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Jaipur Nagar Nigam : मेयर की कुर्सी पर नजर, छोटे चुनाव में बड़े नेताओं की दावेदारी...

Jaipur Nagar Nigam : मेयर की कुर्सी पर नजर, छोटे चुनाव में बड़े नेताओं की दावेदारी... जयपुर मेयर की कुर्सी की आस में बड़े नेताओं ने भी वार्ड पार्षद पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है. Published : August 26, 2026 at 3:19 P…

ETV Bharat के अनुसार26 अगस्त 2026 को 10:22 am बजे
Jaipur Nagar Nigam : मेयर की कुर्सी पर नजर, छोटे चुनाव में बड़े नेताओं की दावेदारी...

सौजन्य से:- ETV Bharat

Jaipur Nagar Nigam : मेयर की कुर्सी पर नजर, छोटे चुनाव में बड़े नेताओं की दावेदारी...

जयपुर मेयर की कुर्सी की आस में बड़े नेताओं ने भी वार्ड पार्षद पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है.

Published : August 26, 2026 at 3:19 PM IST

जयपुर: राजधानी जयपुर में नगर निगम चुनाव की सियासी बिसात बिछने के साथ ही भाजपा के भीतर मेयर की कुर्सी को लेकर दावेदारियां तेज हो गई हैं. इस बार चुनाव भले ही पार्षद का हो, लेकिन भाजपा में टिकट के लिए सामने आ रहे बड़े नामों ने साफ कर दिया है कि कई नेताओं की नजर वार्ड की जीत से आगे मेयर की कुर्सी पर है. पूर्व जिलाध्यक्षों से लेकर पूर्व मेयर, पूर्व डिप्टी मेयर, संगठन के पदाधिकारियों और प्रभावशाली नेताओं तक ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है.

भाजपा ने पार्षद टिकट के लिए निर्धारित फॉर्मेट में आवेदन मांगे हैं. आवेदन जिला स्तर पर जमा हो रहे हैं. अब तक 150 वार्डों के लिए 2500 से अधिक सामने आए नामों और नेताओं की सक्रियता को राजनीतिक नजरिए से देखें तो जयपुर नगर निगम का यह चुनाव भाजपा के लिए केवल पार्षद चुनने का चुनाव नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर अगले मेयर के चेहरे की तलाश का चुनाव भी बनता दिखाई दे रहा है.

आवेदन में ही छिपी मेयर पद की राजनीति : भाजपा टिकट के लिए आवेदन करने वाले नेताओं में कई ऐसे चेहरे हैं, जिनका संगठन और जयपुर की राजनीति में लंबा अनुभव रहा है. वैश्य समाज से पूर्व मेयर निर्मल नाहटा, पूर्व जिलाध्यक्ष सुनील कोठारी, पूर्व उपमहापौर पुनीत कर्णावट, पूर्व शहर जिलाध्यक्ष संजय जैन, आईटी संयोजक अजय विजयवर्गीय, जिला महामंत्री राजेश तांबी और मौजूदा जयपुर चुनाव प्रभारी विमल अग्रवाल जैसे नाम चर्चा में हैं. इन नेताओं की दावेदारी को सिर्फ पार्षद बनने की सामान्य इच्छा के तौर पर नहीं देखा जा रहा.

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि इनमें से कई नेता ऐसे हैं, जिनकी नजर निगम की शीर्ष कुर्सी पर है. यही वजह है कि टिकट के लिए बड़े नामों के मैदान में आने से भाजपा के भीतर वार्डवार समीकरणों के साथ-साथ मेयर पद के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी चर्चा में आ गए हैं. ब्राह्मण समाज से भी कई अनुभवी नेताओं ने दावेदारी जताई है.

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इनमें पूर्व शहर जिलाध्यक्ष शैलेंद्र भार्गव, मनोज भार्गव, पूर्व डिप्टी मेयर मनीष पारीक, मेयर और डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी संभाल चुके मनोज भारद्वाज और पूर्व पार्षद जितेंद्र श्रीमाली के नाम शामिल हैं. इन नेताओं की सक्रियता इस बात का संकेत मानी जा रही है कि यदि पार्टी सामान्य सीट पर ब्राह्मण चेहरे को आगे करती है तो इन नामों पर भी विचार हो सकता है.

चुनाव छोटे लेकिन दावेदारी बड़ी :

- मेयर की कुर्सी पर बड़े नेताओं की नजर.

- छोटे चुनाव में बड़े नेताओं की दावेदारी.

- पार्षद टिकट के लिए वरिष्ठ नेताओं ने ठोकी ताल.

- पूर्व मेयर से लेकर पूर्व जिलाध्यक्ष तक मैदान में.

