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यमुना जल समझौते पर सियासी घमासान, BJP ने अशोक गहलोत को घेरा, कांग्रेस ने सरकार से पूछे सवाल

Rajasthan News: यमुना जल समझौते पर सियासी घमासान, BJP ने अशोक गहलोत को घेरा, कांग्रेस ने सरकार से पूछे सवाल Yamuna Water Agreement: राजस्थान और हरियाणा के बीच हुए सोमवार को हुए यमुना जल समझौते पर सियासत गरमा गई है, बीजेप…

ABP News के अनुसार30 जून 2026 को 06:25 am बजे
यमुना जल समझौते पर सियासी घमासान, BJP ने अशोक गहलोत को घेरा, कांग्रेस ने सरकार से पूछे सवाल

सौजन्य से:- ABP News

Rajasthan News: यमुना जल समझौते पर सियासी घमासान, BJP ने अशोक गहलोत को घेरा, कांग्रेस ने सरकार से पूछे सवाल

Yamuna Water Agreement: राजस्थान और हरियाणा के बीच हुए सोमवार को हुए यमुना जल समझौते पर सियासत गरमा गई है, बीजेपी ने ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए पूर्व सीएम अशोक गहलोत पर हमला बोला है.

यमुना जल समझौते को लेकर राजस्थान की राजनीति गरमा गई है. एक तरफ बीजेपी इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताकर कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर हमला बोल रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस समझौते का स्वागत करते हुए भी सरकार की मंशा और पूरी योजना पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत पहले कहते थे कि राजस्थान को हरियाणा से कभी यमुना का पानी नहीं मिल सकता. पूर्व सीएम ने यह भी कहा था कि अगर ऐसा हो गया तो वे खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का फूलों की माला पहनाकर स्वागत करेंगे. राठौड़ ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हरियाणा और राजस्थान के बीच एमओए साइन हो चुका है, इसलिए अब गहलोत को अपना वादा निभाना चाहिए.

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पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने सीएम भजनलाल शर्मा को बताया 'भागीरथ'

राठौड़ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को शेखावाटी का "भागीरथ" बताते हुए कहा कि इस समझौते से पाइपलाइन के जरिए हरियाणा से यमुना का पानी राजस्थान पहुंचेगा, जिससे शेखावाटी क्षेत्र के लंबे समय से चले आ रहे पेयजल संकट को बड़ी राहत मिलेगी और इलाके के विकास को भी नई गति मिलेगी.

'उपलब्धि को जनता के बीच लेकर जाएगी बीजेपी'

उन्होंने कहा कि मंगलवार को जयपुर एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का भव्य स्वागत किया जाएगा और बीजेपी इस उपलब्धि को जनता के बीच लेकर जाएगी. राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में दूसरे राज्यों को पानी नहीं देने की बात कही थी, जबकि अशोक गहलोत वहां जाकर उसी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे.

'अपनी कुर्सी बचाने दिल्ली जाते थे अशोक गहलोत'

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गहलोत अपने कार्यकाल में दिल्ली अपनी कुर्सी बचाने जाते थे, जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राजस्थान के हितों के लिए केंद्र से योजनाएं और सौगातें लेकर आते हैं. राजेंद्र राठौड़ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेखावाटी क्षेत्र से आने वाले पूर्व सांसद सुमेधानंद भी मौजूद थे.

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल

दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने समझौते का स्वागत करते हुए भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ढाई साल से सिर्फ एमओयू और एमओए का खेल खेल रही है, जबकि जमीन पर कोई काम शुरू नहीं हुआ. उन्होंने याद दिलाया कि 2024 में चार महीने में डीपीआर तैयार करने का दावा किया गया था, लेकिन आज तक वह सामने नहीं आई.

टीकाराम जूली ने कहा कि हरियाणा सिर्फ अतिरिक्त पानी देने की बात कर रहा है, ऐसे में राजस्थान को वास्तविक फायदा कितना मिलेगा, यह साफ नहीं है. उन्होंने करीब 33 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना की फंडिंग और पूरे रोडमैप को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा.

टीकाराम जूली ने सरकार की नीयत और इस योजना के धरातल पर उतरने को लेकर गंभीर शंकाएं व्यक्त की हैं. जूली ने कहा कि भाजपा सरकार सिर्फ कागजी समझौतों की राजनीति कर रही है, जबकि जनता अभी भी पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रही है.

'चार महीने का वादा, ढाई साल का इंतजार; कहां है डीपीआर?'

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री के पुराने वादों की याद दिलाते हुए कहा कि "मुख्यमंत्री जी ने साल 2024 में बड़े-बड़े दावे किए थे कि महज 4 महीने के भीतर इस योजना की डीपीआर तैयार हो जाएगी. लेकिन आज ढाई साल बीत जाने के बाद भी डीपीआर का कहीं अता-पता नहीं है." उन्होंने कहा कि "सरकार कभी एमओयू करती है तो कभी एमओए लेकिन ज़मीन पर एक इंच भी काम आगे नहीं बढ़ा है."

'हरियाणा की शर्त से राजस्थान को क्या मिलेगा?'

जूली ने हरियाणा सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस समझौते की बुनियाद ही कमजोर है. हरियाणा के मुख्यमंत्री पहले ही साफ कर चुके हैं कि यमुना का केवल अधिशेष जल ,एक्स्ट्रा पानी ही राजस्थान को दिया जाएगा. ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब यमुना में अतिरिक्त पानी होगा ही नहीं, तो राजस्थान के प्यासे क्षेत्रों को क्या मिलेगा? क्या यह समझौता सिर्फ एक छलावा है?

'₹33,000 करोड़ का बजट: फंडिंग का सोर्स अब तक गुमनाम'

योजना के वित्तीय प्रबंधन पर निशाना साधते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस पूरी परियोजना की लागत लगभग 33,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. लेकिन इतनी भारी-भरकम राशि कहाँ से आएगी? इसकी फंडिंग का सोर्स सरकार ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है. बिना बजट और बिना रोडमैप के इतनी बड़ी योजना को कैसे पूरा किया जाएगा, यह समझ से परे है.

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