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Cyber Fraud: 16 लाख की ठगी की जांच में खुला 500 करोड़ का महाघोटाला! राजस्थान पुलिस ने पुणे से दबोचा मास्टरमाइंड, ऐसे खुला राज

WhatsApp Group Used for ₹500 Crore Investment Fraud; Cyber Crime Team Cracks Network राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने शेयर बाजार में निवेश और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर देशभर में करोड़ों रुपए की ठगी करन…

gnttv.com के अनुसार7 जुलाई 2026 को 04:04 pm बजे
Cyber Fraud: 16 लाख की ठगी की जांच में खुला 500 करोड़ का महाघोटाला! राजस्थान पुलिस ने पुणे से दबोचा मास्टरमाइंड, ऐसे खुला राज

सौजन्य से:- gnttv.com

WhatsApp Group Used for ₹500 Crore Investment Fraud; Cyber Crime Team Cracks Network

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने शेयर बाजार में निवेश और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर देशभर में करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने करीब 500 करोड़ रुपए के मेगा साइबर फ्रॉड के मुख्य मास्टरमाइंड को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया है. आरोपी फर्जी फाइनेंस कंपनियों की आड़ में लोगों के दस्तावेज हासिल कर उनके नाम पर म्यूल बैंक खाते खुलवाता था और उन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम को ठिकाने लगाता था.

16 लाख की शिकायत से खुला 500 करोड़ के घोटाले का राज

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में परिवादी सेंधाराम चौधरी ने 16 लाख रुपए की साइबर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी. पीड़ित ने बताया कि उसे '105 IND STOCKS ADV' नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा गया था, जहां निवेश और ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर उससे रकम निवेश कराई गई. पुलिस ने जब व्हाट्सएप ग्रुप की चैट और तकनीकी डेटा का विश्लेषण किया तो सामने आया कि इसी एक ग्रुप के जरिए देशभर के लोगों से करीब 500 करोड़ रुपए की साइबर ठगी की जा चुकी थी.

ऐसे लोगों को फंसाता था गिरोह

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए लोगों को घर बैठे ट्रेडिंग से मोटा मुनाफा कमाने का लालच देता था. शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए निवेश पर थोड़ा-बहुत मुनाफा भी पीड़ितों के खाते में भेजा जाता था. जब लोग पूरी तरह विश्वास कर अपनी बड़ी रकम निवेश कर देते थे, तब पैसा फर्जी खातों में ट्रांसफर होते ही उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप से हटा दिया जाता और ग्रुप भी डिलीट कर दिया जाता था.

तकनीकी जांच के बाद पुणे से दबोचा गया मास्टरमाइंड

मामले की गंभीरता को देखते हुए उप महानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन और साइबर क्राइम पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरड़ा की निगरानी में विशेष टीम बनाई गई. टीम ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और व्हाट्सएप डेटा की गहन तकनीकी जांच की. जांच के आधार पर पुलिस ने पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड युवराज सतीश मुदलियार (35) निवासी लोहगांव, पुणे (महाराष्ट्र) को गिरफ्तार कर ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लाया.

फर्जी फाइनेंस कंपनियों से तैयार करता था म्यूल खाते

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पुणे में ग्रेस फाइनेंस, पॉजिटिव बैलेंस और गुरु फाइनेंस के नाम से फर्जी लोन कंपनियां संचालित करता था. लोन दिलाने के नाम पर वह लोगों से पैन कार्ड, पहचान पत्र, बैंक स्टेटमेंट और सैलरी स्लिप जैसे दस्तावेज ले लेता था. बाद में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम से म्यूल बैंक खाते खुलवाए जाते थे और खाताधारकों को इसके बदले 10 हजार रुपए का कमीशन दिया जाता था. इन खातों में आने वाली ठगी की करोड़ों रुपए की रकम एटीएम से निकालकर हवाला नेटवर्क के जरिए Binance Wallet में USDT क्रिप्टोकरेंसी खरीदी जाती थी और विदेशों में बेच दी जाती थी. इस पूरे नेटवर्क में आरोपी को करीब 5 प्रतिशत कमीशन मिलता था.

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