफे की मांग की।
राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस के अंदर की खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर सीधे निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। विश्वेंद्र सिंह ने चुनाव में टिकट बंटवारे से लेकर डोटासरा के परिवार से जुड़े पुराने भर्ती मामलों तक पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की मांग भी की है।
टिकट बंटवारे को हार की वजह बताया
विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि कांग्रेस की शहरी निकाय चुनाव में हार की बड़ी वजह टिकटों का गलत वितरण रहा। उनके मुताबिक भरतपुर और डीग के दोनों जिला अध्यक्षों ने पार्टी के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी करते हुए अपने पसंदीदा लोगों को टिकट दिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी अपने ही मजबूत क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई तो प्रदेश संगठन के नेतृत्व की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। विश्वेंद्र सिंह ने इसी आधार पर डोटासरा के इस्तीफे की मांग की है।
डोटासरा के परिवार से जुड़े भर्ती मामलों पर भी सवाल
विश्वेंद्र सिंह ने अपने पोस्ट में 2016 और 2018 की RAS भर्तियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि डोटासरा के परिवार से जुड़े कुछ लोगों को RAS इंटरव्यू में एक जैसे 80-80 अंक दिए गए थे। उन्होंने इन अंकों पर सवाल उठाते हुए भर्ती प्रक्रिया की जांच की मांग की।
उन्होंने डोटासरा के बेटे के RAS चयन और OBC नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र को लेकर भी सवाल उठाए। इसके अलावा उन्होंने डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहने के दौरान REET में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया और इसकी भी जांच की मांग की।
इन सभी मामलों को लेकर विश्वेंद्र सिंह ने राजस्थान की मौजूदा BJP सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से विस्तृत जांच कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कार्रवाई से युवाओं का सरकार पर भरोसा कायम रह सकेगा।
डोटासरा बोले- कांग्रेस में कोई मतभेद नहीं
विश्वेंद्र सिंह के आरोपों पर डोटासरा ने कांग्रेस में किसी तरह के मतभेद या असहमति से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मजबूत हो रही है। डोटासरा ने आरोप लगाया कि BJP एक तरह के ‘टूलकिट’ के जरिए कांग्रेस के अंदर मतभेद दिखाने और गलत जानकारी फैलाने की कोशिश कर रही है।
भरतपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहा?
भरतपुर नगर निगम में कुल 65 पार्षद हैं। चुनाव में BJP को 20, कांग्रेस को 7 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 36 सीटें मिलीं। बहुमत के लिए 33 पार्षदों की जरूरत थी। इसी चुनावी प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस के भीतर संगठन और टिकट वितरण पर सवाल उठ रहे हैं।
गहलोत के करीबी माने जाते हैं विश्वेंद्र सिंह
विश्वेंद्र सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी नेताओं में गिना जाता है। ऐसे में उनका डोटासरा के खिलाफ खुलकर सामने आना कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डोटासरा और गहलोत के बीच मतभेदों की चर्चा के बीच विश्वेंद्र सिंह के बयान को दोनों नेताओं के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, उपलब्ध बयानों में यह साबित नहीं होता कि विश्वेंद्र सिंह ने ये आरोप गहलोत के कहने पर लगाए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान कांग्रेस में संगठन, टिकट वितरण और नेतृत्व की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व विश्वेंद्र सिंह के आरोपों पर क्या रुख अपनाता है।
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