जयपुर: CM ऑफिस से 4 KM की दूरी पर स्थित सरकारी स्कूल की जर्जर हालत, उठे सवाल
जयपुर: CM ऑफिस से 4 KM की दूरी पर स्थित सरकारी स्कूल की जर्जर हालत, उठे सवाल Rajasthan News: राजस्थान में स्कूलों में मीडिया बैन के बीच जयपुर के एक स्कूल की बदहाली सामने आई है. सीएम आवास से 4 किमी दूर यह प्राइमरी स्कूल स…

सौजन्य से:- ABP News
जयपुर: CM ऑफिस से 4 KM की दूरी पर स्थित सरकारी स्कूल की जर्जर हालत, उठे सवाल
Rajasthan News: राजस्थान में स्कूलों में मीडिया बैन के बीच जयपुर के एक स्कूल की बदहाली सामने आई है. सीएम आवास से 4 किमी दूर यह प्राइमरी स्कूल सिर्फ एक जर्जर कमरे में चल रहा है.
जेन अल्फा (Gen Alpha) द्वारा चलाए जा रहे आंदोलनों के बीच राजस्थान सरकार ने हाल ही में रविवार के दिन एक आदेश जारी कर सरकारी स्कूलों में मीडिया व बाहरी लोगों की एंट्री, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है. सरकार के इस 'तुगलकी फरमान' के पीछे की असली वजह क्या है, इसका खुलासा राजधानी जयपुर के एक सरकारी स्कूल की जमीनी हकीकत देखकर हो जाता है. साफ है कि सरकार स्कूलों की बदहाली और अपनी नाकामियों को कैमरों से छिपाना चाहती है.
मीडिया बैन की हकीकत परखने के लिए एबीपी न्यूज़ की टीम जयपुर के शहरी इलाके जवाहर नगर के टीला नंबर 6 की बस्ती में संचालित एक प्राइमरी स्कूल पहुंची. यह स्कूल मुख्यमंत्री आवास, शिक्षा मंत्री के दफ्तर, विधानसभा और सचिवालय से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. सत्ता के इतने करीब होने के बावजूद इस स्कूल की हालत किसी खंडहर से कम नहीं है.
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हादसे के साये में पढ़ाई
पहली से पांचवीं क्लास तक चलने वाले इस स्कूल के दो पुराने कमरे पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, जहां ना तो छत बची है, ना जमीन और ना ही दीवारें. पूरा का पूरा स्कूल अब सिर्फ पहली मंजिल पर बने एक जर्जर कमरे में चल रहा है. इसी एक कमरे में कक्षा 1 से लेकर 5 तक के सभी बच्चे एक साथ पढ़ने को मजबूर हैं. कमरे की दीवारों में गहरी दरारें हैं, प्लास्टर उखड़ चुका है और सालों से रंगाई-पुताई नहीं हुई है. यह इमारत कभी भी बड़े हादसे का शिकार हो सकती है.
बारिश में बन जाता है तालाब, शौचालय भी नहीं
स्कूल की बुनियादी सुविधाएं भी पूरी तरह नदारद हैं. ऊपर क्लासरूम तक जाने का रास्ता थोड़ी सी बारिश में ही घुटने भर पानी से भर जाता है, जिससे स्कूल में अघोषित छुट्टी करनी पड़ जाती है. छात्राओं (लड़कियों) के इस स्कूल में कहीं भी शौचालय (Toilet) नजर नहीं आता और मिड-डे मील का किचन हमेशा बंद पड़ा रहता है.
बीमारियों का घर बन रहा स्कूल
पहाड़ी के नीचे स्थित इस स्कूल के चारों तरफ गंदगी और कूड़े का अंबार है. स्कूल के बाहर नाले का गंदा पानी भरा रहता है, जिसे पार करके छोटे-छोटे बच्चे स्कूल पहुंचते हैं. भयंकर दुर्गंध और गंदगी के कारण यहां पढ़ने वाले बच्चे अक्सर बीमार पड़ जाते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे बच्चों को यहां भेजने से डरते हैं, लेकिन मजबूरी में उन्हें भेजना पड़ता है.
राजधानी के बीचों-बीच स्थित इस स्कूल की यह दर्दनाक तस्वीर यह बताने के लिए काफी है कि अगर जयपुर शहर के स्कूलों का यह हाल है, तो प्रदेश के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों की स्थिति कितनी भयावह होगी. सरकार का मीडिया एंट्री पर बैन लगाना व्यवस्था सुधारने के बजाय कमियों पर पर्दा डालने की स्पष्ट कोशिश नजर आता है.
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