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जयपुर में 6 लाख Gen-Z वोटर का मूड किसके पक्ष में; BJP-कांग्रेस के सामने नई चुनौती

जयपुर में 6 लाख Gen-Z वोटर का मूड किसके पक्ष में; BJP-कांग्रेस के सामने नई चुनौती जयपुर के 150 वार्डों में जेन-जी वोटरों का वितरण एक जैसा नहीं है। कुछ वार्डों में इनकी संख्या 8 हजार से ज्यादा है, जबकि कुछ वार्डों में यह…

Hindustan के अनुसार7 सितंबर 2026 को 02:33 pm बजे
जयपुर में 6 लाख Gen-Z वोटर का मूड किसके पक्ष में; BJP-कांग्रेस के सामने नई चुनौती

सौजन्य से:- Hindustan

जयपुर में 6 लाख Gen-Z वोटर का मूड किसके पक्ष में; BJP-कांग्रेस के सामने नई चुनौती

जयपुर के 150 वार्डों में जेन-जी वोटरों का वितरण एक जैसा नहीं है। कुछ वार्डों में इनकी संख्या 8 हजार से ज्यादा है, जबकि कुछ वार्डों में यह आंकड़ा 2 हजार के आसपास या उससे भी कम है।

जयपुर नगर निगम चुनाव में इस बार मुकाबला सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक का नहीं है। करीब 6 लाख युवा मतदाता ऐसा फैक्टर बनकर उभरे हैं, जो कई वार्डों में चुनावी तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं। जयपुर के कुल 24,24,107 मतदाताओं में करीब 6,01,949 यानी 24.83 फीसदी मतदाता 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के अनुमानित हैं। यानी शहर में लगभग हर चार मतदाताओं में एक युवा है।

युवा वोटरों की यह संख्या किसी एक राजनीतिक दल की पक्की जागीर नहीं है। यही वजह है कि नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के लिए यह वर्ग मौका भी है और चुनौती भी। खासकर उन वार्डों में, जहां हार-जीत का अंतर कुछ हजार वोटों का रहने की संभावना है, वहां युवाओं का रुख निर्णायक साबित हो सकता है।

हर चार में एक युवा, लेकिन हर वार्ड में असर बराबर नहीं

जयपुर के 150 वार्डों में जेन-जी वोटरों का वितरण एक जैसा नहीं है। कुछ वार्डों में इनकी संख्या 8 हजार से ज्यादा है, जबकि कुछ वार्डों में यह आंकड़ा 2 हजार के आसपास या उससे भी कम है।

वार्ड 26 में सबसे ज्यादा करीब 8,797 अनुमानित जेन-जी वोटर हैं। इसके बाद वार्ड 113 में 7,598, वार्ड 50 में 6,644, वार्ड 133 में 6,520 और वार्ड 109 में 6,424 युवा वोटर हैं।

दूसरी ओर वार्ड 93 में जेन-जी वोटरों की संख्या सबसे कम, करीब 1,118 है। वार्ड 31 में 1,817, वार्ड 121 में 1,821 और वार्ड 30 में 2,026 अनुमानित युवा मतदाता हैं।

यानी एक तरफ ऐसे वार्ड हैं जहां युवा वोटरों की संख्या ही चुनावी समीकरण का बड़ा हिस्सा बन सकती है, वहीं दूसरी तरफ कुछ वार्डों में इनका प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित रहेगा।

पहली बार वोट डालने वाले 1.05 लाख युवा सबसे बड़ा ‘साइलेंट फैक्टर’

इनमें सबसे ज्यादा ध्यान 18 से 20 साल के 1,05,033 मतदाताओं पर है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जो पहली बार मतदान कर रहे हैं या शुरुआती चुनावी अनुभव हासिल कर रहे हैं।

इनका वोटिंग पैटर्न पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से कितना अलग होगा, यही चुनाव की दिलचस्प कहानी बन सकती है। पहली बार वोट डालने वाला युवा जाति और पुराने राजनीतिक रिश्तों से आगे बढ़कर सड़क, ट्रैफिक, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पार्क, खेल सुविधाएं, शिक्षा, रोजगार, इंटरनेट और सार्वजनिक परिवहन जैसे मुद्दों को ज्यादा तवज्जो दे सकता है।

सांगानेर और विद्याधर नगर में सबसे बड़ा युवा प्रभाव

विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से देखें तो सांगानेर सबसे बड़ा युवा वोटर बेस वाला क्षेत्र है। यहां संबंधित वार्डों में करीब 90,123 अनुमानित जेन-जी वोटर हैं। इसके बाद विद्याधर नगर में 89,085, हवामहल में 68,321, बगरू में 67,791 और आदर्श नगर में 63,127 युवा वोटर हैं।

सांगानेर में कुल मतदाताओं की संख्या 3,69,244 है, जबकि विद्याधर नगर में 3,61,612। दोनों क्षेत्रों में करीब एक-चौथाई मतदाता 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के हैं। इसलिए यहां प्रत्याशियों के लिए युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाना महज प्रचार रणनीति नहीं, बल्कि चुनावी जरूरत बन सकता है।

आमेर में संख्या कम, लेकिन अनुपात सबसे ज्यादा

युवा वोटरों के आंकड़ों में आमेर सबसे दिलचस्प तस्वीर पेश करता है। यहां वार्ड 148, 149 और 150 को मिलाकर अनुमानित जेन-जी वोटरों की संख्या करीब 14,106 है, जो सभी विधानसभा क्षेत्रों में सबसे कम है।

लेकिन कुल मतदाताओं के मुकाबले इनकी हिस्सेदारी करीब 29.5 फीसदी है। यानी आमेर में युवा वोटरों की संख्या भले ही कम हो, लेकिन मतदाता समूह में उनका वजन सबसे ज्यादा है। यही अंतर चुनावी विश्लेषण को और दिलचस्प बनाता है।

जेन-जी आखिर चाहता क्या है?

यहां एक बात स्पष्ट करना जरूरी है। जेन-जी के लिए आमतौर पर 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी को माना जाता है। लेकिन उपलब्ध चुनावी आंकड़ों में 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग लिया गया है। इसलिए इस रिपोर्ट में इसे जेन-जी वोटर का चुनावी प्रॉक्सी माना गया है।

मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में बड़ी हुई यह पीढ़ी राजनीतिक संदेशों को सिर्फ मंच और पोस्टर के जरिए नहीं देखती। प्रत्याशी की डिजिटल मौजूदगी, स्थानीय काम का रिकॉर्ड और सीधे संवाद की क्षमता भी उसके लिए मायने रख सकती है।

BJP-कांग्रेस के लिए असली परीक्षा

करीब 6.02 लाख युवा वोटरों को किसी एक पार्टी का वोट बैंक मानना जल्दबाजी होगी। भाजपा को अपने मजबूत संगठन और डिजिटल नेटवर्क का फायदा मिल सकता है, जबकि कांग्रेस के सामने युवा मुद्दों को स्थानीय निकाय के एजेंडे से जोड़ने की चुनौती होगी।

आखिरकार निगम चुनाव में फैसला सड़क, नाली, सफाई और स्थानीय सुविधाओं पर ही होना है। इसलिए जिस प्रत्याशी की पहुंच युवाओं तक सिर्फ भाषण में नहीं, बल्कि उनके रोजमर्रा के मुद्दों तक होगी, वह बढ़त बना सकता है।

इस चुनाव में जेन-जी शायद अकेले नतीजा तय न करे, लेकिन जहां मुकाबला कुछ हजार वोटों पर अटका, वहां यही करीब 6 लाख युवा वोटर ‘गेमचेंजर’ साबित हो सकते हैं।

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