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भोपाल में साइबर ठगी का अंतरराज्यीय नेटवर्क पकड़ा गया, राजस्थान के दो एजेंट हिरासत में

भोपाल पुलिस ने साइबर ठगी के अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान के दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह स्वास्थ्य विशेषज्ञों के खातों में साइबर ठगी के लिए मूल खातों का उपयोग करता था।

Jagran के अनुसार4 अगस्त 2026 को 08:15 am बजे
भोपाल में साइबर ठगी का अंतरराज्यीय नेटवर्क पकड़ा गया, राजस्थान के दो एजेंट हिरासत में

सौजन्य से:- Jagran

भोपाल में साइबर ठगी के अंतरराज्यीय नेटवर्क का राजफाश, राजस्थान के दो एजेंट गिरफ्तार

भोपाल पुलिस ने साइबर ठगी के अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान के दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह ने एक एमबीबीएस डॉक्टर से 97, ...और पढ़ें

HighLights

- भोपाल पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।

- राजस्थान के दो एजेंट भोपाल में गिरफ्तार, म्यूल खातों का उपयोग।

- ऑनलाइन गेम लिंक से एमबीबीएस डॉक्टर से ₹97,250 की ठगी।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। कोहेफिजा थाना पुलिस ने साइबर ठगी के अंतरराज्यीय नेटवर्क का राजफाश करते हुए राजस्थान के दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है। गिरोह का मास्टरमाइंड राजस्थान के बाड़मेर में बैठकर देशभर में ठगी को अंजाम देता था, जबकि ठगी की रकम भोपाल में खोले गए म्यूल बैंक खातों में मंगवाई जाती थी।

बाद में एजेंट के जरिये खाताधारकों से नकदी जुटाई जाती थी। इसी गिरोह ने हमीदिया अस्पताल की एमबीबीएस डाक्टर से भी 97,250 रुपये की साइबर ठगी की थी।पुलिस के अनुसार, 22 वर्षीय एमबीबीएस छात्रा रितु कुमारी ने जून 2026 में आनलाइन गेम खेलते समय एक लिंक पर क्लिक किया, जिससे उनके खाते से 84,937 रुपये और उनके मित्र के खाते से 12,313 रुपये निकल गए। डॉक्टर ने इसकी शिकायत दर्ज कराई थी।

जांच में पता चला कि ठगी की रकम बंधन बैंक के एक खाते में पहुंची, इसके बाद भोपाल के एटीएम से दो बार 10-10 हजार रुपये निकाले गए। बैंक ट्रांजेक्शन, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर पुलिस ने होटल में दबिश देकर आरोपित महेश और विकास को गिरफ्तार किया। उनसे पूछताछ में पता चला कि गिरोह का सरगना भोपाल निवासी करतार के माध्यम से कई लोगों के बैंक खाते किराये पर ले रखे थे।

पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े सभी खाताधारकों और मुख्य सरगना की तलाश कर रही है।आरोपियों की गिरफ्तारी बाद एफआईआर पीड़ित डाक्टर ने जून में ही ठगी की शिकायत कर दी थी लेकिन पुलिस करीब डेढ़ महीने तक तकनीकी जांच के नाम पर शिकायत को ठंडे बस्ते में डाले रखा। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

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