जयपुर जयपुर के कोचिंग सेंटरों पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन, JDA को फटकार... 3 हफ्ते में मांगा जवाब, देखिए खास रिपोर्ट
जयपुरः सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी में व्यावसायिक क्षेत्रों में कोचिंग संस्थानों जैसी चल रही संस्थानिक गतिविधियों को लेकर जेडीए से तीन हफ्ते में जवाब तलब किया है. व्यावसायिक क्षेत्र में चल रही संस्थानिक गतिविधियों पर सुप्री…

सौजन्य से:- First India News
जयपुरः सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी में व्यावसायिक क्षेत्रों में कोचिंग संस्थानों जैसी चल रही संस्थानिक गतिविधियों को लेकर जेडीए से तीन हफ्ते में जवाब तलब किया है. व्यावसायिक क्षेत्र में चल रही संस्थानिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट ने जेडीए को फटकार लगाई है.
सुप्रीम कोर्ट में लोकनाथन व अन्य बनाम तमिलनाडु राज्य के मामले में गत 20 मई को आदेश दिया था कि किसी भी व्यक्ति को मास्टर प्लान में दर्शाए भू उपयोग के विपरीत भू उपयोग और भवन विनियमों के विपरीत निर्माणों की शिकायतें हैं तो वह इस केस में नियुक्त न्यायमित्र को उसकी जानकारी दे सकता है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कई राज्यों के विभिन्न प्रकरण न्यायमित्र तक पहुंचें और न्यायमित्र की ओर से जांच के बाद उन्हें इस केस की याचिका के साथ शामिल कर लिया गया. इसी प्रक्रिया का पालन करते हुए राजधानी में गोपालपुरा बायपास स्थित 10 बी विकास समिति भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. समिति की ओर से आरोप लगाया गया कि जेडीए की ओर से व्यावसायिक क्षेत्र में संस्थानिक गतिविधियों की छूट दी गई है.
समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत सरकार के पूर्व अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल राजदीपक रस्तौगी की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि
-जयपुर के मास्टर प्लान 2011 और मास्टर प्लान 2025 में गोपालपुरा बायपास के दोनों तरफ का क्षेत्र व्यावसायिक भू उपयोग है
-इस मास्टरप्लान में दर्शाई इस व्यावसायिक पट्टी के पीछे दोनों तरफ सघन आवासीय क्षेत्र है
-सड़क किनारे व्यावसायिक क्षेत्र होने के बावजूद यहां पिछले कुछ समय में बेतहाशा कोचिंग सेंटर खोल दिए गए
-जबकि प्रदेश में लागू मॉडल भवन विनियम 2025 के तहत कोचिंग सेंटर एक संस्थानिक गतिविधि है
-उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि प्रताप नगर योजना में आवासन मंडल की ओर से करीब 350 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न सुविधाओं वाला आधुनिक कोचिंग हब निर्मित किया हुआ है
-इसके बावजूद गोपालपुरा बायपास पर बेतरतीब तरीके से चल रहे कोचिंग सेंटरों को इस कोचिंग हब में शिफ्ट नहीं किया जा रहा है
-बल्कि कोचिंग हब के विभिन्न हिस्से अन्य संस्थाओं को आवंटित किए जा रहे हैं
इस पूरे मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने समिति की ओर से रखे गए तथ्यों को महत्वपूर्ण माना.
-सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान व्यावसायिक क्षेत्रों में संचालित कोचिंग संस्थानों को उनको कोचिंग हब में शिफ्ट नहीं करने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है
-सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह मामला कोचिंग सेंटरों के संचालन के कारण स्थानीय लोगों को हो भारी असुविधा और कठिनाईयों से संबंधित है
-सुप्रीम कोर्ट ने इसे भी गंभीर माना है कि कोचिंग सेंटरों के संचालन के लिए निर्मित किए गए कोचिंग हब के विभिन्न हिस्सों को अन्य संस्थानों को आवंटित करने की कवायद की जा रही है
-सुप्रीम कोर्ट ने जेडीए के अधिवक्ता को आदेश दिए हैं मामले में अब तक उठाए गए सुधारात्मक एवं प्रभावी कदमों का विस्तृत विवरण तीन हफ्ते में प्रस्तुत किया जाए
-न्यायालय ने इस दौरान जयपुर विकास प्राधिकरण को औपचारिक रूप से पक्षकार बनाने की अनुमति देते हुए निर्देश दिए हैं
-JDA आयुक्त को अगली सुनवाई से पूर्व व्यक्तिगत शपथ-पत्र दाखिल कर आदेशों के पालना की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं
-सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यह भी स्पष्ट किया है कि कोचिंग हब में विभिन्न संस्थाओं को जो आवंटन किए गए हैं वे सभी आवंटन मामले में अंतिम आदेश के अध्यधीन रहेंगे
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना को लेकर प्रदेश की भजनलाल सरकार गंभीर है. इस मामले को लेकर नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा से एसोसिएट एडिटर अभिषेक श्रीवास्तव ने एक्सक्लुसिव बातचीत की. इस बातचीत में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार त्वरित कदत उठाए जाएंगे.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना को लेकर जयपुर विकास प्राधिकरण सक्रिय हो गया है. जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन की ओर से 6 अगस्त दोपहर 2 बजे जेडीए,नगर निगम और आवासन मंडल के अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई. इस बैठक में कोचिंग सेंटरों को लेकर दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना को लेकर मंथन किया जाएगा. इस मामले में जेडीए में उप महानिरीक्षक पुलिस आनंद शर्मा ने कहा कि-"सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति मिल गई है. आदेश का अध्ययन किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पूर्ण पालना की जाएगी."
सुप्रीम कोर्ट में स्थानीय विकास समिति की ओर से पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत सरकार के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजदीपक रस्तौगी का कहना है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि गोपालपुरा बायपास के दोनों तरफ बसें लाखों लोगों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी.
गोपालपुरा बायपास स्थित 10 बी विकास समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र अग्रवाल और सचिव गोपाल कुमार अग्रवाल का कहना है कि यहां चल रहे कोचिंग सेंटरों के कारण उनकी रातों का नींद और दिन का चैन हराम हो गया है. इन कोचिंग सेंटरों के कारण आवासीय इलाकों में कई अवैध गतिविधियां चल रही हैं
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