तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान
राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 5 अगस्त को जयपुर के शहीद स्मारक पर महाआंदोलन का ऐलान किया है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
8 साल से तबादलों पर रोक, तृतीय श्रेणी शिक्षक सरकार से करेंगे आर-पार की लड़ाई, 5 अगस्त को जयपुर में महाआंदोलन
संघर्ष समिति ने वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 5 अगस्त को जयपुर में महाआंदोलन का ऐलान किया.
Published : August 3, 2026 at 10:50 PM IST
जयपुर: राजस्थान में थर्ड ग्रेड टीचर्स के ट्रांसफर का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 5 अगस्त को जयपुर के शहीद स्मारक पर महाआंदोलन का ऐलान किया है. शिक्षकों ने बीते 8 सालों के इंतजार का हवाला देते हुए आंदोलन की घोषणा की है. 2018 के बाद से अपने ट्रांसफर का इंतजार कर रहे थर्ड ग्रेड टीचर्स ने अब सरकार से आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है.
संघर्ष समिति के संयोजक सुनील महला ने बताया कि 2008 में 'डार्क जोन' और 2012 में सामान्य जिलों में नियुक्त कई शिक्षक 10 से 18 वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं. बीजेपी ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में 100 दिन के अंदर पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने का वादा किया था, लेकिन सरकार के करीब ढाई साल से ज्यादा का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद ये वादा धरातल पर नहीं उतर सका. उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य संवर्गों में बिना स्पष्ट नीति के तबादले किए जा रहे हैं, लेकिन केवल तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों पर रोक बनी हुई है. इससे शिक्षकों में गहरा असंतोष है। उन्होंने इसे 'पिक एंड चूज' की नीति बताते हुए आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के माध्यम से मनचाही पोस्टिंग दी जा रही है, जबकि सामान्य शिक्षक सालों से परिवार से दूर रहने को मजबूर हैं.
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परिवार से दूरी, मानसिक तनाव और सामाजिक परेशानियां: तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति के सहसंयोजक सूरजभान ने कहा कि लंबे समय से गृह जिले से बाहर सेवा देने वाले शिक्षकों को केवल प्रशासनिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है. कई शिक्षक 20 से 25 वर्षों से बाहरी जिलों में कार्यरत हैं. इससे परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन कठिन हो गया है और बच्चों के रिश्तों तक में परेशानी आने लगी है. उनका दावा है कि लगातार उपेक्षा और वर्षों तक एक ही स्थान पर कार्य करने से शिक्षकों में मानसिक तनाव, हीन भावना और कार्य के प्रति निराशा बढ़ रही है, जिसका असर छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. एकल, विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे शिक्षकों को भी राहत नहीं मिल पा रही है.
भर्तियां होती रहीं, लेकिन तबादले बंद: संघर्ष समिति के अनुसार बीते आठ सालों में राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर शिक्षक भर्तियां की. वर्ष 2017-18 में 54 हजार, 2021 में 15 हजार और 2022 में 48 हजार से ज्यादा नियुक्तियां हुईं. इसके अलावा REET-2024 के तहत करीब 9700 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है. नई नियुक्तियों के कारण पुराने शिक्षकों के गृह जिलों में जाने के अवसर लगातार कम होते जा रहे हैं, और उनके तबादलों पर भी कोई फैसला नहीं लिया जा रहा.
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32 वर्षों से पॉलिसी का इंतजार: समिति ने दावा किया कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों को लेकर ट्रांसफर पॉलिसी बनाने की कवायद वर्ष 1994 से चल रही है, लेकिन आज तक स्थायी नीति लागू नहीं हो सकी। बड़े स्तर पर अंतिम तबादले वर्ष 2018 में हुए थे. इसके बाद कांग्रेस सरकार के दौरान 2021 में करीब 85 हजार शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन तो लिए गए, लेकिन तबादले नहीं हुए। वर्तमान सरकार ने भी संकल्प पत्र में 100 दिन में नीति लागू करने का वादा किया था, लेकिन नीति अभी तक ठंडे बस्ते में ही है.
शिक्षा मंत्री के बयान पर भी नाराजगी: संघर्ष समिति के संयोजक सुनील महला ने शिक्षा मंत्री के उस बयान पर भी आपत्ति जताई है जिसमें तृतीय श्रेणी शिक्षकों को जिला कैडर बताते हुए उनके तबादलों की मांग को नियमों के विपरीत बताया गया. उनका कहना है कि यदि वरिष्ठता (सीनियरिटी) बाधा है तो स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षक वरिष्ठता छोड़ने का शपथ पत्र देने के लिए भी तैयार हैं.
5 अगस्त को महाआंदोलन: बहरहाल, अब शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है. पहले 5 अगस्त को महा आंदोलन किया जाएगा. तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि तृतीय श्रेणी शिक्षकों, शारीरिक शिक्षकों, प्रबोधकों और प्रयोगशाला सहायकों के स्थानांतरण तत्काल शुरू नहीं किए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, ताकि दशकों से राहत का इंतजार कर रहे शिक्षकों और उनके परिवारों को न्याय मिल सके.
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