Dausa: डमी अभ्यर्थी, फर्जी हस्ताक्षर और OMR घोटाला...एसओजी ने फर्जीवाड़े से नौकरी पाने वाले दो आरोपी पकड़े
Dausa: डमी अभ्यर्थी, फर्जी हस्ताक्षर और OMR घोटाला...एसओजी ने फर्जीवाड़े से नौकरी पाने वाले दो आरोपी पकड़े राजस्थान एसओजी ने भर्ती परीक्षा घोटालों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दौसा जिले के महवा थाना क्षेत्र से दो आरोपियों क…

सौजन्य से:- Amar Ujala
Dausa: डमी अभ्यर्थी, फर्जी हस्ताक्षर और OMR घोटाला...एसओजी ने फर्जीवाड़े से नौकरी पाने वाले दो आरोपी पकड़े
राजस्थान एसओजी ने भर्ती परीक्षा घोटालों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दौसा जिले के महवा थाना क्षेत्र से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पहला आरोपी हाईकोर्ट एलडीसी भर्ती परीक्षा-2022 में डमी अभ्यर्थी बैठाकर सरकारी नौकरी हासिल करने का दोषी पाया गया, जबकि दूसरा आरोपी प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा-2018 में OMR शीट में 53 अंकों की हेराफेरी कर एलडीसी पद पर चयनित हुआ था।
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राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दौसा जिले के महवा थाना क्षेत्र के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एक आरोपी ने हाईकोर्ट एलडीसी भर्ती परीक्षा-2022 में अपने स्थान पर डमी अभ्यर्थी बैठाकर नौकरी हासिल की, जबकि दूसरे आरोपी ने प्रयोगशाला सहायक सीधी भर्ती परीक्षा-2018 में OMR शीट में हेराफेरी कर सरकारी नौकरी प्राप्त की। दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच के दौरान अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक तथा डमी अभ्यर्थियों के इस्तेमाल से जुड़े अहम खुलासे भी सामने आए हैं।
डमी अभ्यर्थी बैठाकर हासिल की हाईकोर्ट एलडीसी की नौकरी
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि हाईकोर्ट एलडीसी भर्ती परीक्षा-2022 का आयोजन 19 मार्च 2023 को हुआ था। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी 27 वर्षीय बृजेश कुमार मीणा है, जो दौसा जिले के महवा तहसील के टिकरी जाफरान गांव का रहने वाला है।
पेपर लीक गिरोह के सरगना से चार लाख रुपये में किया था सौदा
जांच में सामने आया कि बृजेश कुमार ने पेपर लीक गिरोह के सरगना हर्षवर्धन कुमार मीणा से चार लाख रुपये में सौदा किया था। इसके बाद उसके स्थान पर एक डमी अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठाया गया। परीक्षा का आयोजन दौसा के श्री रामकरण जोशी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, लालसोट रोड स्थित परीक्षा केंद्र पर हुआ था।
डमी अभ्यर्थी ने दी परीक्षा, आरोपी बन गया एलडीसी
एसओजी के अनुसार डमी अभ्यर्थी ने फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर परीक्षा दी और आरोपी को अनुचित लाभ दिलाया। इसी फर्जीवाड़े के आधार पर बृजेश कुमार हाईकोर्ट एलडीसी पद पर चयनित हो गया। चयन के बाद उसकी नियुक्ति धौलपुर के बाड़ी स्थित एसीजेएम कोर्ट में हुई थी। बाद में मामला उजागर होने पर न्यायालय ने उसे सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया।
पूछताछ में किया बड़ा खुलासा
पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसकी जगह महेंद्र कुमार नाम के डमी अभ्यर्थी ने परीक्षा दी थी। फर्जी दस्तावेज और कूटरचित हस्ताक्षरों के जरिए नौकरी हासिल की गई थी।
6 जुलाई को हुई गिरफ्तारी
एसओजी थाना जयपुर में दर्ज मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोहन चौधरी कर रहे हैं। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद 6 जुलाई 2026 को बृजेश कुमार मीणा को गिरफ्तार कर लिया गया।
