उदयपुर नगर निगम चुनाव: BJP के 30 साल पुराने गढ़ में BAP की एंट्री, त्रिकोणीय हुआ मुकाबला
उदयपुर नगर निगम चुनाव: BJP के 30 साल पुराने गढ़ में BAP की एंट्री, त्रिकोणीय हुआ मुकाबला उदयपुर निगम चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. यहां BAP की इंट्री से त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा. Publis…

सौजन्य से:- ETV Bharat
उदयपुर नगर निगम चुनाव: BJP के 30 साल पुराने गढ़ में BAP की एंट्री, त्रिकोणीय हुआ मुकाबला
उदयपुर निगम चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. यहां BAP की इंट्री से त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा.
Published : August 20, 2026 at 4:09 PM IST
उदयपुर: आगामी नगर निकाय और पंचायती राज चुनावों से पहले भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने उदयपुर में अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है. पार्टी अब आदिवासी बहुल ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही उदयपुर शहर की राजनीति में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. बुधवार को जिलेभर के कार्यकर्ताओं की बैठक में चुनावी तैयारियों को लेकर मंथन हुआ. बैठक में सांसद राजकुमार रोत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे. BAP की नजर इस बार उदयपुर नगर निगम के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की पंचायतों पर भी है. वहीं, संभावित प्रत्याशियों ने टिकट की दावेदारी को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और जिला अध्यक्षों के दरवाजे खटखटाने शुरू कर दिए हैं
बैठक में संगठन को बूथ और वार्ड स्तर तक मजबूत करने, संभावित प्रत्याशियों की पहचान करने और चुनावी रणनीति तैयार करने पर चर्चा हुई. पंचायती राज चुनावों के लिए सांसद राजकुमार रोत को प्रभारी बनाए जाने की जानकारी भी दी गई. सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि उदयपुर नगर निगम सहित अन्य शहरी निकायों के कई वार्डों में पार्टी अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है. उनका कहना है कि पार्टी स्थानीय मुद्दों और जनता की समस्याओं को आधार बनाकर चुनाव मैदान में उतरेगी.
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भाजपा-कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला: बैठक में BAP ने सीधे तौर पर भाजपा और कांग्रेस को चुनौती देने के संकेत दिए. रोत ने कहा कि उदयपुर की जनता दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से परेशान है और ऐसे में पार्टी खुद को तीसरे विकल्प के तौर पर मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. इससे आगामी निकाय चुनावों में मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना को बल मिला है.
पार्टी की रणनीति केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं है. वार्डवार संगठन की स्थिति, स्थानीय स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं और संभावित उम्मीदवारों की पहचान पर भी काम किया जा रहा है. उदयपुर जिलाध्यक्ष अमित खराड़ी ने बताया कि नगर निगम के विभिन्न वार्डों में पार्टी की स्थिति का आकलन किया जा रहा है और मजबूत दावेदारों को लेकर चर्चा जारी है. बैठक में ब्लॉक अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष सहित जिलेभर के कार्यकर्ता मौजूद रहे. पार्टी ने कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों में जुटने का आह्वान किया. ऐसे में अब देखना होगा कि आदिवासी राजनीति से मजबूत हुई BAP उदयपुर की शहरी राजनीति में भाजपा-कांग्रेस के बीच कितना प्रभाव पैदा कर पाती है.
तारीखों की घोषणा और उम्मीदवारों की सक्रियता: नगर निगम चुनाव की तारीख घोषित होते ही उदयपुर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों ने टिकट की दावेदारी को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और जिला अध्यक्षों के दरवाजे खटखटाने शुरू कर दिए हैं. वार्ड स्तर पर भी दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है. इसी के साथ भाजपा और कांग्रेस के बीच बोर्ड बनाने को लेकर सियासी दावे और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.
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उदयपुर नगर निगम का इतिहास: उदयपुर नगर निगम के इतिहास में अब तक छह बोर्ड बने हैं और सभी में भाजपा का दबदबा रहा है.
- 1994: किरण माहेश्वरी (महापौर)
- 1999: युधिष्ठिर कुमावत (महापौर)
- 2004: रवींद्र श्रीमाली (महापौर)
- 2009: रजनी डांगी (महापौर)
- 2014: चंद्रसिंह कोठारी (महापौर)
- 2019: जीएस टांक (महापौर)
यानी 1994 से 2019 तक नगर निगम के सभी छह बोर्ड भाजपा के रहे हैं. अब भाजपा की नजर सातवीं बार बोर्ड बनाने पर है, जबकि कांग्रेस इस बार भाजपा के गढ़ में सेंध लगाने का दावा कर रही है.
भाजपा और कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के दावे: भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि भाजपा साल के 12 महीने चुनावी मोड में रहती है. पार्टी की ओर से नगर निगम के सभी 80 वार्डों में सर्वे कराया जा रहा है. सर्वे और मेरिट के आधार पर प्रत्याशियों के नाम तय किए जाएंगे. चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद टिकट के दावेदार नेताओं से मुलाकात कर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुट गए हैं. भाजपा का दावा है कि पार्टी एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन करते हुए सातवां बोर्ड बनाएगी.
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कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ ने कहा कि पार्टी नगर निगम चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और सभी 80 वार्डों में पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी. कांग्रेस का दावा है कि इस बार शहर की जनता बदलाव के पक्ष में है और पार्टी नगर निगम में अपना बोर्ड बनाएगी. चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद कांग्रेस में भी संभावित प्रत्याशी वरिष्ठ नेताओं से संपर्क साध रहे हैं. वार्ड आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद महिला, ओबीसी, एससी और एसटी के लिए आरक्षित वार्डों में भी टिकट के दावेदार सामने आ रहे हैं.
दोनों दलों में प्रत्याशी चयन को लेकर मंथन तेज हो गया है. ऐसे में आने वाले दिनों में टिकट की दावेदारी, नेताओं से मुलाकात और एक-दूसरे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है. अब देखना होगा कि भाजपा अपने छह बोर्ड की लगातार जीत का सिलसिला बरकरार रख पाती है या कांग्रेस इस बार सत्ता परिवर्तन का दावा हकीकेट में बदल पाती है, या फिर BAP तीसरा विकल्प बनकर बाजी मारती है.
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