बीमार पेड़-पौधों के लिए मुफ्त इलाज की सेवा, ट्री एंबुलेंस की अनोखी शुरुआत
जयपुर की एक निजी संस्था द्वारा शुरू की गई 'ट्री एंबुलेंस' सेवा में बीमार पेड़-पौधों का मुफ्त इलाज किया जाता है।

सौजन्य से:- ABP News
Jaipur News: जयपुर की 'ट्री एंबुलेंस', जहां बीमार पौधों का होता है मुफ्त इलाज, संगीत से दी जाती है नई जान
Jaipur News In Hindi: जयपुर में 'ट्री एंबुलेंस' चर्चा में है. यह टीम न सिर्फ बीमार पेड़-पौधों का मुफ्त इलाज करती है, बल्कि उन्हें बांसुरी की मधुर धुन सुनाकर नई जान भी फूंकती है.
घायल व बीमार पशु-पक्षियों या इंसानों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस तो आपने बहुत बार देखी होगी, लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में दौड़ने वाली एक एंबुलेंस इन सबसे बेहद अलग है. यह एंबुलेंस मरीजों के लिए नहीं, बल्कि बीमार या सूख रहे पेड़-पौधों की जान बचाने के लिए पहुंचती है. बिना किसी फीस या खर्च के यह संस्था मुफ्त में पेड़-पौधों का इलाज करती है. सिर्फ हरियाली बचाने के इस अनोखे मिशन के कारण ही इसे 'ट्री एंबुलेंस' (Tree Ambulance) कहा जाता है.
ट्री एंबुलेंस का संचालन एक हेल्पलाइन नंबर के जरिए होता है. कॉल या मैसेज मिलते ही 'टीम 10' की एंबुलेंस फौरन मौके के लिए रवाना हो जाती है.
- एक्सपर्ट स्टाफ: इस एंबुलेंस में ड्राइवर के अलावा पेड़-पौधों की देखरेख करने वाले दो एक्सपर्ट स्टाफ और सभी जरूरी औजार (Equipments) होते हैं.
- मुफ्त इलाज: एक्सपर्ट्स मौके पर पहुंचकर पौधों की छंटाई करते हैं, मिट्टी की खुदाई कर कचरा निकालते हैं और जरूरत के हिसाब से खाद व दवाएं डालते हैं.
- सुरक्षा: पौधों को सुरक्षित रखने के लिए ट्री गार्ड भी लगाए जाते हैं ताकि वे ठीक से पनप सकें.
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इलाज के बाद पौधों को सुनाई जाती है बांसुरी की धुन
इस एंबुलेंस सर्विस की सबसे खास बात यह है कि खराब हुए पेड़-पौधों को ठीक करने के बाद एक्सपर्ट्स उन्हें बांसुरी के जरिए संगीत की मधुर धुन भी सुनाते हैं. संस्था के संस्थापक सुशील अग्रवाल का मानना है कि पौधों को भी संगीत बहुत पसंद आता है. जब उनके पास संगीत की धुन बजती है, तो उनमें एक नई ताजगी और ऊर्जा दिखाई देती है.
2014 में हुई थी शुरुआत, अब हैं आधा दर्जन एंबुलेंस
जयपुर के ही बिजनेसमैन और पर्यावरण प्रेमी सुशील अग्रवाल ने 5 जुलाई 2014 को इस 'ट्री एम्बुलेंस सर्विस' की शुरुआत की थी.
उन्होंने सबसे पहले दो सहयोगियों के साथ एक एम्बुलेंस शुरू की थी. धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया और आज उनकी संस्था 'टीम 10' से 50 से ज्यादा सक्रिय सदस्य जुड़ चुके हैं. पिछले 12 सालों से यह टीम आधा दर्जन से ज्यादा ट्री एंबुलेंस का संचालन कर रही है.
पर्यावरण संरक्षण की अनोखी मिसाल
सुशील अग्रवाल का कहना है कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण सबकी जरूरत है, लेकिन हम इसकी तरफ ध्यान नहीं देते और कचरा व पॉलिथीन फेंककर इसे नुकसान पहुंचाते हैं. पेड़-पौधों के प्रति इस निस्वार्थ सेवा के लिए 'ट्री एंबुलेंस' और संस्था को सरकार सहित कई अन्य संगठनों द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है.
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