OMR शीट में हेराफेरी कर बना सरकारी कर्मचारी
एसओजी ने दूसरी कार्रवाई में प्रयोगशाला सहायक सीधी भर्ती परीक्षा-2018 में OMR शीट में फर्जीवाड़ा कर नौकरी पाने वाले पिंटू कुमार मीणा को भी गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया कि OMR शीट की स्कैनिंग के दौरान उसके अंक बढ़ाकर 158 दर्शाए गए थे, जबकि दोबारा स्कैनिंग में उसके वास्तविक अंक केवल 105 पाए गए। गिरफ्तार आरोपी 27 वर्षीय पिंटू कुमार मीणा महवा थाना क्षेत्र के सांथा गांव स्थित ढाणी पोखर का निवासी है।
फर्जी चयन के बाद एलडीसी पद पर कर रहा था नौकरी
फर्जी तरीके से चयनित होने के बाद पिंटू कुमार मीणा वर्तमान में उदयपुर जिले के झाड़ोल स्थित केंद्रीय एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल में लोअर डिवीजन क्लर्क (एलडीसी) के पद पर कार्यरत था। वह अभी प्रोबेशन अवधि में था।
27 अभ्यर्थियों की OMR शीट में की गई थी हेराफेरी
एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि प्रयोगशाला सहायक सीधी भर्ती परीक्षा-2018 की जांच के दौरान सामने आया कि OMR शीट स्कैनिंग करने वाली एजेंसी राभव लिमिटेड के कर्मचारियों विनोद कुमार गौड़ और शादाब खान ने परीक्षा में शामिल 27 अभ्यर्थियों की OMR शीट में हेराफेरी कर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाया।
एजेंसी के कर्मचारी और निदेशक पहले ही हो चुके गिरफ्तार
एसओजी इससे पहले OMR स्कैनिंग एजेंसी राभव लिमिटेड के कर्मचारी विनोद कुमार गौड़, शादाब खान और कंपनी के कार्यकारी निदेशक रामप्रवेश सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में सामने आया कि एजेंसी के कर्मचारियों और अधिकारियों ने अभ्यर्थियों से मिलीभगत कर OMR स्कैनिंग के दौरान अंकों में बदलाव किया।
53 अंक बढ़ाकर कराया गया चयन
जांच में पाया गया कि पिंटू कुमार मीणा के वास्तविक अंक 105 थे, लेकिन OMR स्कैनिंग में उन्हें 158 दर्शाया गया। इस तरह 53 अंकों की हेराफेरी कर उसे अंतिम चयन सूची में शामिल कराया गया।
लगातार तलाश के बाद हुई गिरफ्तारी
महानिरीक्षक पुलिस (एसओजी) अजयपाल लांबा के निर्देशन, उपमहानिरीक्षक भुवन भूषण यादव के सुपरविजन और पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया के नेतृत्व में अनुसंधान अधिकारी एवं पुलिस निरीक्षक यशवंत सिंह लगातार आरोपियों की तलाश कर रहे थे। इसी अभियान के दौरान पिंटू कुमार मीणा को गिरफ्तार किया गया।
27 अभ्यर्थियों की भूमिका की जांच जारी
एसओजी की जांच में अब तक सामने आया है कि OMR स्कैनिंग के जरिए 27 अभ्यर्थियों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। एजेंसी के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से अंकों में बदलाव कर उन्हें अंतिम चयन सूची में शामिल किया गया। पूरे भर्ती घोटाले में शामिल अन्य अभ्यर्थियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच जारी है।
अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी खुल सकते हैं बड़े राज
गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। एसओजी के अनुसार पूछताछ में अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, डमी अभ्यर्थियों के इस्तेमाल और संगठित भर्ती घोटालों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। इन सूचनाओं के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं तथा कई अन्य भर्ती परीक्षाओं से जुड़े बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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