- वैश्य समाज से कई बड़े नाम दावेदार.

- ब्राह्मण समाज के नेताओं ने भी मांगा टिकट.

- टिकट की दावेदारी या मेयर पद की तैयारी?.

- आवेदन करने वाले नेताओं में कई मेयर पद के संभावित दावेदार.

आवेदन नहीं करने वाले भी रेस में : दिलचस्प बात यह है कि मेयर की दौड़ केवल आवेदन करने वाले नेताओं तक सीमित नहीं है. भाजपा में कुछ ऐसे बड़े चेहरे भी हैं, जिन्होंने अभी पार्षद टिकट के लिए औपचारिक आवेदन नहीं किया है, लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं. पूर्व मेयर और पूर्व विधायक अशोक लाहोटी का नाम इसी कड़ी में देखा जा रहा है. उनके अलावा जयपुर शहर भाजपा के मौजूदा जिलाध्यक्ष अमित गोयल को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हैं.

माना जा रहा है कि ये नेता सीधे वार्ड के टिकट की दौड़ में शामिल होने के बजाय पार्टी नेतृत्व से संभावित संकेत और राजनीतिक आश्वासन का इंतजार कर सकते हैं. यदि शीर्ष नेतृत्व की ओर से मेयर पद को लेकर स्थिति स्पष्ट होती है तो ये चेहरे भी चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. महिला दावेदारों में भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ का नाम भी चर्चा में है. हालांकि, सामान्य सीट होने के कारण पुरुष दावेदारों की संख्या ज्यादा दिखाई दे रही है, लेकिन पार्टी यदि महिला चेहरे को लेकर कोई रणनीतिक फैसला करती है तो राखी राठौड़ भी मजबूत विकल्प बन सकती हैं. इसी उम्मीद के साथ इन नेताओं ने जयपुर से दिल्ली तक लॉबिंग तेज कर रखी है.

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6 निगमों में महिला आरक्षण, चार पर पुरुष दावेदारी : राजस्थान में इस बार कुल दस नगर निगम हैं और इनमें छह महापौर पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. ऐसे में शेष चार सामान्य श्रेणी वाले निगमों में पुरुष दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है. जयपुर का महापौर पद सामान्य श्रेणी में होने के कारण यहां भाजपा के भीतर दावेदारी और भी महत्वपूर्ण हो गई है. जयपुर की राजनीतिक सामाजिक संरचना को देखते हुए सामान्य सीट पर ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य समाज के नेताओं की दावेदारी प्रमुख रूप से सामने आती है. हालांकि, अंतिम फैसला पार्टी का राजनीतिक नेतृत्व करेगा, लेकिन टिकट के लिए सामने आए नामों को देखें तो वैश्य समाज के नेताओं की संख्या और सक्रियता खास तौर पर दिखाई दे रही है.

बड़े नेताओं की दिलचस्पी :

- आवेदन नहीं करने वाले नेता भी सक्रिय.

- मेयर पद के लिए दिल्ली तक लॉबिंग तेज.

- जयपुर का मेयर पद सामान्य श्रेणी में.

- 10 नगर निगमों में 6 मेयर सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित.

- जयपुर में सामाजिक समीकरणों पर टिकी मेयर की रेस.

- टिकट चयन में जीतने की क्षमता और संगठन की पकड़ अहम.

- पार्षद चुनाव से शुरू होगी मेयर की सियासी दौड़.

मुख्यमंत्री और सांसदों के समीकरण का असर : राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार श्यामसुंदर शर्मा कहते हैं कि जयपुर में मेयर के चुनाव को केवल निगम की राजनीति के आधार पर नहीं देखा जा सकता. इसके पीछे प्रदेश और जयपुर की व्यापक राजनीतिक संरचना भी महत्वपूर्ण होगी. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ब्राह्मण समाज से आते हैं और जयपुर शहर से भाजपा सांसद मंजू शर्मा भी ब्राह्मण समाज से हैं. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी मेयर पद के लिए एक और बड़े ब्राह्मण चेहरे को आगे करेगी ? जिसकी संभावना राजनीतिक रूप से बहुत कम हो जाती है.

दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी जयपुर ग्रामीण से राव राजेंद्र सिंह राजपूत समाज से आते हैं. ऐसे में राजपूत समाज की दावेदारी भी कमेबेश कम हो जाती हैं. इसी राजनीतिक गणित के बीच वैश्य समाज की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है. इसका एक आधार जयपुर नगर निगम का पुराना राजनीतिक इतिहास भी है. जब-जब सामान्य श्रेणी की स्थिति में महापौर का चुनाव हुआ है, तब वैश्य समाज के नेताओं को निगम की शीर्ष कुर्सी तक पहुंचने का अवसर मिला है. यही वजह है कि इस बार भी वैश्य समाज के कई नेता सक्रिय दिखाई दे रहे हैं.

