विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता का महत्व, सीजेआई ने दिया शांति संदेश
जीएसवाई कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि विवादों का समाधान सिर्फ अपनी बात कहने से नहीं निकलता, बल्कि सामने वाले की बात धैर्य से सुनने और समझने से निकलता है। उन्होंने मध्यस्थता को विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का प्रभावी माध्यम बताया।

सौजन्य से:- ABP News
'विवाद दो पड़ोसियों के बीच हो...', जयपुर में CJI का शांति संदेश
Jaipur Commonwealth Conference: जयपुर में 31 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित की जा रही है. इसका मुख्य विषय 'Peace Mediation and the Rule of Law' यानी शांति के लिए मध्यस्थता और कानून का शासन है.
जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत ने विवादों को सुलझाने के तरीके पर बेहद अहम बात कही. उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान सिर्फ अपनी बात रखने से नहीं निकलता, बल्कि सामने वाले की बात धैर्य से सुनने और समझने से निकलता है.
सीजेआई ने कहा विवाद दो पड़ोसियों के बीच हो या दो देशों के बीच, उसे सुलझाने का मूल तरीका एक जैसा ही रहता है. सीजेआई ने कहा कि जब दो पक्ष किसी विवाद में आमने-सामने होते हैं तो अक्सर दोनों अपनी बात साबित करने पर ज्यादा जोर देते हैं.
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दोनों पक्ष एक-दूसरे को सुनें- सीजेआई
ऐसे में समाधान की पहली जरूरत यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को सुनें. कई बार विवाद इसलिए लंबा खिंचता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी बात तो कहना चाहते हैं, लेकिन दूसरे की बात सुनने और उसकी चिंता समझने को तैयार नहीं होते.
उन्होंने मध्यस्थता यानी मिडिएशन को विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि इसका मकसद किसी एक पक्ष को हराना या जिताना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच ऐसा रास्ता निकालना है, जिसे वे स्वीकार कर सकें.
कॉन्फ्रेंस में क्या बोले सीजेआई सूर्य कांत?
सीजेआई ने समझाया कि छोटे स्तर पर दो पड़ोसियों के बीच जमीन, रास्ते या किसी दूसरे मुद्दे को लेकर विवाद हो सकता है. वहीं बड़े स्तर पर यही स्थिति दो राज्यों या दो देशों के बीच दिखाई दे सकती है. फर्क सिर्फ विवाद के आकार का है, लेकिन समाधान का मूल सिद्धांत वही है बातचीत, धैर्य और एक-दूसरे की बात सुनना.
उन्होंने कहा कि बातचीत में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि सामने वाला क्या कह रहा है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि वह ऐसा क्यों कह रहा है. जब पक्षकार एक-दूसरे की चिंताओं और जरूरतों को समझने लगते हैं, तो टकराव की जगह समाधान की संभावना बढ़ती है.
सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी संकेत दिया कि आज के दौर में विवादों को अदालत तक पहुंचने से पहले बातचीत और मध्यस्थता के जरिए सुलझाने की संस्कृति को मजबूत करने की जरूरत है. इससे न सिर्फ समय और संसाधनों की बचत होती है, बल्कि रिश्ते भी टूटने से बच सकते हैं.
कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस
जयपुर में 31 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित की जा रही है. इसका मुख्य विषय “Peace Mediation and the Rule of Law” यानी शांति के लिए मध्यस्थता और कानून का शासन है. इसमें कॉमनवेल्थ देशों समेत अलग-अलग जगहों से जज, वकील, मध्यस्थ, नीति निर्माता, राजनयिक और विवाद समाधान से जुड़े विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं.
कॉन्फ्रेंस का मकसद मध्यस्थता को केवल अदालत से बाहर विवाद सुलझाने के तरीके तक सीमित न रखकर परिवार और समाज के छोटे विवादों से लेकर कारोबारी, आपराधिक, पर्यावरण, इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय विवादों तक शांति कायम करने के माध्यम के तौर पर आगे बढ़ाना है.
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने क्या कहा?
इस सम्मेलन में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मध्यस्थता और कानून के शासन को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की व्यवस्था मजबूत होगी तो लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और बढ़ेगा.
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान में न्याय तक आसान पहुंच और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए मध्यस्थता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि समाज में संवाद और सहमति की संस्कृति को बढ़ावा देना समय की जरूरत है.
राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने न्याय व्यवस्था में मध्यस्थता के बढ़ते महत्व पर बात रखी. उन्होंने कहा कि कई विवाद अदालत में लंबी लड़ाई के बजाय बातचीत और सहमति से जल्दी सुलझाए जा सकते हैं.
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