राजस्थान हाई कोर्ट जज विवाद, जस्टिस संदीप मेहता ने CJI को लिखा चौथा पत्र; जांच में दखल का लगाया आरोप - rajasthan high court judge controversy justice mehta wrote fourth letter to cji
राजस्थान हाई कोर्ट जज विवाद, जस्टिस संदीप मेहता ने CJI को लिखा चौथा पत्र; जांच में दखल का लगाया आरोप जस्टिस संदीप मेहता ने राजस्थान हाई कोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा पर आंतरिक न्यायिक जांच में दखल और गोपनीयता ...और पढ़े…

सौजन्य से:- Jagran
राजस्थान हाई कोर्ट जज विवाद, जस्टिस संदीप मेहता ने CJI को लिखा चौथा पत्र; जांच में दखल का लगाया आरोप
जस्टिस संदीप मेहता ने राजस्थान हाई कोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा पर आंतरिक न्यायिक जांच में दखल और गोपनीयता ...और पढ़ें
HighLights
- जस्टिस मेहता ने CJI को चौथा पत्र लिखा।
- जस्टिस शर्मा पर जांच में दखल का आरोप।
- गोपनीयता उल्लंघन और शक्तियों का दुरुपयोग।
पीटीआई, नई दिल्ली। राजस्थान हाई कोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा पर एक और बड़ा आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को चौथा पत्र लिखा है।
इसमें उन्होंने जस्टिस शर्मा पर आंतरिक न्यायिक जांच में दखल देने, गोपनीयता का उल्लंघन करने और प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।
30 अगस्त को लिखे चौथे पत्र में जस्टिस मेहता ने कहा कि उनके पास जस्टिस शर्मा के संदिग्ध कार्यों और मनमाने तरीके से अधिकार का इस्तेमाल करने को लेकर अतिरिक्त जानकारी है। इससे पहले जस्टिस मेहता ने दो, 10 और 17 अगस्त को सीजेआइ को तीन पत्र लिखे थे।
इन पत्रों में उन्होंने उस समय राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे शर्मा पर कुप्रशासन, गलत काम, भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोप लगाए थे।
जस्टिस शर्मा ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार बताया था।
जस्टिस सूर्यकांत ने 26 अगस्त को कहा था कि जस्टिस मेहता के आरोपों पर सार्वजनिक रूप से फैसला नहीं किया जा सकता।
किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जज को निष्पक्ष मौका दिया जाना चाहिए। कुछ दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिश पर जस्टिस संजय अग्रवाल को राजस्थान हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
जस्टिस मेहता ने कहा कि हाई कोर्ट की एक शिकायत समिति बनाई गई थी, जो एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच कर रही थी। उस अधिकारी पर आरोप था कि उसने अपने मोबाइल फोन पर एक महिला अधिकारी की आपत्तिजनक तस्वीरें दिखाई थीं।
तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जस्टिस शर्मा ने जांच में सीधे दखल दिया। इससे समिति की स्वतंत्रता प्रभावित हुई और इस तरह का हस्तक्षेप पूरी जांच को प्रभावित कर सकता है।
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