होम›सेहत›राज्य निर्वाचन आयोग ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को छुट्टी पर चुनाव लड़ने की अनुमति, संविदा कर्मचारियों को इस्तिफा अनिवार्य
सेहत

राज्य निर्वाचन आयोग ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को छुट्टी पर चुनाव लड़ने की अनुमति, संविदा कर्मचारियों को इस्तिफा अनिवार्य

राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक बिना वेतन की छुट्टी लेकर पंचायती राज के चुनाव में भाग ले सकते हैं, जबकि संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगियों को अपने पद से इस्तिफा देना होगा। इसी क्रम में, 2014 के राजस्थान हाईकोर्ट के निर्णय के आधार पर राशन डीलरों को भी चुनाव लड़ने की छूट दी गई है।

Dainik Bhaskar के अनुसार10 अक्टूबर 2026 को 04:05 am बजे
राज्य निर्वाचन आयोग ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को छुट्टी पर चुनाव लड़ने की अनुमति, संविदा कर्मचारियों को इस्तिफा अनिवार्य

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

- Hindi News

- Local

- Rajasthan

- Jaipur

- Rajasthan Election Rules: Anganwadi Workers Can Contest Panchayat Polls

संविदा कर्मचारी-आशा सहयोगी नहीं लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव:आंगनबाड़ी कार्यकर्ता छुट्टी लेकर लड़ सकेंगी, राशन डीलरों को भी छूट; राज्य निर्वाचन आयोग का फैसला

- कॉपी लिंक

प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका बिना वेतन छुट्टी लेकर पंच-सरपंच और जिला परिषद व पंचायत समिति मेंबर का चुनाव लड़ सकेंगी। वहीं संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगिनी पदों पर रहते हुए चुनाव नहीं लड़ सकेंगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज चुनाव लड

संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगिनी के पद को लाभ का पद माना गया है। संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगिनियों को पंचायतीराज चुनाव लड़ने के लिए अपने पदों से इस्तीफे देने होंगे। इस्तीफा मंजूर होने के बाद ही ये चुनाव लड़ सकेंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा- लाभ के पद पर रहते हुए कोई व्यक्ति पंचायती राज संस्था का चुनाव नहीं लड़ सकता। ऐसे में प्रदेश में काम कर रहे संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगिनी बिना इस्तीफा दिए पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते।

विद्या संबल योजना में काम करने वालों को चुनाव लड़ने से पहले देना होगा इस्तीफा

राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा- विद्या संबल योजना में काम करने वालों को लेकर कोर्ट का कोई आदेश उपलब्ध नहीं है, लेकिन इन्हें सरकार से सेलरी मिलती है। ऐसे में रिटर्निंग अधिकारी इनके अपॉइंटमेंट लेटर, सैलरी आदि की जांच करेगा। किसी भी तरह का संदेह होने पर इन्हें चुनाव लड़ने से पहले इनका इस्तीफा लिया जाना सही रहेगा।

राशन डीलर पंचायत चुनाव लड़ सकेंगे

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार- राशन डीलर को चुनाव लड़ने की अनुमति साल 2014 के राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर दी गई है। मांगी देवी बनाम राजस्थान सरकार के मामले में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था। इस केस में सरपंच चुनाव के नामांकन को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि उम्मीदवार राशन की दुकान चला रहा था और उसके खिलाफ जांच चल रही थी। तब हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि केवल इस आधार पर उसे अयोग्य नहीं माना जा सकता।

प्रशासक लगे सरपंचों को देना होगा इस्तीफा

प्रशासक लगे सरपंचों के चुनाव लड़ने पर राज्य निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर निर्णय करने को कहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिस तरह के सवालों पर विचार करने को कहा है। उसके आधार पर प्रशासक लगे सरपंचों को चुनाव लड़ने से पहले इस्तीफा देने को कहा जा सकता है।

आयोग के मुताबिक- प्रशासकों के मामले में यह देखना होगा कि क्या उनकी नियुक्ति सरकार ने की है? क्या सरकार के पास उन्हें हटाने का अधिकार है? क्या उस पद से कोई वेतन मानदेय या कोई भी आर्थिक लाभ जुड़ा हुआ है? उनके कामों की प्रकृति क्या है? सरकार से उसे पद पर कितना कंट्रोल रखा जाता है?

जया बच्चन वर्सेस भारत सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह निर्णायक नहीं कि वास्तव में कोई आर्थिक लाभ मिला है या नहीं। महत्वपूर्ण यह है कि संबंधित पद आर्थिक लाभ या मानदेय लेने में सक्षम है या नहीं। राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा- किसी भी प्रकार का संदेह होने पर सरकार से जारी नियुक्ति पत्र और सेवा शर्तों को देखें।

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें