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जयपुर-कोटा समेत 7 जिलों में फर्जी जांचें लिखी; 9 अस्पताल, 12 डॉक्टर शामिल - Jaipur News

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Dainik Bhaskar के अनुसार25 सितंबर 2026 को 01:05 am बजे
जयपुर-कोटा समेत 7 जिलों में फर्जी जांचें लिखी; 9 अस्पताल, 12 डॉक्टर शामिल - Jaipur News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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- Fake Tests Were Written In 7 Districts, Including Jaipur And Kota; 9 Hospitals And 12 Doctors Were Involved.

जयपुर-कोटा समेत 7 जिलों में फर्जी जांचें लिखी; 9 अस्पताल, 12 डॉक्टर शामिल

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राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में 7 जिलों में भारी घपले सामने आए हैं। घोटाले करने में डॉक्टर और अस्पतालों की मिलीभगत सामने आई है। ऐसे 9 अस्पताल डिटेन किए हैं। 12 से अधिक डॉक्टरों की घपले में मिलीभगत मिली है। आरजीएचएस के तहत जांचों को बार-बार लिखने, बिना क्लिनिकल जरूरत वाली दवाएं लिखने और फर्जी आईडी और गलत हस्ताक्षरों से बार-बार जांचें करवाने के प्रकरण सामने आए हैं।

जांच कराई गई तो जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, अलवर, दौसा समेत 9 बड़े अस्पताल घोटाला करते पाए गए। कई डॉक्टर संदेह के घेरे में हैं लेकिन फिलहाल 3 डॉक्टरों की आईडी ब्लॉक की गई है। अस्पतालों के धन के ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम को ही ब्लॉक किया गया है। लाखों की जांचें गलत पाई गईं और सरकारी भुगतान गलत तरीके से उठाने के प्रकरण सामने आए हैं।

7 जिलों में ऐसे किए घोटाले और कार्रवाई

- कोटा में एक डॉक्टर 2 अस्पतालों में जांचें लिख रहा था। दो अस्पतालों का टीएमएस ब्लॉक कर दिए। डॉक्टर की आईडी ब्लॉक।

- अलवर के एक अस्पताल में एक डॉक्टर के नाम से लिखे गए प्रिस्क्रिप्शन में अलग-अलग हैंडराइटिंग और सिग्नेचर मिले। अलवर के एक अन्य अस्पताल में कई ओपीडी प्रिस्क्रिप्शन में डॉक्टर की सील और सिग्नेचर का एक जैसा पैटर्न पाया गया।

- जोधपुर के अस्पताल में एक चिकित्सक के नाम से दो अलग-अलग हैंडराइटिंग और दो अलग सिग्नेचर पैटर्न मिले।

- दौसा में एक अस्पताल द्वारा पर्याप्त क्लिनिकल फाइंडिंग और जस्टिफिकेशन के बिना जांचें लिखी गई। जरूरत से ज्यादा जांचों की सलाह दी। दौसा में ही अन्य अस्पताल में डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन के सिग्नेचर और मैनुअल प्रिस्क्रिप्शन में अंतर मिला। घपला मिला।

- अलवर के एक अस्पताल में करीब 65 मामलों में पॉलीइथिलीन ग्लाइकोल लिखा गया। जबकि जरूरत ही नहीं थी।

- कई मामलों में सीरम आयरन जांच भी बिना स्पष्ट लक्षण, क्लिनिकल फाइंडिंग या डायग्नोसिस के लिखी गई।

- बीकानेर के अस्पताल से जुड़े चिकित्सक ने शिकायतों के बावजूद बार-बार एक ही तरह की जांचें लिखी। डॉक्टर आईडी भी ब्लॉक।

- जयपुर के अस्पताल से जुड़े डॉक्टर की आईडी अलग हैंडराइटिंग पाए जाने के कारण ब्लॉक की।

- उदयपुर के एक अस्पताल ने कई जांचों का गलत फंड उठाया। टीएमएस ब्लॉक।

डिजिटल मॉनिटरिंग से पकड़ी गड़बड़ी: आरजीएचएस में पारदर्शिता बढ़ाने और अनावश्यक जांचों पर रोक लगाने के लिए लागू की गई प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था से क्लेम में 47 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। 15 जुलाई से लागू इस व्यवस्था के तहत दो हजार रुपए से अधिक की जांचों के लिए प्री-ऑथराइजेशन अनिवार्य किया गया है।

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