राजस्थान के दो अस्पतालों में सर्जरी के बाद 8 महिलाओं और एक नाबालिग की मौत, सरकार ने भेजी एक्सपर्ट टीमें - rajasthan hospitals 9 deaths postsurgery probe ordered
राजस्थान के दो अस्पतालों में सर्जरी के बाद 8 महिलाओं और एक नाबालिग की मौत, सरकार ने भेजी एक्सपर्ट टीमें राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के सरकारी अस्पतालों में सर्जरी के बाद 8 महिलाओं और एक नाबालिग सहित 9 लोगों की मौत…

सौजन्य से:- Jagran
राजस्थान के दो अस्पतालों में सर्जरी के बाद 8 महिलाओं और एक नाबालिग की मौत, सरकार ने भेजी एक्सपर्ट टीमें
राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के सरकारी अस्पतालों में सर्जरी के बाद 8 महिलाओं और एक नाबालिग सहित 9 लोगों की मौत का गंभीर मामला सामने आया है। ...और पढ़ें
HighLights
- भीलवाड़ा-बांसवाड़ा अस्पतालों में सर्जरी के बाद 9 मरीजों की मौत।
- राज्य सरकार ने विशेषज्ञ टीमों से विस्तृत जांच के आदेश दिए।
- स्वास्थ्य मंत्री भीलवाड़ा जाएंगे, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी।
डिजिटल डेस्क, जयपुर। राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों के दो सरकारी अस्पतालों में पिछले एक सप्ताह के दौरान प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में सर्जरी के बाद आठ महिलाओं और एक नाबालिग सहित कुल नौ लोगों की मौत का गंभीर मामला सामने आया है।
इन मौतों ने राज्य में मातृ स्वास्थ्य देखभाल और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से विशेषज्ञ टीमों द्वारा विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने लिया सख्त संज्ञान
राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि सरकार इन घटनाओं को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। मामलों की वास्तविक कारणों की जांच के लिए निदेशालय से विशेषज्ञ अधिकारियों की एक टीम को दोनों जिलों में भेजा गया है।
इन मामलों की समीक्षा करने और सुधारात्मक उपायों पर चर्चा करने के लिए सोमवार को स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक भी आयोजित की जाएगी। इसके अलावा, चिकित्सा मंत्री स्वयं जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए मंगलवार को भीलवाड़ा का दौरा करेंगे।
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मेडिकल जटिलताओं को बताया कारण
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में हुई पांच मौतों के मामले में स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में मौतों और ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक मामले में मौत का कारण अलग-अलग मेडिकल जटिलताएं थीं, जिनमें मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन, हाइपोवोलेमिक शॉक, पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म और गंभीर रक्तस्राव जैसी समस्याएं शामिल थीं।
हालांकि, एहतियात के तौर पर अस्पताल के अधीक्षक अरुण गौड़ ने बताया कि जिस ओटी का सैंपल मानकों पर खरा नहीं उतरा था, उसे पिछले तीन दिनों से बंद कर दिया गया है। वहां स्टरलाइजेशन किया जा रहा है और मौतों की जांच के लिए विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों की एक विशेष समिति का गठन किया गया है।
5 सदस्यीय डॉक्टर कमेटी कर रही जांच
दूसरी ओर, बांसवाड़ा में 7 से 10 जुलाई के बीच तीन महिलाओं और एक नाबालिग की मौत के मामले में जिला कलेक्टर इंद्रजीत सिंह यादव ने विस्तृत जांच के लिए पांच डॉक्टरों की एक समिति का गठन किया है। जयपुर से भी एक टीम जांच के लिए पहुंच रही है।
कलेक्टर ने बताया कि एक मामले में ग्रामीण क्षेत्र में गर्भपात के दौरान हुई जटिलताओं के कारण एक नाबालिग की मौत हुई। इसके अलावा, दो अन्य मामलों में गंभीर खून की कमी और एक मामले में सर्जरी के दौरान उच्च रक्तचाप को मौत का संभावित कारण माना जा रहा है। जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
लापरवाही मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई
चिकित्सा मंत्री खींवसर ने जनता को आश्वासन दिया है कि इस पूरी जांच में इलाज के प्रोटोकॉल, दवाओं की गुणवत्ता, संक्रमण नियंत्रण और निगरानी प्रणाली सहित हर एक पहलू की गहराई से जांच की जाएगी। यह जांच पूरी तरह से वैज्ञानिक और तथ्यों पर आधारित होगी।
इन मौतों पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मंत्री ने घटनाओं को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और स्पष्ट चेतावनी दी कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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