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पानी को लेकर राजस्थान की बल्ले-बल्ले? किशाऊ बांध पर 6 राज्यों में MOU

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livehindustan.com के अनुसार16 सितंबर 2026 को 05:04 pm बजे
पानी को लेकर राजस्थान की बल्ले-बल्ले? किशाऊ बांध पर 6 राज्यों में MOU

सौजन्य से:- livehindustan.com

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By Sachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान

किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना के एमओयू पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक नदी टौंस पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के पास प्रस्तावित है।

राजस्थान के लिए पानी से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से चर्चा में रही किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर मंगलवार को नई दिल्ली में बड़ा समझौता हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में किशाऊ परियोजना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का सीधा फायदा राजस्थान को मिलेगा। परियोजना के तहत राजस्थान को 124 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी आवंटित किया जाएगा। इस पानी को यमुना जल परियोजना के तहत शेखावाटी क्षेत्र तक पहुंचाने की योजना है।

किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना के एमओयू पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक नदी टौंस पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के पास प्रस्तावित है।

करीब 15 हजार करोड़ रुपए की लागत वाली इस बहुउद्देश्यीय परियोजना से लगभग 660 मेगावाट बिजली पैदा होने की योजना है। परियोजना से राजस्थान के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को भी लाभ मिलेगा।

किशाऊ बांध से राजस्थान को आवंटित 124 एमसीएम पानी को यमुना जल परियोजना के तहत तीन भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियों के जरिए हरियाणा के हांसीवासी से चूरू तक पहुंचाने की योजना है। इसके बाद इस जल का उपयोग शेखावाटी क्षेत्र में किया जा सकेगा।

इससे सीकर, चूरू और झुंझुनूं समेत आसपास के इलाकों में पेयजल और अन्य आवश्यकताओं के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। पानी की कमी से जूझने वाले शेखावाटी क्षेत्र के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

किशाऊ परियोजना में पानी और बिजली के हिस्से को लेकर राज्यों के बीच अलग व्यवस्था तय की गई है। हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से का एक भाग राजस्थान और दिल्ली को आवंटित किया जाएगा। इसके बदले राजस्थान और दिल्ली हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत में योगदान देंगे।

परियोजना के जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत लागत भागीदार राज्यों को उठानी होगी।

समझौते में राजस्थान के लिए एक और महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। हिमाचल प्रदेश द्वारा अपने विद्युत घटक से जुड़ी लागत वहन किए जाने के बदले उसके आवंटित जल हिस्से का 95 प्रतिशत दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध होगा। हिमाचल प्रदेश अपने स्थानीय उपयोग के लिए 5 प्रतिशत पानी रखेगा।

इस 95 प्रतिशत हिस्से में दिल्ली और राजस्थान की हिस्सेदारी 75:25 के अनुपात में तय की गई है। ऐसे में किशाऊ परियोजना से राजस्थान को मिलने वाला पानी शेखावाटी के लिए अहम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किशाऊ परियोजना के समझौते को राज्यों के बीच आपसी सहयोग की मिसाल बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का आभार जताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के 'सबका साथ-सबका विकास-सबका प्रयास-सबका विश्वास' के विजन से राज्यों की सहमति से दशकों से अटकी परियोजनाओं के समाधान का रास्ता खुल रहा है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान को प्रधानमंत्री के नेतृत्व में यमुना जल समझौता, रामजल सेतु लिंक परियोजना, नर्मदा जल समझौता और किशाऊ बांध परियोजना जैसी बड़ी सौगातें मिली हैं। ये जल समझौते राजस्थान की जल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं और आने वाली पीढ़ियां इन्हें याद रखेंगी।

किशाऊ परियोजना के जरिए राजस्थान को मिलने वाला 124 एमसीएम पानी खास तौर पर शेखावाटी के लिए महत्वपूर्ण है। अब परियोजना के आगे बढ़ने के साथ निगाह इस बात पर रहेगी कि पानी को पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए संबंधित जिलों तक पहुंचाने का काम किस गति से आगे बढ़ता है।

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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