भाजपा के सामने संगठन बनाम व्यक्तिगत दावेदारी : भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल नाम तय करना नहीं होगी, बल्कि संगठनात्मक संतुलन बनाए रखना भी होगा. टिकट के लिए आवेदन करने वालों में ऐसे नेता हैं, जिन्होंने लंबे समय तक संगठन में काम किया है और अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं. ऐसे में किसी एक चेहरे को आगे करने पर बाकी दावेदारों को साधना पार्टी के लिए अहम होगा. मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि पार्षदों के जरिए होता है.

इसलिए पार्टी के लिए मेयर का चेहरा तय करने से पहले यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित नेता कितने पार्षदों के बीच स्वीकार्य हैं, संगठन में उनकी पकड़ कैसी है और चुनाव के बाद निगम में बहुमत बनाए रखने की क्षमता कितनी है. यही कारण है कि इस बार पार्षद टिकट के लिए बड़े नेताओं की होड़ को मेयर चुनाव की शुरुआती पटकथा के तौर पर देखा जा रहा है. वार्ड में जीत के साथ-साथ चुनाव के बाद निगम बोर्ड में शक्ति संतुलन भी दावेदारों के राजनीतिक भविष्य को तय करेगा.

150 वार्डों के लिए 2500 ज्यादा आवेदन : निकाय चुनाव को लेकर भाजपा में टिकट की दावेदारी तेज है. जयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष अमित गोयल के मुताबिक 150 वार्डों के लिए अब तक 2500 से ज्यादा आवेदन पार्टी के पास पहुंच चुके हैं. आवेदन प्रक्रिया के आखिरी दिन भी पार्टी कार्यालय में दावेदारों और कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी रही. बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अपना बायोडेटा और निर्धारित फॉर्मेट में आवेदन लेकर पहुंचे. गोयल ने बताया कि टिकट को लेकर कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है और पार्टी कार्यालय में लगातार दावेदारों की आवाजाही बनी हुई है. अब आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्टी स्तर पर आवेदनों की छंटनी और समीक्षा शुरू होगी.

टिकट चयन में दावेदार की अच्छी छवि, संगठन के प्रति अनुशासन और चुनाव जीतने की क्षमता को प्रमुख आधार बनाया जाएगा. पार्टी निकाय चुनाव में सरकार के कामकाज और जनकल्याणकारी योजनाओं को मुद्दा बनाकर मैदान में उतरेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी नियमित प्रक्रिया के तहत आवेदन लेती है और पार्टी के निर्देश के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया पूरी होगी. पार्टी जितवा उम्मीदवार को मैदान में उतरेगी पार्टी की नजर में सब कार्य करता समान है कोई बड़ा और छोटा नहीं है.

जयपुर में भाजपा के सामने दोहरी चुनौती : जयपुर नगर निगम में भाजपा के सामने एक तरफ कांग्रेस और अन्य राजनीतिक ताकतों से मुकाबला होगा, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर टिकट की दावेदारी को लेकर संतुलन बनाना होगा. बड़े नेताओं के चुनाव मैदान में आने से कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ सकता है, लेकिन टिकट से वंचित दावेदारों को साथ रखना भी उतना ही जरूरी होगा. सबसे अहम सवाल यह होगा कि भाजपा मेयर की कुर्सी के लिए पहले से चेहरा तय करती है या चुनाव परिणाम के बाद पार्षदों के बीच से नेतृत्व चुनती है. यदि पार्टी पहले से संकेत देती है तो टिकट वितरण उसी चेहरे के समर्थन और सामाजिक समीकरण के आसपास प्रभावित हो सकता है.

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वहीं, यदि पार्टी मेयर का फैसला चुनाव के बाद करती है तो अभी टिकट मांग रहे सभी बड़े नेताओं के लिए राजनीतिक संभावना खुली रहेगी. फिलहाल, जयपुर भाजपा में तस्वीर यही है कि चुनाव पार्षद का है, लेकिन निगाहें मेयर की कुर्सी पर टिकी हैं. आवेदन करने वाले बड़े नेताओं की लंबी सूची और आवेदन किए बिना शीर्ष स्तर पर सक्रिय नेताओं ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. आने वाले दिनों में टिकट वितरण के साथ यह साफ होगा कि भाजपा जयपुर के मेयर पद के लिए संगठन, सामाजिक समीकरण, राजनीतिक अनुभव या नए चेहरे में से किस फॉर्मूले को प्राथमिकता देती है. यही फैसला जयपुर नगर निगम की अगली सियासी तस्वीर की दिशा तय करेगा.

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